Ncert Solution For Class 8th | व्यापार से साम्राज्य तक पाठ- 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

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Ncert Solution For Class 8th व्यापार से साम्राज्य तक पाठ- 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर के इस post में आप सभी विद्यार्थियों का wellcome है, इस post के माध्यम से सभी विद्यार्थियों के लिए पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण सभी दीर्घ उत्तरीय वह Qustion जो पिछले कई Exams में पूछे जा चुके हैं, उन सभी प्रश्नों को आपके लिए इस post पर cover किया गया है, जो Exams की दृष्टि से काफी important है, तो चलिए शुरू करते हैं-

Ncert Solution For Class 8th व्यापार से साम्राज्य तक पाठ- 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

1 राज्य हड़प की नीति के क्या परिणाम हुए ?
उत्तर-भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के लिए लॉर्ड डलहौजी ने विलय या राज्य हड़प की नीति का सहारा लिया। इसके तहत सर्वप्रथम सतारा (1848). संबलपुर (1850), नागपुर (1852) और झाँसी को इस आधार पर अपने राज्य में मिला लिया कि इन रियासतों का कोई पुरुष वारिस नहीं था।

कुशासन का आरोप लगाकर 1856 ई० में अवध को अपने नियंत्रण में ले लिया गया। अपने नवाब को गद्दी से हटाये जाने का अवध की जनता ने काफी विरोध किया और 1857 के महान विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभायी।

डलहौजी ने अपनी इस नीति द्वारा देशी नरेशों और उनकी प्रजा में असंतोष की भावना भर दी तथा नेक अंग्रेज विरोधी विद्रोहों को बढ़ावा दिया।

2 बंगाल की दीवानी मिलने से कंपनी को क्या लाभ हुए? ।
उत्तर-मीर जाफर को दोबारा नवाब बनाया गया। अब नवाब कंपनी । को हर महीने पाँच लाख रुपए चुकाता था। कंपनी अपने । सैनिकों के खर्चों से निपटने, व्यापारिक जरूरतों तथा अन्य ।

खर्चों को पूरा करने के लिए और पैसा चाहती थी। कंपनी । और ज्यादा इलाके तथा और ज्यादा कमाई चाहती थी। । 1765 में मीरजाफर की मृत्यु के बाद मुगल सम्राट ने कंपनी को बंगाल का नवाब बना दिया। इससे कंपनी को बंगाल के ।

विशाल राजस्व संसाधनों पर नियंत्रण मिल गया। प्लासी । युद्ध के पश्चात् कंपनी को ब्रिटेन से सोने की निकासी कम होने लगी और बंगाल की दीवानी मिलने के बाद ब्रिटेन से ।

सोना लाने की जरूरत ही नहीं रही। अब भारत से होनेवाली आमदनी से कंपनी अपना खर्च चला सकती थी।

3 कंपनी की सेना की संरचना में आए बदलाव का वर्णन करें। ।
उत्तर-1820 के दशक में जैसे-जैसे युद्ध के तकनीक बदलने लगी। कंपनी की सेना में घुड़सवार टुकड़ियों की जरूरत कम होती गई। ब्रिटिश साम्राज्य बर्मा, अफगानिस्तान और मिश्र में भी रह
रहा था जहाँ सिपाही मस्केट (तोड़ेदार बन्दूक) और मैचलॉक से लैस होते थे।

कंपनी की सेना के सिपाहियों को बदलती सैनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखना पड़ता था। और अब । उनकी पैदल टुकड़ी ज्यादा महत्त्वपूर्ण होती जा रही थी।

19 वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेज एक समरूप सैनिक संस्कृति विकसित करने लगे। सिपाहियों को यूरोपीय ढंग का प्रशिक्षण, अभ्यास और अनुशासन सिखाया जाने लगा। उनका जीवन पहले से ज्यादा नियंत्रित था।

अंग्रेज पेशेवर सिपाहियों । की सेना खड़ा करने के चक्कर में जाति और समुदाय की भावनाओं को नजरअन्दाज कर देते थे।

4 बंगाल के नवाबों और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच किन बातों पर विवाद था ?
उत्तर-जब सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब बने उस समय कंपनी को नवाब के ताकत से काफी भय था। कंपनी कठपुतली नवाब चाहती थी जो उसे व्यापारिक रियासतें और अन्य सुविधाएँ
आसानी से देने में आनाकानी न करे।

कंपनी ने प्रयास किया कि सिराजुद्दौला के प्रतिद्वंद्वियों में से किसी को नवाब बना दिया जाए। सिराजुद्दौला ने हुक्म दिया कि कंपनी उनके राज्य के राजनीतिक मामलों में टाँग अड़ाना बंद कर दे, किलेबंदी रोके बकायदा राजस्व चुकाए। जब दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तो सिराजुद्दौला ने 30,000 सिपाहियों के साथ कासिम बाजार स्थित इंगलिश फैक्ट्री पर हमला बोल दिया।

नवाब के फौजों ने कंपनी के अफसरों को गिरफ्तार कर लिया, गोदाम पर ताला डाल दिया। अंग्रेजों के हथियार छीन लिए और जहाजों को घेरे में ले लिया। इसके बाद नवाब ने कंपनी के कलकत्ता स्थित किले पर कब्जे के लिए उधर रुख किया।

कलकत्ता के हाथ से निकल जाने की खबर सुनने पर मद्रास में तैनात कंपनी के अफसरों ने रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में सेनाओं को रवाना कर दिया। इस सेना को नौसैनिक बेड़े की मदद मिल रही थी। इसके बाद नवाब के साथ लम्बे समय तक सौदेबाजी चली। क्लाइव ने सिराजुद्दौला के सेनापति को मिलाकर प्लासी के युद्ध में उसे हरा दिया। jac Board