सत्ता की साझेदारी पाठ 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न Ncert Solution For Class 10th Civics

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सत्ता की साझेदारी पाठ 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न Ncert Solution For Class 10th Civics के इस ब्लॉग पोस्ट पर आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है , आज इस ब्लॉग पोस्ट पर इस पाठ से सबंधित हर महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर के बारे में जानेंगे जो पिछले कई परीक्षाओं में पूछे जा चुके है, इस लिए इस पोस्ट को अवश्य पूरा read करे , उम्मीद है आपको काफी मदद मिलेगी |

सत्ता की साझेदारी पाठ 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर Ncert Solutions

सत्ता की साझेदारी पाठ 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
सत्ता की साझेदारी पाठ लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
सत्ता की साझेदारी पाठ अति लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
1 आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं? इनमें से प्रत्येक का एक उदाहरण भी दें।
अथवा. सत्ता की साझेदारी के किन्हीं चार रूपों की व्याख्या करें।
उत्तर-आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके निम्नांकित हैं-
(क) सत्ता के बँटवारे का पहला रूप हमें सरकार के तीन अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में सत्ता के बँटवारे में मिलता है। जैसे- भारत के संविधान ने शक्ति का विभाजन विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में कर रखा है। शक्ति के ऐसे बँटवारे को क्षैतिज वितरण कहा जाता है।
(ख) सत्ता के बँटवारे का दूसरा रूप हमें सरकार के बीच विभिन्न स्तरों में सत्ता के बँटवारे में मिलता है। सारे देश के लिए केन्द्रीय सरकार होती है. प्रांत या क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग सरकारें होती हैं। उच्चतर और निम्नस्तर की सरकारों के बीच सत्ता के इस बँटवारे को उर्ध्वाधर वितरण कहा जाता है। भारत के संविधान में केन्द्रीय और राज्य सरकारों की शक्तियों को अलग-अलग सूचियों में बाँट दिया गया है।
(ग) सत्ता का कई बार बँटवारा सामाजिक समूहों जैसे- भाषा समूहों और धार्मिक समूहों में भी कर दिया जाता है। बेल्जियम की सामुदायिक सरकार इस व्यवस्था का एक उत्तम उदाहरण है।
(घ) कई बार सत्ता का बँटवारा राजनीतिक दलों एवं दबाव-समूहों में भी कर दिया जाता है। यदि अनेक पार्टियाँ मिलकर सरकार का निर्माण करती है तो सत्ता का बँटवारा विभिन्न पार्टियों में कर दिया जाता है। कई बार इन पार्टियों में किसी विशेष विभाग के लिए होड़ भी लग जाती है। भारत में भी अब मिली-जुली सरकारों का बोलबाला होने लगा है। डेनमार्क में भी अनेक
राजनीतिक दल हैं जो सत्ता का बँटवारा कर सरकार चलाते हैं।
2 बहुसंख्यकवाद क्या है ? इसमें क्या खामियाँ हैं ?
उत्तर-ऐसी राजनीतिक मान्यता जो इस बात पर जोर देती है कि बहुसंख्यक समुदाय
अल्पसंख्यकों की अवहेलना कर सकता है, बहुसंख्यकवाद कहलाता है। परन्तु बहुसंख्यकवाद की यह धारणा अनेक प्रकार से गलत है और इसमें अनेक खामियाँ हैं-
(क) इसमें पहली त्रुटि यह है कि बहुसंख्यक लोग अपनी भाषा को तो राजभाषा घोषित कर देते हैं और दूसरी भाषाओं को दरकिनार कर देते हैं।
(ख) ये विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में अपनी ही जाति के लोगों को प्राथमिकता देते हैं और दूसरों की अवहेलना कर देते हैं जैसा कि श्रीलंका में हो रहा है।
(ग) तीसरे, बहुसंख्यक लोग अपने ही धर्म को संरक्षण और बढ़ावा देते हैं और, दूसरे धर्मों से सौतेला व्यवहार करते हैं।
परन्तु इन सभी भेदभावपूर्ण कार्यों से देश में अशान्ति और संघर्ष का वातावरण कायम हो जाता है। अल्पसंख्यक लोग बेगानेपन का एहसास करने लगते हैं और मरने-मारने को तैयार हो जाते हैं।
वे कैसे और कब तक सह सकते हैं कि उन्हें राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा जाए, नौकरियों में उनसे भेदभाव किया जाए और उनके हितों की अनदेखी की जाए। ऐसा सब कुछ श्रीलंका में हो रहा है।
वहाँ सिंहली और तमिल समुदायों के सम्बन्ध इतने बिगड़ चुके हैं कि आए दिन मार-काट होती रहती है और गृहयुद्ध का सा वातावरण बना रहता है ये सब कुछ बहुसंख्यकवाद नीति का ही परिणाम है।
3 बेल्जियम में अपनाए गए सत्ता-विभाजन के मॉडल की चार मुख्य विशेषताएँ बताएँ।
अथवा, बेल्जियम में सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था के बारे में चर्चा करें।
उत्तर-बेल्जियम के सत्ता-विभाजन के मॉडल की मुख्य विशेषताएँ-
(क) संविधान में स्पष्ट रूप से इस बात की व्यवस्था की गई कि केंद्रीय सरकार में डच और फ्रेंच-भाषी मंत्रियों की संख्या समान होगी। कुछ विशेष तभी बनाए जा सकते हैं जब दोनों भाषाई समुदाय के प्रतिनिधियों का बहुमत उसके पक्ष में हो। कोई एक समुदाय एकतरफा फैसला नहीं कर सकता।
(ख) शासन की शक्तियों का विभाजन केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच स्पष्ट रूप से कर दिया गया है। किसी भी मामले में राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन नहीं है।
(ग) ब्रूसेल्स में अलग सरकार है जहाँ दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व हैं।
(घ) बेल्जियम में केंद्रीय एवं राज्य सरकार के अतिरिक्त एक तीसरे स्तर की सरकार भी काम करती है, जिसे सामुदायिक सरकार के नाम से जाना जाता है। इस सरकार में प्रतिनिधियों का चुनाव अलग-अलग भाषा बोलने वाले समुदायों द्वारा होता है। यह सरकार संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मामलों में निर्णय करती है।
4 श्रीलंका में सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था के बारे में चर्चा करें।
उत्तर-श्रीलंका में सिंहली बहुसंख्यक हैं तथा तमिल अल्पसंख्यक। श्रीलंका के सिंहली समुदाय ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाने का प्रयास किया तथा कई ऐसे कदम उठाए जिनसे अल्पसंख्यक तमिल समुदाय को सत्ता में उचित साझेदारी नहीं मिली और उनके हितों की हानि हुई। इनमें से कुछ निम्नांकित हैं-
(क) तमिल भाषा की अवहेलना करते हुए सिंहली भाषा को देश की एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया।
(ख) विश्वविद्यालयों तथा सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता दी गई।
(ग) बौद्ध धर्म को सरकारी संरक्षण दिया गया।jac
उपर्युक्त असंतुलित सत्ता-विभाजन के परिणामस्वरूप श्रीलंका के तमिल समुदाय में तनाव फैला और दोनों समुदायों के बीच संबंध बिगड़ते चले गए।

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