संघवाद पाठ 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर | Ncert Solution For Class 10th Civics

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संघवाद पाठ 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर | Ncert Solution For Class 10th Civics के इस ब्लॉग पोस्ट पर आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पोस्ट में आज इस पाठ से संबंधित जितने भी महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न जो, कई बार परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं, उन सभी प्रश्नों के उत्तर को इस पोस्ट पर कवर किया गया है , इसलिए आप सभी विद्यार्थियों से आग्रह है, की इस पोस्ट को पूरा पढ़ें जिसे आपकी परीक्षा की तैयारी करना आसानी हो सके |

संघवाद पाठ 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर Ncert Notes

संघवाद पाठ 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
संघवाद पाठ 2 लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
संघवाद पाठ 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
1 विकेंद्रीकरण किसे कहते हैं? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ती है? इसके लाभ बताएँ।
उत्तर-जब केन्द्र और राज्य सरकारों से शक्तियाँ लेकर स्थानीय सरकारों को दी जाती है
तो इसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण कहा जाता है। विकेन्द्रीकरण की क्यों आवश्यकता होती है इसके अनेक कारण हैं जिनमें से प्रमुख निम्नांकित हैं-
(क) भारत में बहुत से राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि आकार में इतने बड़े हैं कि राज्य की सरकार अपनी विभेद इकाइयों की ओर पूरा ध्यान नहीं दे सकती। इसलिए उनका प्रबन्ध पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाता। विकेन्द्रीकरण से यह मसला हल हो जाता है।
(ख) कुछ राज्यों में अनेक भाषाई लोग रहते हैं, अनेक जातियों के लोग रहते हैं अनेक धर्मों के लोग रहते हैं जिन सबकी आकांक्षाओं को पूरा करना राज्य सरकारों के बस की बात नहीं। शक्ति के विकेन्द्रीकरण से अनेक विभिन्नताओं को हल करना आसान हो जाता है।
(ग) विकेन्द्रीकरण के परिणामस्वरूप बनी स्थानीय संस्थाएँ विकास कार्यों में बड़ी सहायक सिद्ध हो सकती हैं क्योंकि किसी स्थान विशेष के स्थानीय लोग ही अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं तथा समस्याओं को भली प्रकार समझ सकते हैं और उन समस्याओं का समाधान भी वही खोज सकते हैं।
अतः स्थानीय लोगों का जब सहयोग मिल जाता है तो विभिन्न स्थानीय कार्य आसानी से सम्पन्न हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का यह सहयोग स्थानीय संस्थाओं के द्वारा ही प्राप्त हो सकता है।
विकेन्द्रीकरण के लाभ-
(क) स्थानीय समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान,
(ख) लोकतांत्रिक आदर्शों की पूर्ति,
(ग) संवैधानिक आवश्यकता की पूर्ति,
(घ) स्थानीय स्तर पर शासन में जनता की भागीदारी।
2 संघीय व्यवस्था की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर-संघीय व्यवस्था की महत्त्वपूर्ण विशेषता-
(क) यहाँ सरकार दो या अधिक स्तरों वाली होती है।
(ख) अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती है पर कानून बनाने, कर वसूलने और प्रशासन का उनका अपना-अपना अधिकार क्षेत्र होता है।
(ग) विभिन्न स्तरों की सरकारों के अधिकार क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित होते हैं, इसलिए संविधान सरकार के हर स्तर के अस्तित्व और प्राधिकार की गारंटी और सुरक्षा देता है।
(घ) संविधान के मौलिक प्रावधानों को किसी एक स्तर की सरकार अकेले नहीं बदल सकती। ऐसे बदलाव दोनों स्तर की सरकारों की सहमति से ही हो सकती है।
(ङ) अदालतों को संविधान और विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकारों की व्याख्या करने का अधिकार है। विभिन्न स्तर की सरकारों के बीच अधिकारों के विवाद की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय निर्णायक की भूमिका निभाता है।
(च) वित्तीय स्वायत्तता निश्चित करने के लिए विभन्न स्तर की सरकारों के लिए राजस्व के अलग-अलग सोत निर्धारित हैं।
(छ) इस प्रकार संघीय शासन व्यवस्था के दोहरे उद्देश्य हैं- देश की एकता की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना तथा इसके साथ ही क्षेत्रीय विविधताओं का पूरा सम्मान करना। इस कारण संघीय व्यवस्था के गठन और कामकाज के लिए दो चीजें सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।
विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच सत्ता के बँटवारे के नियमों पर सहमति होनी चाहिए और इनका एक-दूसरे पर भरोसा होना चाहिए कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों को मानेंगे। आदर्श
संघीय व्यवस्था में ये दोनो पक्ष होते हैं- आपसी भरोसा और साथ रहने पर सहमति।

संघवाद पाठ 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर Ncert  Solution Notes

3 भारत की संघीय शासन व्यवस्था की विशेषताओं की चर्चा करें।
अथवा, भारतीय संघवाद की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर-भारतीय संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ-
(क) भारतीय संघ के किसी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
(ख) भारतीय संघ में राज्य प्रतिनिधित्व में समानता का अभाव है।
(ग) भारतीय संघ में एकल नागरिकता की व्यवस्था है न कि दोहरी नागरिकता की।
(घ) भारतीय संघ, केन्द्र और राज्यों के बीच किसी संविदा अथवा करार का परिणाम नहीं है, बल्कि इसका निर्माण विशेष ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में हुआ है।
(ङ) संसद द्वारा राज्य की सीमाओं में परिवर्तन के लिए राज्य की सम्मति आवश्यक नहीं है।
(च) शक्तियों का विभाजन केन्द्रीय सरकार के पक्ष में है।
(छ) भारतीय संघ में न्यायालयों की एक ही प्रणाली है। देश का एक ही सर्वोच्च न्यायालय है।
(ज) भारतीय संघ में लोक सेवाओं का विभाजन नहीं किया गया है, अर्थात् लोकसेवक अपने कार्यों में राज्य तथा केन्द्रीय दोनों स्तर के कानूनों का पालन करते हैं।
4 1990 के बाद भारत के केन्द्र-राज्य संबंध पर प्रकाश डालें।
उत्तर-(क) देश के अनेक राज्यों में क्षेत्रीय दलों का उदय 1990 के बाद हुआ। यही दौर केन्द्र में गठबंधन सरकार की शुरुआत थी।
(ख) किसी एक दल को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. इसलिए प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों को क्षेत्रीय दलों समेत अनेक पार्टियों का गठबंधन बनाकर सरकार बनानी पड़ी।
(ग) इससे सत्ता में साझेदारी और राज्य सरकारों की स्वायत्ता का आदर करने की नई संस्कृति पनपी।
(घ) इस प्रवृत्ति को सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले से भी बल मिला। फलस्वरूप राज्य सरकार को मनमाने ढंग से भंग करना केन्द्र सरकार के लिए मुश्किल हो गया।jac

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