राष्ट्रीय आंदोलन पाठ 10 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर | Ncert Solution For Class 8th history

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राष्ट्रीय आंदोलन पाठ 10 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर | Ncert Solution For Class 8th history के इस post में आप सभी विद्यार्थियों का wellcome है, इस post के माध्यम से पाठ से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर को cover किया गया है, जो students के लिए काफी important है, इस तरह के प्रश्न पिछले कई Exams में भी पूछे जा चुके हैं, उन सभी प्रश्नों को इस post पर कवर किया गया है, इसलिए इस post को जरूर पूरा पढ़ें तो चलिए शुरू करते हैं-

राष्ट्रीय आंदोलन पाठ 10 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर | Ncert Solution For Class 8th history

राष्ट्रीय आंदोलन पाठ 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
राष्ट्रीय आंदोलन पाठ 10 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
राष्ट्रीय आंदोलन पाठ 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

1 कांग्रेस की स्थापना के क्या उद्देश्य थे?
उत्तर-कांग्रेस के पहले अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे। ए० ओ० ह्यूम सरकार के अवकाश प्राप्त सचिव थे। इनके प्रयास से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। ह्यूम भारत में बढ़ते आंदोलन एवं अशांति से चिंतित थे। काँग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय स्तर पर माहौल बनाने के लिए तथा लोगों को एकजुट करने के लिए किया गया था।

2 अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन क्यों किया था ?
उत्तर-बंगाल उस समय राष्ट्रीय चेतना का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। बंगाल के लोगों में राजनीतिक जागृति काफी प्रबल थी। इस कारण लॉर्ड कर्जन ने 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल का विभाजन कर दिया। इस दिन पूरे बंगाल में शोक दिवस मनाया गया। विभाजन के बाद बंगाल पूर्वी बंगाल और पश्चिमी बंगाल में बँट गया। बंगाल के विभाजन से पूरे देश में विरोध की लहर फैल गयी।

3 रॉलेट कानून क्या था ?
उत्तर-क्रांतिकारियों के प्रभाव और भारत में बढ़ती राष्ट्रीयता की भावना को खत्म करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की। जिसकी रिपोर्ट
को 08 मार्च 1919 ई० को लागू कर दिया गया। इस अधिनियम के तहत मैजिस्ट्रेट को यह अधिकार दिया गया कि वह किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज सकता है।
आरोपी व्यक्ति को अपील, वकील और दलील करने की मनाही थी। इसे काला कानून कहा गया।

4 महात्मा गाँधी ने असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया ?
उत्तर-5 फरवरी, 1922 ई० को उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले की चौरी-चौरा नामक स्थान पर उग्र भीड़ ने एक पुलिस थाने में आग लगा दी। जिससे 22 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई।
इस घटना से नाराज होकर गाँधीजी ने 11 फरवरी, 1922 को असहयोग आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की।

5 भगत सिंह ने असेम्बली में बम क्यों फेंका था ?
उत्तर-भगत सिंह और उनके साथियों जैसे क्रांतिकारी राष्ट्रवादी, औपनिवेशिक शासन तथा अमीर शोषक वर्गों से लड़ने के लिए मजदूरों और किसानों की क्रांति चाहते थे। इस काम को पूरा करने के लिए उन्होंने 1928 में दिल्ली स्थित फिरोजशाह कोटला में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एच० एस० आर० ए०) की स्थापना की थी। एच० एस० आर० ए०
के सदस्यों ने ही लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज करने वाले सांडर्स नामक पुलिस अफसर की हत्या की थी। ब्रिटिश सरकार को उसके द्वारा किये जा रहे शोषण से अवगत कराने
के लिए अपने साथी राष्ट्रवादी बी० के० दत्त के साथ भगत सिंह ने 8 अप्रैल 1929 को केन्द्रीय विधान परिषद् में बम फेंका था।

6 19476 में भारत विभाजन के लिए दो कारकों का उल्लेख करें।
उत्तर-(क) अंग्रेजों की ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति ने देश में विघटनकारी शक्तियों को बढ़ावा दिया। मुस्लिम लीग तथा हिंदू महासभा जैसे सांप्रदायिक दलों ने विभाजन की जमीन तैयार कर दी थी।

(ख) देश में कई बार सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ। 1946 और 1947 ई० में स्थान-स्थान पर निर्दोष लोगों की हत्याएँ होने लगी तथा करोड़ों रुपये की संपत्ति जल कर राख हो गई। अतः देश का विभाजन होना आवश्यक समझा गया ।

7 दांडी मार्च से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में चलाया जिसका आरम्भ 12 मार्च, 1930 ई० को दांडी यात्रा द्वारा किया गया। भारत के पश्चिमी तट पर स्थित एक छोटे-से गाँव दांडी में
गाँधीजी पैदल चलकर गए। 5 अप्रैल, 1930 ई० को दांडी पहुँचकर उन्होंने नमक बनाकर कानून भंग किया। इस प्रकार दांडी यात्रा सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रतीक बन गई।

8 भारत छोड़ो आंदोलन के महत्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर-1942 ई० में गाँधीजी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन चलाया गया। गाँधीजी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया। आंदोलन की पूर्व संध्या पर ही प्रमुख नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। इससे जनता भड़क उठी और उसने रेलवे स्टेशनों, डाकघरों, थानों तथा सरकारी भवनों को जलाना शुरू कर दिया। टेलीफोन के तार काट डाले और रेल की पटरियाँ उखाड़ दी गई। अंग्रेजों ने इस जन आंदोलन को दबाने के लिए लाठी, गोली आदि का सहारा लिया। हजारों प्रदर्शनकारी जेलों में लूंस दिए गए। जनता नेतृत्वहीन और दिशा भ्रमित थी। अतः सब अपने-अपने ढंग से सरकार का प्रतिरोध कर रहे थे।

9 नवस्वाधीन भारत के सामने कौन-सी तीन समस्याएँ थीं ?
उत्तर- नवस्वाधीन भारत के सामने निम्नांकित तीन समस्याएँ थीं-
(क) देश विभाजन के कारण लगभग 80 लाख लोग (8 मिलियन) उस देश से नये भारत में आये, जिसे 14 अगस्त, 1947 से पाकिस्तान कहा जाता है। उन लोगों को अपने लिए घर तथा नौकरियाँ ढूँढ़नी पड़ी। नयी सरकार को इस समस्या का समाधान करना ही था।

(ख) दूसरी समस्या देशी रियासतों की समस्या से नये भारत को जूझना था। इनकी कुल संख्या 500 थी। प्रत्येक देशी रियासत किसी राजा/नरेश या नवाब के अधीन थी। इनमें प्रायः सभी को भारत संघ में शामिल होने के लिए राजी कर लिया गया।

(ग) दीर्घ काल में, नये राष्ट्र को एक ऐसी राजनीतिक प्रणाली अपनानी थी जो संपूर्ण राष्ट्र की जनसंख्या के सभी वर्गों की आशाओं एवं उम्मीदों पर खरी उतरती।

10 स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार के सामने दो तत्कालीन मामले (काय) क्या थे?
उत्तर-(क) पाकिस्तान से आये करोड़ों शरणार्थियों की समस्या का समाधान करना। उनका पुनर्वास एवं उन्हें रोजगार देना।

(ख) देश का एकीकरण एवं एकता बनाये रखना। विशेषकर 500 रियासतों से भारत संघ में शामिल होने के लिए राजी कर लेना।

11 जलियाँवाला बाग हत्या कांड पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-13 अप्रैल 1919 को बैशाखी के दिन अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक सभा का आयोजन किया गया था। जिसमें करीब 20 हजार लोग एकठे थे। जनरल डायर ने बिना चेतावनी दिए गोली चलवा दी।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार इस गोलीकांड में 379 लोग मारे गये जबकि 1200 घायल हुए। इस बर्बर घटना की पूरे देश में भर्त्सना हुई। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी सर की उपाधि वापस कर दी।

12 खिलाफत आंदोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर-खिलाफत आंदोलन- प्रथम विश्व युद्ध में ऑटोमन तुर्की की हार हो चुकी थी। इस आशय की अफवाह फैली हुई थी कि इस्लामिक विश्व के आध्यात्मिक नेता (खलीफा) ऑटोमन
सम्राट पर एक बहुत सख्त शांति संधि थोपी जायेगी।

खलीफा के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए मार्च 1919 में बम्बई में एक खिलाफत समिति का गठन किया गया। मोहम्मद अली और शौकत अली बन्धुओं के साथ-साथ कई युवा मुस्लिम नेताओं ने इस मुद्दे पर संयुक्त जन कारवाई की संभावना तलाशने के लिए महात्मा गाँधी के साथ वार्तालाप की।

सितम्बर 1920 में महात्मा गांधी सहित दूसरे नेताओं ने यह बात मान ली कि खिलाफत आंदोलन के समर्थन और स्वराज्य के लिए एक असहयोग आंदोलन शुरू किया जाना चाहिए।

13 स्वतंत्रता संघर्ष में अम्बाबाई की भूमिका लिखें।
उत्तर-कर्नाटक की अम्बाबाई का विवाह 12 साल की उम्र में कर दिया गया था। 16 साल की उम्र में वह विधवा हो गई। उन्होंने उडीपी में विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों की घेराबंदी की। उन्हें गिरफ्तार किया गया और सजा दी गई।

रिहा होने पर उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। जब भी वह जेल से बाहर होती. सभाओं में भाषण देतीं, बुनाई-कताई सिखातीं और प्रभातफेरियों का आयोजन करतीं।

अम्बाबाई इन्हें अपने जीवन के सबसे सुखद क्षण मानती थीं क्योंकि ऐसे क्षणों में उन्हें एक नया मकसद और प्रतिबद्धता दिखाई देती थी। आंदोलन में हिस्सेदारी के अपने अधिकार को मनवाने के लिए महिलाओं को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी। ncert