भारत में सांप्रदायिक l अर्थ l कारण,

सांप्रदायिकताः एक अभिशाप

परिचय l

आज के वर्तमान समय में विभिन्न सभी राजनीतिक दलों के द्वारा अपने राजनीतिक फायदे या लाभों के लिये सांप्रदायिकता का भरपूर सहारा लिया जा रहा है । राजनीति का सांप्रदायिकरण हमारे भारत देश में सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ हमारे देश में सांप्रदायिक हिंसा भी बहुत तेजी बढ़ाता जा रहा है।

भारत में सांप्रदायिक उत्पन करने के मुख्य कारण

देश के विकास का असमान रूप , जातीय विभाजन, गरीबी और अमीरी, भेद भाव, बेरोज़गारी आदि कारक सामान्य लोगों में असुरक्षा का भाव उत्पन्न कर रहा हैं।असुरक्षा कहे,या इस तरह की लापरवाह भावना के कारण लोगों का सरकार पर काफी लोगों का विश्वास कम होते जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सभी लोग अपनी ज़रूरतों/हितों को पूरा करने के लिये लोगों द्वारा विभिन्न तरह के राजनीतिक दलों, सांप्रदायिक गठन के आधार पर अपने को ढाला हुआ है, और उनका सहारा लिया ले रहे है ।पुलिस एवं अन्य प्रशासनिक दलों के बीच समन्वय की काफी कमी है ।

जिसके चलते कभी-कभी पुलिस कर्मियों को भी उचित प्रशिक्षण प्राप्त करने में परेशानी होती है , पुलिस इत्यादि भी सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने वाले कारकों में शामिल होते नजर आते हैं।दो समुदायों के बीच विश्वास और आपसी समझ की कमी या एक समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय के सदस्यों का उत्पीड़न,आदि के कारण उनमें भय, शंका और खतरे का भाव उत्पन्न हो रहा है।इस तरह के भय के कारण सभी लोगों के बीच में विवाद, एक-दूसरे के प्रति नफरत, क्रोध और भय का माहौल हमेसा पैदा होते रहता है।

हमारे मिडिया द्वारा भी अक्सर कोई विशेष समुदाय पर आरोप लगाना तथा काफी अधिक अफवाहों को समाचार पत्र में, न्यूज चैनल में प्रसारित करना, टीवी में दिखाना, इंटरनेट पर दिखाना ।जिसका परिणाम कभी-कभी प्रतिद्वंद्वी धार्मिक समूहों के बीच तनाव और दंगों के रूप धारण कर लेता है।

वहीं हमारे सोशल मीडिया ने भी देश के किसी भी हिस्से में सांप्रदायिक तनाव या दंगों से संबंधित संदेश को फैलाने का एक अच्छा माध्यम बन चूका है, आगे हम इसके बारे में और पढ़ेंगे

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भारत में सांप्रदायिक अर्थ l

किसी एक मत या पूजा-पद्धति को मानने वाले मानव-समुदाय को सप्रदाय’ कहते हैं। जब कोई संप्रदाय और उसके अनुयायी स्वयं को बहुत श्रेष्ठ और अन्य संप्रदायों को घृणित मान लेते हैं। दूसरे शब्दों में, संप्रदाय का असहनशील हो उठना ही साप्रदायिकता है। 

भारत में सांप्रदायिक विश्वव्याप्त समस्या l

सांप्रदायिकता की समस्या पूरे विश्व में व्याप्त है। इंग्लैंड में रोमन कैथोलिकों और प्रोटेस्टेंटों के मध्य संघर्ष छिड़ा रहता है। इस्लामी देशों में शिया-सुन्नी के झगड़े हैं। भारत की स्थिति और अधिक विचित्र है। 

भारत में सांप्रदायिक तनाव l

 भारत में अनेक संप्रदाय हैं। इस कारण यहाँ सांप्रदायिकता की समस्या अधिक जटिल है। भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा है-हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य। इन दोनों का इतिहास ही आक्रांत और आक्रांता का इतिहास है। मुसलमान आक्रमणकारी के रूप में हिंदुस्तान आए।

उन्होंने यहाँ के मंदिरों को तोड़ा, धन-संपत्ति को लूटा, बहू-बेटियों को अपमानित किया। दुर्भाग्य से आज भी उनके आक्रमणों के चिह्न भारत भर में विद्यमान हैं। परिणामस्वरूप ये दोनों जातियाँ कभी सहज नहीं हो पातीं। जब भी बहाना पाकर आग भड़कती है तो देश-भर में खून की नदियाँ बह जाती हैं। हिंदू-मुस्लिम-संघर्ष के 

भारत में सांप्रदायिक कारण l

वर्तमान काल में भी इन दोनों संप्रदायों को आपस में लड़ाने के कारण बने हुए हैं।मुख्य कारण है- कुटिल राजनीति। राजनीति इन दोनों संप्रदायों को अपना हथियार बनाकर खेलती है। जब से भारत आजाद हुआ है, यहाँ सबको समान अधिकार नहीं दिए गए हैं। मुसलमानों और हिंदुओं पर अलग-अलग कानून लागू होते हैं। संविधान की धारा 370 के कारण काश्मीर को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ये विशेष अधिकार शेष समाज की आँखों में चुभते हैं।

इसलिए कुछ लोग सुविधा प्राप्त संप्रदायों के विरूद्ध उग्र रूप धारण कर लेते हैं। दुर्भाग्य से भारत में सत्ताधारियों ने अल्पसंख्यकों को सामान्य नागरिक न मानकर अपना ‘वोट-बैंक’ ही माना है। सांप्रदायिकता की समस्या उत्पन्न होने का दूसरा कारण है-विदेशी षड्यंत्र । पाकिस्तान निरंतर भारत में अलगाववाद की भावना को प्रोत्साहन दे रहा है। तीसरे, धर्मों का उन्माद भी दोषी है। 

अन्य सांप्रदायिक संघर्ष l

भारत में हिंदू-ईसाई संघर्ष भी जटिल रूप धारण करता रहा है। जहाँ-जहाँ ईसाई संख्या में अधिक हैं, वहाँ-वहाँ अलगाववाद और भारत-विरोध के स्वर उठते रहे हैं। इसलिए आज ईसाइयों पर भी प्रतिक्रियात्मक हमले होने लगे हैं। 

भारत में सांप्रदायिक हानियाँ l

सांप्रदायिकता के कारण देश को भीषण अशांति, लूट-पाट और जन-हानि का सामना करना पड़ता है। कुछ वर्ष पहले पंजाब का हरा-भरा प्रदेश हिंसा, बमकांड और गोलियों की आवाज से आतंकित रहा है। वहाँ का जन-जन भयकंपित रहा है। जम्मू-कश्मीर तो मानो भारत के मस्तक का फोड़ा साबित हुआ है।

सांप्रदायिक आतंक के कारण वहाँ से तीन लाख हिंदू घर-बार छोड़कर शेष भारत में शरणार्थी बने हुए हैं। अभी-अभी रामजन्म भूमि तथा बाबरी मस्जिद को लेकर भारत में जो नर-संहार हुआ, उससे हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य के घाव फिर से हरे हो गए हैं। सारा देश मानो जल रहा है।

भारत में सांप्रदायिक समाधान l

सांप्रदायिकता का समाधान बहुत जटिल काम है। कारण यह है समस्या को हवा देने वाला स्वयं देश का राजनीतिक नेता है। वह यिकर लड़ाई भड़काकर सत्ता में जमा रहना चाहता है। उसे वोट-बैंक। उसके लिए सांप्रदायिक विभाजन बहुत आसान रास्ता है। अतः जब के आम नागरिक उसकी इस चाल को समझ जाएँगे और उसके विरूद्ध पटे हो जाएँगे, तभी यह आग बुझेगी।

वर्तमान परिस्थितियों को देखकर ऐसाना है कि यह समस्या अभी और जटिल रूप धारण करेगी। लकड़ियाँ लने को तैयार हैं, सत्ताधारी घी बने हुए हैं, विरोधी दल हवा दे रहे हैं। अतः का जलना निश्चित है। बस समाधान के नाम हम ईश्वर से प्रार्थना ही कर सकते हैं कि वह इस अग्नि को शांत करे।

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