संविधान निर्माण पाठ 3 दीर्घ उतरीय प्रश्न। Ncert Solution For Class 9th Civics

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संविधान निर्माण पाठ 3 दीर्घ उतरीय प्रश्न Ncert Solution For Class 9th Civics के इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी को पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर जो पिछले कई परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं, इस ब्लॉग पोस्ट पर उन सभी प्रश्नों को कबर किया गया है, इसलिए इस पोस्ट को कृपया करके पूरा अध्ययन करें तो चलिए शुरू करते हैं-

संविधान निर्माण पाठ 3 दीर्घ उतरीय प्रश्न के उत्तर, Ncert Solution For Class 9th

संविधान निर्माण पाठ 3 दीर्घ उतरीय प्रश्न के उत्तर
संविधान निर्माण पाठ 3 लघु उतरीय प्रश्न के उत्तर
संविधान निर्माण पाठ 3 अति लघु उतरीय प्रश्न के उत्तर

1 भारतीय संविधान की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर-भारतीय संविधान की निम्नांकित विशेषताएँ हैं-
(क) लिखित एवं निर्मित संविधान-भारतीय संविधान लिखित एवं निर्मित संविधान है। लिखित संविधान में शासन संबंधी बातें स्पष्ट रूप से लिखित रहते हैं, किंतु अलिखित संविधान की मूलभूत बातें रीति-रिवाज और परंपराओं पर आधारित होती हैं। भारतीय संविधान एक निर्मित संविधान है।

(ख) विशालता- यह विश्व का सबसे बड़ा संविधान है। इसमें 395 धाराएँ, 22 भाग तथा 9 अनुसूचियाँ हैं। अमेरिका के संविधान में 21 अनुच्छेद हैं और रूस के संविधान में 173 अनुच्छेद । विभिन्न संविधानिक संशोधनों के चलते इसका आकार बढ़ता जा रहा है।

(ग) संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य- भारतीय संविधान एक संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना करता है। भारत पर अब किसी बाहरी शक्ति का नियंत्रण नहीं रहा। यहाँ शासन की शक्ति जनता के हाथ में है, जिसका प्रयोग वह अपने प्रतिनिधियों द्वारा करती है।

(घ) संघात्मक शासन तथा शक्तिशाली केंद्र- भारतीय संविधान ने संघीय शासन व्यवस्था की स्थापना की है तथा केंद्र को शक्तिशाली बनाया है। परंतु, संविधान संघात्मक होते हुए भी इसकी आत्मा एकात्मक है। कार्यपालिका के क्षेत्र में अधिक महत्त्वपूर्ण अधिकार केंद्र को दिए गए हैं। संकटपूर्ण अवस्था में संपूर्ण देश का शासन केंद्रीय सरकार के हाथों में चला जाता है ।

(ङ) संसदीय शासन प्रणाली- भारत में संसदीय शासन प्रणाली की सरकार की स्थापना की गई है। यहाँ कार्यपालिका तथा व्यवस्थापिका में घना संबंध है। मंत्रिपरिषद् या कार्यपालिका लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। राष्ट्रपति नाममात्र का तथा संवैधानिक प्रधान है। सारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है।

(च) मौलिक अधिकार- अमेरिका, जापान, कनाडा, फ्राँस इत्यादि के संविधानों की तरह भारतीय संविधान में भी नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लेख है।

(छ) नीति-निदेशक तत्त्व- आयरलैंड और बर्मा के संविधानों की तरह भारतीय संविधान में भी नीति-निदेशक तत्त्वों का समावेश है।

(ज) न्यायपालिका की सर्वोच्चता- भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें इंगलैंड की संसदीय संप्रभुता तथा अमेरिका की न्यायिक सर्वोच्चता की बीच का रास्ता अपनाया है। भारत में एक ओर संसद की सर्वोच्चता स्वीकार की गई है और दूसरी तरफ न्यायालय को संविधान की व्याख्या करने तथा विधियों की संवैधानिकता की जाँच का अधिकार दिया गया है।

2 संविधान का क्या अर्थ है ? लोकतांत्रिक सरकार में इसका अधिक महत्त्व क्यों हैं ?
उत्तर– संविधान का अर्थ- संविधान उन नियमों तथा सिद्धांतों के समूह को कहते हैं अनुसार किसी देश का शासन चलाया जाता है।

इसमें सर्वोच्च वे कानून होते हैं जिनकी नागरिक व सरकार दोनों को मानना पड़ता सरकार की शक्तियों तथा नागरिकों के अधिकारों व कत्तव्यों का वर्णन होता है। किसी भी देश का शासन चलाने के लिए कुछ मौलिक कानूनों व नियमों की आवश्यकता होती है। इन मौलिक कानूनों या नियमों को देश के संविधान में लिख दिया जाता है। एक लोकतांत्रिक देश के लिए संविधान का निम्नांकित महत्त्व है-

(क) संविधान में ऐसे कानून होते हैं जिनके अनुसार किसी लोकतांत्रिक देश की सरकार का निर्माण होता है तथा उसका कार्य चलता है।

(ख) यह सरकार तथा उसके अंगों की शक्तियों का निर्धारण करता है और विधानपालिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका की शक्तियों का वर्णन होता है।

(ग) यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करता है।

(घ) यह सरकार द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग को रोकता है और नागरिकों के कर्तव्यों पर बल देता है।

(ङ) यह लोकतांत्रिक सरकार के विभिन्न अंगों के कार्यों में उत्पन्न संभ्राति तथा अंतर्द्वद्व को कम करता है।

(च) यह सरकार तथा नागरिकों के बीच संबंधों की व्याख्या करता ।

संविधान निर्माण पाठ 3 (कक्षा नवीं), सामाजिक विज्ञान Class 9  Ncert Notes

3 हमारे संविधान में दिए गए “राज्य-नीति के निर्देश सिद्धांतों के विवेचना करें।
उत्तर-भारतीय संविधान में जिन नीति-निर्देशक सिद्धांतों का वर्णन किया गया है वे निम्नांकित हैं-
(क) सामाजिक तथा शिक्षा विषयक सिद्धांत-
(i) राज्य देश के सभी नागरिकों के लिए समान आचार संहिता बनाने का प्रयत्न किया।
(ii) राज्य संविधान लागू होने के 10 वर्ष की अवधि में 14 वर्ष की आयु के सभी बालकों को अनिवार्य तथा निःशुल्क शिक्षा दिए जाने की व्यवस्था करेगा।

(ख) आर्थिक सिद्धांत-
(i) समान कार्य के लिए सभी स्त्री-पुरुषों को समान पारिश्रमिक मिले इसकी भी व्यवस्था करेगा।
(ii) भारत के प्रत्येक नागरिक, स्त्री व पुरुष को समान रूप से आजीविका कमाने के पर्याप्त अवसर प्राप्त हों, राज्य इसकी व्यवस्था करेगा।

(ग) शासन विषयक सिद्धांत-
(i) राज्य न्यायापालिका को कार्यपालिका से अलग करने की कोशिश करेगा ताकि न्यायाधीश कार्यपालिका के दबाव में आये बिना न्याय कर सके।
(ii) राज्य ग्रामों में ग्राम पंचायतों का संगठन करेगा और उन्हें वे सभी अधिकार देगा जिससे वे स्वतंत्रापूर्वक कुशलता से अपना कार्य कर सकें।

(घ) अंतर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा से सम्बन्धित सिद्धांत-
(i) राज्य विश्व शान्ति का समर्थन करेगा और उसे प्रोत्साहन देगा।
(ii) राज्य विभिन्न राज्यों के बीच न्याय और सम्मानपूर्ण सम्बन्धों की स्थापना के लिए प्रयत्न करेगा।

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