संख्या पर आधारित प्रश्न (QUESTION BASED ON NUMBER) 1,2,3..

संख्या पर आधारित प्रश्न परिचय संख्या पर आधारित प्रश्न ब्लॉग टॉपिक के माध्यम से हम सभी आज जानेंगे की संख्याएँ कितनी प्रकार की होती है |,और उन्हें किस तरह से परिभाषित किया जाता है। ,उनके फार्मूला क्या है , इन सभी बातो की चर्चा इस ब्लॉग पर हम करने वाले है |जैसे –प्राकृत संख्या, परिमेय संख्या, अपरिमेय संख्या, सम संख्या , विषम संख्या , भाज्य संख्या ,अभाज्य संख्या ,पूर्ण संख्या एवं पूर्णांक संख्या आदि सभी के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करते है तो चलिए शुरू करते है |

संख्या पर आधारित प्रश्न (QUESTION BASED ON NUMBER)

प्राकृत संख्याएँ (Natural Numbers)
जिन संख्याओं से वस्तुओं की गणना की जाती है, उन्हें प्राकृत संख्याएँ कहते हैं |जैसे-1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12,13,

14,15,16,17,18,19,……अनंत तक |

(शून्य को प्राकृतिक संख्या नहीं माना जाता है।)

परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers)-जिन संख्याओं को p /q के रूप में दर्शाया जा सके, जहाँ p और q कोई पूर्णांक संख्या हो (जबकि q बराबर नहीं 0 ), तो वह संख्या परिमेय संख्या कहलाती है, जैसे-5/4, 6/1 , 7/2, 4,5,-1आदि।

अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers) जिनसंख्याओं को p/q रूप में नहीं दर्शाया जा सके, जहाँ p और q कोई पूर्णांक संख्या हो (जबकि qबराबर नहीं 0) तो वह संख्या अपरिमेय संख्या कहलाती है, जैसे-√2, √3, √5, Π आदि।

सम संख्याएँ (Even Numbers)-वे प्राकृत संख्याएँ, जो 2 से विभाजित हो, सम संख्याएँ कहलाती हैं, जैसे-2,4,6, 8, 10, 12, 14…… इत्यादि।

विषम संख्याएँ (Odd Numbers)—वे प्राकृत संख्याएँ, जो 2 से विभाजित नहीं हो, जिसमें केवल उसी संख्या या किसी अन्य विषम संख्या से भी पूरी-पूरी भाग लगे, विषम संख्याएँ कहलाती हैं, जैसे-1,3,5,7,9,11…… इत्यादि।


भाज्य संख्याएँ (Composite Numbers)-1 से बड़ी वे सभी संख्याएँ, जिनमें अपने और 1 के अतिरिक्त कम-से-कम एक और संख्या में भाग लग सके भाज्य संख्याएँ कहलाती हैं, जैसे-4.6,9,15, 18 इत्यादि ।

अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers)-1 से बड़ी वे सभी संख्याएँ, जिनमें स्वयं उसी संख्या और 1 के अलावा और किसी संख्या से भाग नहीं लगे अभाज्य संख्याएँ कहलाती हैं, जैसे-2,3,5,7, 11, 13, 17 इत्यादि।

पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers)-प्राकृत संख्याओं के समुच्चय में “0” को सम्मिलित करने से संख्याओं का जो समुच्चय बनता है उसे पूर्ण संख्याओं का समुच्चय कहते हैं, जैसे-0, 1,2,3……इत्यादि।

पूर्णांक संख्याएँ (Integer Numbers)-जब पूर्ण संख्याओं को धनात्मक और ऋणात्मक चिह्नों के साथ दर्शाया जाता है, तो इनसे बने समुच्चय को पूर्णांक संख्याओं का समुच्चय कहते हैं, जैसे-5,4,-3,-2,-1.0, 2,3,4…… इत्यादि ।

संख्या पर आधारित प्रश्न के सूत्र

संख्याओं पर आधारित प्रश्न के सूत्र

प्राकृतिक संख्याओं का योग = (पहली संख्या + अंतिम संख्या / 2) × n
N = (अंतिम संख्या – पहली संख्या / वर्ग अंतराल) +1
प्रथम n प्राकृत संख्याओं के वर्गों का योग = n(n+1)(2n+1)/6
प्रथम n प्राकृत संख्याओं के घनों का योग = [n(n+1)/2]²
अधिक जानकारी के लिए संख्या की पोस्ट पढ़िए।

भाग पर आधारित प्रश्न के सूत्र

भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल
भाज्य – शेषफल = भाजक × भागफल
भाज्य – शेषफल / भागफल = भाजक
अधिक जानकारी के लिए भाग की पोस्ट पढ़िए।

जानवरों की संख्या पर आधारित प्रश्न के सूत्र

चार पैर वालों की संख्या = (पैर / 2) – सिर
दो पैर वालों की संख्या = सिर – चार पैर वालों की संख्या

इकाई के अंक पर आधारित महत्वपूर्ण बिंदु

इकाई के स्थान पर यदि 0 होगा तो इकाई का अंक 0 होगा।
इकाई के स्थान पर यदि 1 होगा तो इकाई का अंक 1 होगा।
इकाई के स्थान पर यदि 5 होगा तो इकाई का अंक 5 होगा।
इकाई के स्थान पर यदि 6 होगा तो इकाई का अंक 6 होगा।

याद रखें :-

नियम (Trick) 1. यदि आधार वाली संख्या में क्रमशः 0, 1, 5, 6, इकाई अंक होने पर उत्तर भी क्रमशः 0, 1, 5, और 6 ही होगा।

नियम (Trick) 2. यदि आधार वाली संख्याओं में इकाई अंक 2, 3, 4, 7, 8, 9, होता है, तो घात को 4 से विभाजित करें, और इससे प्राप्त शेषफल आधार में लिखी संख्या में इकाई अंक पर लगाये।


नियम (Trick) 3. शेषफल के रूप में 1, 2, और 3, प्राप्त होगा और पूर्णता विभाजित होने पर 0 प्राप्त होगा यदि शेषफल 0 प्राप्त होता हैं तो घात 4 की लम्बाई जाएगी।

अधिक जानकारी के लिए इकाई-दहाई की पोस्ट पढ़िए।

स्थानीय मान और जातीय मान पर आधारित संख्या पद्धति

स्थानीय मान :- स्थानीय मान पर आधारित संख्या पद्धति में 2 या अधिक प्रतीक उपयोग में लाये जाते हैं। जितने प्रतीक होते हैं वही उस संख्या पद्धति का आधार कहलाता है। इन प्रतीकों का मान शून्य से लेकर b-1 तक होता है जहाँ b आधार हैं।

किसी दी गई संख्या में –

इकाई अंक का स्थानीय मान = इकाई अंक × 1
दहाई अंक का स्थानीय मान = दहाई अंक × 10
सैकड़े के अंक का स्थानीय मान = सैकड़े का अंक x 100
हजार के अंक का स्थानीय मान = सैकड़े का अंक x 1000
जातीय मान :- किसी दी गई संख्या में किसी अंक का जातीय मान उसका अपना मान होता है चाहे वह किसी भी स्थान पर क्यों ना हो।

जैसे:- संख्या 567834 में

3 का जातीय मान 3 हैं।
6 का जातीय मान 6 हैं।
8 का जातीय मान 8 हैं।
4 का जातीय मान 4 हैं।

गणित के महत्वपूर्ण सूत्र 

क्षेत्रमिति (mensuration )

  • यदि आप क्लास 10th के किसी भी विषय को पाठ वाइज (Lesson Wise) अध्ययन करना या देखना चाहते है, तो यहाँ पर  क्लिक करें  उसके बाद आप क्लास X के कोई भी विषय का अपने पसंद के अनुसार पाठ select करके अध्ययन कर सकते है ।