विकाश पाठ 1 लघु उत्तरीय प्रश्न | NCERT Solution For Class 10th Economics

0

विकाश पाठ 1 लघु उत्तरीय प्रश्न | NCERT Solution For Class 10th Economics के सीरीज में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी को पाठ से संबंधित जितने भी लघु उत्तरीय महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी प्रश्न हैं, उन सभी प्रश्नों को अध्ययन करने का मौका मिलेगा, जोकि पिछले कई परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं, इस ब्लॉग पर उन सभी प्रश्नों को विस्तार से कवर किया गया है, इसलिए इस ब्लॉग को आप जरूर पूरा पढ़ें जिससे आने वाली परीक्षा की तैयारी आपका अच्छा हो सके, तो चलिए शुरू करते हैं |

विकाश पाठ 1 लघु उत्तरीय प्रश्न | NCERT Notes

1 विश्व बैंक विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने के लिए किस प्रमुख मापदण्ड का प्रयोग करता है ? इस मापदण्ड की, अगर कोई हैं, तो सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर-विश्व बैंक द्वारा साधारणतया विभिन्न देशों का वर्गीकरण करने के लिए प्रमुख रूप से आय के मापदण्ड का प्रयोग किया जाता है। जिन देशों की आय अधिक होती है उन्हें कम आय वाले देशों से अधिक विकसित मानता है।
परन्तु विभिन्न देशों की तुलना करते समय उनकी कुल आय को ध्यान में रखकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है क्योंकि विभिन्न देशों की जनसंख्या भिन्न होती है इसलिए इससे यह पता नहीं चलता कि औसत व्यक्ति क्या कमा रहा है।
इसलिए दो देशों की तुलना करते समय कुल आय की बजाए औसत आय से तुलना करते हैं। इसी औसत आय को प्रति व्यक्ति आय भी कहा जाता है। विश्व बैंक ने अपनी 2006 की विश्व विकास रिपोर्ट में इसी औसत आय के मापदण्ड से देशों का वर्गीकरण किया है।
वे देश जिनकी प्रति व्यक्ति आय 10,066 डालर प्रति वर्ष या उससे अधिक थी उन्हें समृद्ध देश माना गया और जिन देशों में प्रति व्यक्ति आय 825 डालर प्रति वर्ष या उससे कम थी उन्हें निम्न आय का देश कहा गया।

विकाश पाठ 1 कक्षा 10 प्रश्न उत्तर

2 विकास मापने का यू० एन० डी० पी० का मापदण्ड किन पहलुओं में विश्व बैंक के मापदण्ड से अलग हैं ?
उत्तर-विश्व बैंक ने विभिन्न देशों के विकास की तुलना करते समय केवल आय के मापदण्ड को ही अधिक महत्व दिया है परन्तु यह मापदण्ड उचित नहीं है क्योंकि एक बेहतर जीवन व्यतीत करने के लिए आय के अतिरिक्त भी कुछ अन्य चीजों की भी आवश्यकता पड़ती है।
विश्व बैंक के वर्गीकरण से परे हटकर यू० एन० डी० पी० ने जो वर्गीकरण का मापदण्ड अपनाया है, वह कहीं बेहतर माना जाता है। इससे इसके द्वारा देशों की तुलना करते समय प्रति व्यक्ति आय के साथ-साथ निम्नांकित पहलुओं पर भी जोर दिया गया है-
(क) लोगों का शैक्षणिक स्तर,
(ख) लोगों का स्वास्थ्य स्तर।
वर्गीकरण का यह ढंग अधिक उचित लगता है।
3 हम औसत का प्रयोग क्यों करते हैं ? इनके प्रयोग करने की क्या कोई सीमाएँ हैं ? विकास से जुड़े अपने उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर-साधारणतया दो देशों की तुलना करते समय बहुत से लोग उनकी कुल आय को अपने सामने रखते हैं। जिसकी कुल आय अधिक होती है उसे हम दूसरे से अधिक सम्पन्न या विकसित मान लेते हैं।
परन्तु ऐसा ठीक नहीं है क्योंकि देशों की जनसंख्या भिन्न-भिन्न होती है इसलिए कुल आय से उनकी तुलना नहीं की जा सकती। इसलिए प्रायः औसत आय को ही आधार माना जाता है जो उस देश की कुल आय को उसकी कुल जनसंख्या से भाग देने से निकल आती है।
इस औसत आय को ही प्रति व्यक्ति आय कहा जाता है।
औसत आय तुलना के लिए उपयोगी है परन्तु इसमें भी एक कमी है जो यह है कि इससे यह पता नहीं चलता कि यह आय लोगों में किस प्रकार वितरित है।
यह बात नीचे दिए गए दो देशों की तुलना से और भी स्पष्ट हो जाती है-

देश 2007 में नागरिकों की माहवार आय (रुपए में)
I II III IV V औसत
देश ‘क’ 9,500 10,500 9,800 10,000 10,200 50,000
देश ‘ख 500 500 500 500 48,000 50,000

दोनों देशों-क और ‘ख’ की माहवार आय 50,000 रुपए है, परन्तु हर कोई देश’क’ में रहना चाहेगा न कि देश ख’ में चाहे दोनों देश की माहवार आय बराबर है। क्योंकि ‘क’ देश में न कोई अमीर है और न कोई गरीब, सब बराबर है जबकि ‘ख’ देश में बहुत अन्तर है कोई बहुत गरीब और कोई बहुत अमीर।
विकाश पाठ 1 कक्षा 10 Ncert Solutions Economics
4 पर्यावरण में गिरावट के कुछ ऐसे उदाहरणों की सूची बनाएँ जो आपने अपने आसपास देखे हों।
उत्तर-जब मनुष्य अपने लालच के कारण संसाधनों का दुरुपयोग करता है या आवश्यकता से अधिक उनका प्रयोग करता है तो पर्यावरण दूषित हो जाता है और उसका अवक्रमण होने लगता है। वनों के निरन्तर काटे जाने और कारखानों से उठने वाले धुएँ तथा विषैले पदार्थों के निरन्तर निकलते रहने से पर्यावरण निरन्तर दूषित होता रहता है।
इसके साथ-साथ जब एक देश में परमाणु प्रयोग किए जाते हैं तो उनका प्रभाव भी एक देश तक सीमित नहीं रहता वरन् आस-पास के देशों पर भी उसका गहरा प्रभाव पड़ता है और उनका पर्यावरण भी दूषित हो जाता है। पर्यावरण के अवक्रमण के उदाहरण हमारे आस-पास भी देखे जा सकते हैं।
मीठे पानी की मात्रा विश्व भर में बहुत कम है। यदि एक देश अधिक सिंचाई द्वारा कुओं और नलकूपों से उनका अन्धाधुन्ध प्रयोग करता रहेगा तो केवल उसी देश का ही नहीं वरन् आस-पास के देशों में भी पानी का स्तर नीचे गिरता चला जाएगा। वैज्ञानिक यह निरन्तर चेतावनी देते जा रहे हैं कि विश्व में यदि कोई अगले संकट की सम्भावना हो सकती है, तो वह मीठे पानी का संकट होगा।
इस प्रकार यह कहना बिल्कुल सत्य है कि पर्यावरण का अवकगण केवल एक राष्ट्रीय मुदा नहीं है बल्कि यह एक अंतराष्ट्रीय मुदा है। एक देश की भी मूर्थता विश्व भर को संकट में डाल सकती है।
5 नीचे दी गई तालिका में भारत में वयस्कों को अनुपात दिखाया गया है। यह वर्ष 2001 में देश के विभिन्न राज्यों के एक सर्वेक्षण पर आधारित है तालिका का
अध्ययन करके निम्नांकित प्रश्नों का उत्तर –

राज्य स्त्रियाँ (%) पुरुष (%)
केरल 22 19
कर्नाटक 36 38
मध्य प्रदेश 43 42
सभी राज्य 37 36

(क) केरल और मध्य प्रदेश के लोगों के पोषण स्तरों की तुलना करें।
(ख) क्या आप अन्दाज लगा सकते हैं कि देश के लगभग 40 प्रतिशत लोग अल्पपोषित क्यों है, यद्यपि यह तर्क दिया जाता है कि देश में पर्याप्त खाद्य है? अपने शब्दों में विवरण दें।
उत्तर-(क) केरल में लोगों के पोषणिक स्तर स्त्रियों और पुरुषों दोनों का काफी ऊँचा है, विशेषकर मध्य प्रदेश की तुलना में।
(ख) देश में पर्याप्त अनाज है परन्तु फिर भी देश के 40% लोग अल्पपोषित है, जिसके मुख्य कारण निम्नांकित है-
(i ) देश के बहुत से लोग अभी भी गरीबी रेखा से नीचे है। इसलिए ये पौष्टिक आहार नहीं ले सकते।
(ii) देश में अभी भी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है इसलिए अभी भी बहुत से लोग अशिक्षित और रोगी बनकर जीते हैं और ऐसी परिस्थितियों में ये पौष्टिक आहार से वंचित रह जाते हैं।
(iii) देश के बहुत से राज्यों में, जैसे- पंजाब और मध्य प्रदेश में जन वितरण प्रणाली ठीक ढंग से काम नहीं कर रही इसलिए बहुत से लोग कम दामों पर पौष्टिक आहार की सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।vikash

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here