वन एवं वन्य जीव संसाधन पाठ 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर NCERT Solution For Class 10 Geography

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वन एवं वन्य जीव संसाधन पाठ 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर NCERT Solution For Class 10 Geography के इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है आज हम बात करने वाले हैं इस पाठ से जुड़ी हर परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न जो कई परीक्षाओं में इस टाइप का प्रश्न पूछे जा चुके हैं, यदि आप इस ब्लॉग पोस्ट को बारीकी से Read करते हैं तो आपको आने वाले एग्जाम में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती यानी परीक्षा की तैयारी करने में आपको काफी मदद मिलेगी।

वन एवं वन्य जीव संसाधन पाठ 2 के सभी परीक्षा उपयोगी सवालों के उत्तर 

वन एवं वन्य जीव संसाधन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
वन एवं वन्य जीव संसाधन लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
वन एवं वन्य जीव संसाधन अति लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
1 वन और वन्य जीव संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों पर एक निबन्ध लिखें।
उत्तर- मानव सदियों से प्रकृति की पूजा करता आ रहा है। भारतीय संस्कृति में भी प्रकृति और इसके कृतियों को पवित्र मानकर उसकी पूजा करना तथा उनकी रक्षा करने की परम्परा है। भारतीय संस्कृति में वनों का महत्त्वपूर्ण स्थान है।
यहाँ की अनेक जनजातियों पनों को पवित्र मानकर उसकी पूजा करते है। वन ऋषि मुनियों की तपोभूमि भी रही है। हमारे धर्मग्रन्थों में भी वन को देवता तुल्य मानकर उनकी पूजा करने की परम्परा का उल्लेख है। आज भी हमारे समाज में कुछ लोग कुछ विशेष पेजों की पूजा करते है और आदिकाल से उनकी रक्षा करते आ रहे है।
छोटानागपुर में मुण्डा एवं संथाल जनजातियों महुआ एवं कदंब के पेड़ों की पूजा करते है। बिहार और उड़ीसा की जनजातियों विवाह के दौरान इमली और आम के पेड़ की पूजा करते हैं। हममें से बहुत लोग पीपल, वटवृक्ष, तुलसी, नीम इत्यादि को भी पवित्र मानकर उसकी पूजा करते हैं तथा उसकी रक्षा करते हैं।
भारतीय संस्कृति में आमतौर पर झरनों, पहाड़ों, पेड़ों एवं पशुओं को पवित्र मानकर उनका संरक्षण किया जाता है। बहुत से मंदिरों के आसपास बन्दर एवं लंगूरों को लोग खिलाते-पिलाते है और उन्हें मंदिर के भक्तों में गिनते हैं।
राजस्थान में विश्नोई खेजड़ी वृक्ष तथा काले हिरण की रक्षा करते हैं। उनके गांवों के आसपास
काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय एवं मोरों के झुण्ड दिखाई पड़ना आम बात है जो वहाँ के समुदाय के अभिन्न अंग हैं उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।
2 वन्य जीवों के संरक्षण के लिए तत्काल उपाय करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर-विभिन्न जीव-जन्तुओं के संरक्षण की आवश्यकता-
(क) सर्वप्रथम हमारी प्राकृतिक सम्पदा विशेषकर जीव-जन्तु प्रकृति के सौन्दर्य को चार चाँद लगा देते है और धरती को स्वर्ग का रूप दे देते हैं।
(ख) विभिन्न प्रकार के पक्षी-पशु इतनी मधुर ध्वनियों निकालते है कि बहुत से कवि और चित्रकार मुग्ध होकर रह जाते है और कमाल की रचनाओं का सृजन कर डालते है।
(ग) भारत की प्राकृतिक सम्पदा और वन्य प्राणियों को देखने के लिए हर वर्ष अनेक दर्शकगण भारत आते रहते हैं, इस प्रकार अनजाने में भारत को बहुत सी विदेशी मुदा प्राप्त हो जाती है।
(घ) विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु परिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में बड़े सहायक सिद्ध होते है।
(ङ) यदि प्राकृतिक सम्पदा, विशेषकर विभिन्न जीव-जन्तुओं के संरक्षण की अवहेलना कर दी गई तो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत से पशुओं और पक्षियों की प्रजातियों भी लुप्त हो जायेंगी और वे बेचारे उनके दर्शन से वंचित रह जायेंगे।
(च) यदि विभिन्न जीव-जन्तुओं के संरक्षण का ध्यान न रखा जायेगा तो गडा. बाघ, कस्तूरी हिरण तथा सोहन चिडिया जैसे अमूल्य जीव-जन्तु शिकारियों की बन्दूक का निशाना बनकर रह जायेंगे।

वन एवं वन्य जीव संसाधन पाठ 2 Ncert Solution For Class 10th

3 भारत में विभिन्न समुदायों ने किस प्रकार वनों और वन्य जीव संरक्षण और रक्षण में योगदान किया है ? विस्तारपूर्वक विवेचन करें।
उत्तर- इसमें कोई संदेह नहीं कि दोनों केन्द्रीय और राज्य सरकारे वनों और वन्य जीव के संरक्षण के लिए प्रयत्नशील है, परन्तु इस दिशा में जो कार्य विभिन्न समुदायों ने किया यह भी प्रशंसा योग्य है-
(क) राजस्थान में अनेक गांवों के लोगों ने वन्य जीव रक्षण नियम का सहारा लेकर
सरिस्का बाघ रिजर्व में होने वाले खनन कार्य का डटकर विरोध किया और काफी सफलता पाई।
(ख) इसी प्रकार हिमालय के बहुत से क्षेत्रों में लोगों ने चिपको आन्दोलन द्वारा वृक्षों के काटने के सभी प्रयत्नों को असफल बना दिया।
(ग) राजस्थान के अलवर जिले के पौंच गांवों के लोगों ने तो 1200 हेक्टेयर वन भूमि को भैरोदेव डाकव सोंचुरी घोषित करके वहाँ अपने ही नियम बनाकर शिकार करना वर्जित कर दिया और बाहरी लोगों की घुसपैठ से वे वन्य जीवन को बचाते हैं।
(घ) हमारे देश के लोग सदियों से ही प्रकृति के पुजारी रहे हैं। इसलिए इन्होंने अनेक वनों को देवी-देवताओं के वन कहकर उन्हें बाहरी छेड़छाड़ से बचाए रखा ।
(ङ) आज भी भारत के अनेक समुदाय है जो पीपल और वटवृक्षों को पवित्र मानते है। छोटानागपुर क्षेत्र में मुंडा और संथाल जातियों महुआ और कदंब के पेड़ों की पूजा करते है। उड़ीसा और बिहार की जनजातियों इमली और आम के पेड़ों की पूजा करते है। इसी तरह और भी बहुत से जातियों अपने पूज्य पेड़ों को आसानी से काटने नहीं देती।
(ज) इसी प्रकार बहुत से लोग अपने पशु-पक्षियों को देवी-देवताओं के वाहन और प्रतीक मानकर उनकी रक्षा करते है। ऐसे पशु-पक्षियों में बन्दर, लंगूर, शेर, गरुड, मोर आदि विशेषकर उल्लेखनीय है और कोई इनको नुकसान नहीं पहुँचाता।
4 प्रशासनिक उद्देश्य के आधार पर वनों का वर्गीकरण कितने प्रकार से किया गया है
उत्तर- जीवन में वनों का बडा ही महत्व है। वन उत्पादन और संरक्षण के दो महत्वपूर्ण कार्य करते है। वनों में रहने वाले जीय जनुओं को आश्रय प्रदान करते है ।
प्रशासनिक उद्देश्य के आधार पर वनों को तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है-
(क) आरक्षित वन (ख) संरक्षित वन और (ग) अवर्गीकृत वन।
(क) आरक्षित वन – वे वन जो हमेशा ईमारती लकड़ी एवं अन्य उत्पादों का सत्पादन करने के लिए सम्पर्तित होते हैं, ये आरक्षित वन कहलाते हैं। इन वनों में कभी-कभी पशुओं को चराने एवं कृषि करने की भी अनुमति होती है।
आरक्षित वन अधिक से अधिक पशुओं को आश्रय प्रदान करते हैं। भारत के कुल भूमि के 44% भाग पर आरक्षित वन पाए जाते है।
(ख) संरक्षित वन – संरक्षित वन में इस बात पर विशेष जोर दिया जाता है कि उन
जीव और जतुओं को अधिक से अधिक आश्रय प्रदान किया जाए जिनकी संख्या दिन-प्रतिदिन समाप्त होती जा रही है। इन जीव-जंतुओं की देखभाल के लिए और इनके शिकार पर रोकथाम के लिए वन द्वारा अनेक कर्मचारी रखे गये है। हमारी कुल भूमि के 29.2% भाग पर संरक्षित वन पाए जाते
(ग) अवर्गीकृत वन-वे वन जो बहुत ही अगम्य है या खाली पड़े हैं उन्हें अवगीकृत इन कहते है। हमारी कुल भूमि के 16.4% भाग पर अवर्गीकृत वन पाए जाते है।

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