पाठ -9 संगतकार, हिंदी, कविता NCERT Solution for class 10th

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मंगलेश डबराल कवि परिचय

संगतकार हिंदी कविता पाठ -9 में समकालीन हिंदी कविता के चर्चित हस्ताक्षर मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में उत्तरांचल के टिहरी गढ़वाल के काफलपानी गांव में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई।

  • दिल्ली आने के बाद उन्होंने
  • हिंदी पेट्रियट,
  • प्रतिपक्ष और
  • आसपास में काम किया।
इसके बाद वे भोपाल में भारत भवन से प्रकाशित होने वाले पूर्वग्रह में सहायक संपादक हुए।
  • अमृत प्रभात,
  • जनसत्ता और
  • सहारा समय से जुड़े रहे।

उसके पश्चात् संप्रति वे नेशनल बुक ट्रस्ट से संबद्ध है ।

मंगलेश डबराल के चार कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं-
  • पहाड़ पर लालटेन,
  • घर का रास्ता,
  • हम जो देखते हैं और
  • आवाज़ भी एक जगह है।

मंगलेश डबराल के कविताएँ

भूलने का युग, आन्तरिक जीवन , आदिवासी , अनुपस्थिति, अशाश्वत, अभिनय,वर्णमाला, एक लोकगीत सुनकर,
इन ढलानों पर वसंत आएगा , आँखे, अन्तराल , आसान शिकार, इन सर्दियोँ में , गुजरात के मृतक का बयान , गुडहल , ग़ुलामी, टॉर्च , गुमशुदा , जापान : दो तस्वीरें, नए युग में शत्रु , त्वचा, निकोटिन , पागल औरत, पहाड़ से मैदान, तानाशाह, पंचम , पिता का चश्मा ,मदर ,डे यरी , नया बैंक , बच्चों के लिए एक चिट्ठी , बची हुई जगहें, राग मारवाराग शुद्ध कल्याण, पुरानी तस्वीरें , यथार्थ इन दिनों, माँ का नमस्कार, राग दुर्गा , यहाँ थी वह नदी , वसन्त,

पुरस्कार

  • साहित्य अकादेमी पुरस्कार,
  • पहल सम्मान से सम्मानित मंगलेश जी की ख्याति अनुवादक के रूप में भी है।

मंगलेश जी की कविताओं के भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त

  • अंग्रेजी,
  • रूसी,
  • जर्मन,
  • स्पानी,
  • पोल्स्की और
  • बगारी भाषाओं में भी अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं।

कविता के अतिरिक्त वे साहित्य, सिनेमा, संचार माध्यम और संस्कृति के सवालों पर नियमित लेखन भी करते हैं। मंगलेश की कविताओं में सामंती बोध एव पूँजीवादी छल-छद्म दोनों का प्रतिकार है। वे यह प्रतिकार किसी शोर-शराबे के साथ नहीं बल्कि प्रतिपक्ष में एक सुंदर सपना रचकर करते हैं। उनका सौंदर्यबोध सूक्ष्म है और भाषा पारदर्शी।

संगतकार हिंदी कविता पाठ -9

संगतकार हिंदी कविता पाठ -9 के माध्यम से कवि मुख्य गायक का साथ देने वाले संगतकार की
भूमिका पर विचार किया है। केवल संगीत में ही नहीं समाज और इतिहास में भी बहुत सी
ऐसी घटनाओं और प्रकरणों के उदाहरण हैं जहां हम उनकी सफलता के पीछे कुछ गुमनाम
व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका पाते हैं। ऐसे ही संगतकारों पर रोशनी डालती है यह कविता।


( 1 .) मुख्य गायक के चशङ्कान जैसे भारी स्वर का साथ देती
वह आवाज सुंदर कमजोर काँपती हुई थी
वह मुख्य गायक का छोटा भाई है
या उसका शिष्य
या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार
मुख्य गायक की गरज में
वह अपनी गूंज मिलाता आया है प्राचीन काल से
गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है
जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन


प्रसंग-

संगतकार के मानवीय पक्ष को उजागर करता हुआ कवि कहता है कि

व्याख्या-

संगतकार हिंदी कविता पाठ -9 में संगतकार की आवाज पीछे से मुख्य गायक के गंभीर स्वर का साथ देती हुई-सी थी। संगतकार की वह आवाज सुंदर और कोमल तथा सुरीली थी। संगतकार का परिचय देते हुए कवि बताता है, कि वह मुख्य गायक का छोटा भाई अर्थात् उसका गायकी में साथ देने वाला है। उसे मुख्य गायक के ‘शिष्य’ या ‘दूर के रिश्तेदार’ की संज्ञा देते हुए कवि मुख्य गायक से संगतकार का अभिन्न संबंध
स्थापित करता है। वह उसकी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहता है, कि संगतकार उसके गायन में चिरकाल से साथ देता आया है।

संगतकार हिंदी कविता पाठ -9 के माध्यम से कवि कहता है, कि मुख्य गायक जब अनहद में खो जाता है, तब संगतकार ही स्थायी सुर अर्थात् कार्य की प्रक्रिया और प्रणाली के स्थायित्व अथवा उसकी अनवरतता को संभाले रखता है। कविता के हिसाब से संगतकार का यह साथ देना’ पीछे छूटे हुए सामान को समेटना’ या मुख्य गायक को उसके ‘बचपन’ की याद दिलाना है। आशय यह है कि प्रसिद्धि और मुख्यधारा प्राप्त कर चुके व्यक्ति को उसकी जमीनी हकीकतों से रूबरू कराने में संगतकार या निचले स्तर पर कार्य करने वालों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।


( 2 . ) जब वह नौसिखिया था
तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढस बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग
और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

प्रसंग-

संगतकार की भूमिका मुख्य धारा से हटकर होती है किंतु कार्य की सफलता में उसका योगदान भी नायक से कुछ कमतर नहीं होता । इसे बताते हुए कवि कहता है कि-

व्याख्या-

संगतकार मुख्य गायक को याद दिलाता है, कि जब वह गायकी में नया-नया था तब वह भी उसी की तरह था। गाते समय जब उसका गला बैठने लगता है, अर्थात् कार्य करते हुए जब मुख्य धारा का व्यक्ति थकान महसूस करता है, तब संगतकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। वह मुख्य गायक को ढांढस बंधाता हुआ अपनी स्वर लहरी को अनवरत बनाए रखता है। शायद यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है, और उसके गायन की पुनरावृत्ति की जा सकती है।

संगतकार हिंदी कविता पाठ -9 में कवि कहता है कि ऐसा करने में उसके स्वर के उठने वाली हिचकियों को, स्वर को ऊँचा उठाने की कोशिश को संगतकार की विफलता नहीं प्रत्युत्त मनुष्यता का नाम दिय जाना चाहिए; समझा जाना चाहिए। भाव यह है कि संगतकार या मुख्य धारा को सहयोगी व्यक्ति मुख्य धारा के व्यक्ति को उसेक कार्यों में जो अनाम सहयोग प्रदान करता है उसका भी कम महत्व नहीं है, वरन कार्य को गति प्रदान करने वाली वृहत्ततर मानवेच्छा और सार्थक मानवीय गुणों से युक्त ‘सर्जना’ का दूसरा रूप है।

संगतकार हिंदी कविता पाठ -9 प्रश्न-अभ्यास

1.संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है?

उत्तर- संगतकार के माध्यम से कवि मुख्य धारा से अलग, लेकिन कार्यों में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले अज्ञात नाम व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है।

2.संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं?

उत्तर- संगतकार से तात्पर्य कार्यकर्ताओं से है जो सामाजिक, राजनैतिक कार्यों तथा उन सभी कार्यों औरजीवन के उस प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई पड़ते हैं जहाँ समूह की भूमिका प्रमुख अथवा आवश्यक होती है।

3.संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?
उत्तर-संगतकार सुर, लय और ताल की युगलबंदी करके दुहराकर या बाद्यों को बजाकर गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं।

4. भाव स्पष्ट कीजिए-

और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

उत्तर- कविता के दूसरे अनुच्छेद की व्याख्या की सहायता से स्वयं करें।

5. किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। कोई एक उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर- विद्यार्थी स्वयं करें।

6. कभी-कभी तारसप्तक की ऊंचाई पर पहुंचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नजर आता है उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है। इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- संगतकार गायक की धीमी पड़ती आवाज को पीछे से अपनी आवाज ऊंची कर छुपा ले जाता है।

7. सफलता के परम शिखर पर पहुँचने – रान यदि व्यक्ति लड़खड़ाते हैं तब उसे सहयोगी किस तरह से लते हैं

उत्तर- व्यक्ति की थकान पर उसके सहयोगी उसके कार्यों में हाथ बंटाकर उसकी जिम्मेदारियों का निर्वहन स्वयं करके उसे संभालते हैं।

रचना और अभिव्यक्ति

8. कल्पना कीजिए कि आपको किसी संगीत या नृत्य समारोह का कार्यक्रम प्रस्तुत करना है लेकिन आपके सहयोगी कलाकार किसी कारणवश नहीं पहुँच पाएँ-

(क) ऐसे में अपनी स्थिति का वर्णन कीजिए।
(ख) ऐसी परिस्थिति का आप कैसे सामना करेंगे?

9. आपके विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों
की भूमिका पर एक अनुच्छेद लिखिए।

10. किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग प्रतिभावान होते हुए भी मुख्य या शीर्ष स्थान पर क्यों नहीं पहुँच पाते होंगे?

पाठेतर सक्रियता

आप फ़िल्में तो देखते ही होंगे। अपनी पसंद की किसी एक फ़िल्म के आधार पर लिखिए कि उस फ़िल्म की सफलता में अभिनय करने वाले कलाकारों के अतिरिक्त और किन-किन लोगों का योगदान रहा।
आपके विद्यालय में किसी प्रसिद्ध गायिका की गीत प्रस्तुति का आयोजन है-

(क) इस संबंध पर सूचना पट्ट के लिए एक नोटिस तैयार कीजिए।
(ख) गायिका व उसके संगतकारों का परिचय देने के लिए आलेख (स्क्रिप्ट) तैयार कीजिए।

शब्द-संपदा

संगतकार- मुख्य गायक के साथ गायन करने वाला या कोई वाद्य बजाने
वाला कलाकार, सहयोगी
गरज- ऊँची गंभीर आवाज
अंतरा- स्थायी या टेक को छोड़कर गीत का चरण
जटिल- कठिन
तान- संगीत में स्वर का विस्तार
नौसिखिया- जिसने अभी सीखना आरंभ किया हो
बुझता हुआ स्वर- राख जैसा कुछ गिरता हुआ
ढाँढस बँधाना- तसल्ली देना, सांत्वना देना

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