विज्ञान चमत्कार या अभिशाप वरदान के रूप में निबंध।NCERT क्लास10th व्याकरण

विज्ञान चमत्कार या अभिशाप वरदान परिचय

आज का समय विज्ञान का समय है। हमारे दैनिक जीवन का कोई भी क्षेत्र इनसे अछूता नहीं है। बहुत पहले प्राचीन काल में असंभव समझे जाने वाले कोई भी तथ्यों को विज्ञान ने संभव कर दिखाया है। छोटी-सी सुई से लेकर आकाश की दूरी नापते हवाई जहाज तक ये सभी विज्ञान की देन हैं ।विज्ञान चमत्कार या अभिशाप वरदान के बारे में विस्तार से पढ़े ।

विज्ञान चमत्कार या अभिशाप के इस पैराग्राफ में विज्ञान ने एक ओर मनुष्य को जहाँ पर अपार सुख सुविधाएँ प्रदान की हैं, इसी तरह दूसरी ओर दुर्भाग्यपूर्ण, नाभिकीय यंत्रों आदि के विध्वंशकारी आविष्कारों ने संपूर्ण मनुष्य जाति को विनाश के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है ।इसलिए एक ओर तो मनुष्य के लिए वरदान है वहीं दूसरी ओर समस्त मानव सभ्यता के लिए अभिशाप भी बन गया है ।

विज्ञान ‘वरदान’ के रूप में-

 विज्ञान ने अंधों को ऑखें दी हैं, बहरों को सुनने की ताकत। लाईलाज रोगों की रोकथाम की है तथा अकाल मृत्यु पर विजय पाई है। विज्ञान की सहायता से यह युग बटन-युग बन गया है। बटन दबाते ही वाय-देवता हमारी सेवा करने लगते हैं, इंद्र-देवता वर्षा करने लगते हैं, कहीं प्रकाश जगमगाने लगता है तो कहीं शीत-उष्ण वायु के झोंके सुख पहुंचाने लगते हैं।

विज्ञान चमत्कार या अभिशाप में बस, गाड़ी, वायुयान आदि ने स्थान की दूरी को बाँध दिया है। टेलीफोन द्वारा तो हम सारी वसुधा से बातचीत करके उसे वास्तव में कुटुंब बना लेते हैं। हमने समुद्र की गहराइयाँ भी नाप डाली हैं और आकाश की ऊँचाइयाँ भी। हमारे टी० वी०, रेडियो, वीडियो में मनोरजंन के सभी साधन कैद हैं। सचमुच विज्ञान ‘वरदान’ ही तो है। 

विज्ञान ‘अभिशाप’ के रूप में- 

मनुष्य ने जहाँ विज्ञान से सुख के साधन जुटाए हैं और वहाँ दुख के अंबार भी खड़े कर लिए हैं। विज्ञान के द्वारा हमने अणु बम, परमाणु बम तथा अन्य ध्वंसकारी शस्त्र-अस्त्रों का निर्माण कर लिया है। वैज्ञानिकों का कहना है, कि अब दुनिया में इतनी विनाशकारी सामग्री इकट्ठी हो चुकी है एवं उससे सारी पृथ्वी को अनेक बार नष्ट किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त प्रदूषण की समस्या बहुत बुरी तरह फैल गई है।

रोज नए असाध्य रोग पैदा होते जा रहे हैं।जो वैज्ञानिक साधनों के अंधाधुंध प्रयोग करने के दुष्परिणाम हैं। ज्ञानिक प्रगति का सबसे बड़ा दुष्परिणाम मानव-मन पर हुआ है। पहले जो मानव निष्कपट था, निस्वार्थ था. भोला था। मस्त और बेपरवाह था, वह अब लालच, स्वार्थी, चालाक, भौतिकतावादी तथा तनावग्रस्त हो गया है। उसके वन में से संगीत गायब हो गया है। धन की प्यास जाग गई है। नैतिक मूल्य नष्ट हो गए हैं। 


निष्कर्ष –

 वास्तव में विज्ञान को वरदान या अभिशाप बनाने वाला मनुष्य है। जान से हम रसोई भी बना सकते हैं और किसी का घर भी जला सकते है, जैसे चाकू से हम फलों का स्वाद भी ले सकते हैं और किसी की हत्या भी कर सकते हैं।. उसी प्रकार विज्ञान से हम सुख के साधन भी जुटा सकते हैं, और मानव का विनाश भी कर सकते हैं। अत: विज्ञान को वरदान या अभिशाप बनाना मानव के हाथ में है। इस संदर्भ में एक उक्ति याद रखनी चाहिए विज्ञान अच्छा सेवक है, लेकिन बुरा हथियार।