प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन अध्याय 16 विज्ञान क्लास 10th

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अध्याय 16 पाठ परिचय

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन अध्याय 16 क्लास दसवीं के इस पाठ से सबंधित सभी महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्नों का उत्तर आपको पढ़ने को मिलेगा इसलिए यदि आप प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन कुछ महत्त्व पूर्ण सवालों का जवाब जानना कहते है तो आप इस ब्लॉग को जरूर अध्ययन करे ताकि इनसे जुड़ी सभी प्रकार के डाउट क्लियर हो जाय , तो चलिए शुरू करते है

प्रश्न-1. पर्यावरण-मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-से परिवर्तन ला सकते हैं?

उत्तर – पर्यावरण-मित्र बनने के लिए हम अपनी आदतों में निम्नलिखित परिवर्तन ला सकते हैं
(क) प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग न्यायसंगत रूप से करना चाहिए। नवीकरणीय साधनों का उपयोग उसी दर से करना चाहिए जिस दर से उनका पुनः पूरण संभव हो। भूमिगत जल का पुनः पूरण स्वयं ही हो जाता है। वनों के पुनः पूरण के लिए बन कार्यक्रम चलाने चाहिए।
(ख) वन प्राणियों का चोरी छिपे शिकार करने से वन्य पौधों तथा विभिन्न जंतुओं के जीवित रहने का संकट उत्पन्न हो जाता है। अतः वन रखना चाहिए। उनकी संख्या का मॉनीटरन किया जाए, उनका शिकार वर्जित किया जाए
(ग) लकड़ी के व्यापार तथा ईंधन हेतु वृक्षों को अंधाधुंध न काटा जाए। वनों के पुनः चक्रण के लिए लगातार वृक्षों को उगाया जाना चाहिए क्योंकि ये हमारे पर्यावरण को स्वच्छ बनाते हैं।

प्रश्न-2. संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य की परियोजना के क्या लाभ हो सकते हैं?

उत्तर – (1) कम अवधि के उद्देश्य की परियोजनाओं से हमारा पर्यावरण कम प्रदूषित होता है।
(2) इनका लाभ स्थानीय लोगों को बहुत अधिक होता है।
(s) पर्यावरण कम प्रभावित होता है व परियोजना के तदर्थ लाभ होता हैं।
(4) प्राकृतिक संसाधनों का लम्बे समय तक उपयोग न करने से संसाधनों को पुनः प्राप्त किया जा सकता है।


प्रश्न-3. यह लाभ, लंबी अवधि को ध्यान में रखकर बनाई गई परियोजनाओं के लाभ से किस प्रकार भिन्न हैं?

उत्तर – कम-उद्देश्य में परियोजनाओं का एकमात्र लाभ यह है कि संसाधनों के अधिक-से-अधिक दोहन द्वारा अधिक-से-अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इन योजनाओं के अंतर्गत भावी पीढ़ियों के लिए हमारा कोई उत्तरदायित्व ध्यान में नहीं होता। दूसरी ओर, लंबी अवधि की योजनाओं का उद्देश्य संसाधनों का संपोषित विकास के लिए उपयोग करते हुए, आने वाली पीढ़ियों के उपयोग के लिए भी उन्हें सुरक्षित रखना होता है।

प्रश्न-4. क्या आपके विचार से संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन सी ताकतें कार्य कर सकती हैं?

उत्तर- हमारे विचार में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए ताकि निम्न वर्ग के लोग भी उनका लाभ उठा सकें। संसाधन केवल मात्र मुट्ठी भर अमीर और शक्तिशाली लोगों के पास नहीं होने चाहिए। गरीब जनता को भी इन संसाधनों का लाभ उठाने का मौका मिलना चाहिए, जिससे समाज का विकास हो सके और लोगों की जीवन शैली में कुछ सुधार आ सके। इससे गरीब व मध्यवर्गीय लोग इनके लाभ के बारे में जान सकेंगे व इनका दोहन नहीं करेंगे। संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध मात्र मुट्ठी भर अमीर,लालची तथा शक्तिशाली लोग खड़े,जो इसके समान वितरण को रोक रहे है

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन के महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न-5 . हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए।

उत्तर – हमें वन तथा वन्य जीवन का संरक्षण करना चाहिए क्योंकि वन एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा है। वन हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता है। स्थानीय लोगों को ईधन के लिए जलावन की काफी मात्रा में आवश्यकता होती है। छोटी लकड़ियों एवं छाजन, बास झोपड़ी बनाने के लिए, भोजन एकत्र करने एवं भण्डारण के लिए, खेती के औजार, मछली पकड़ने के एवं शिकार के औजार मुख्यतः लकड़ी के बने होते हैं और यह लकड़ी वनों से प्राप्त होती है। विभिन्न व्यक्ति फल, नट्स तथा औषधि एकत्र करने के साथ-साथ अपने पशुओं मवेशियों की वन में चराते हैं अथवा उनका चारा वन से एकत्र करते हैं। इसके साथ-साथ वन वायु में O  तथा CO  के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। जो कि जीवन का आधार है। इससे हमें पता चलता है कि वन हमारी कितनी अधिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। यदि हम इनका संरक्षण नहीं करेंगे तो ये धीरे-धीरे नष्ट होते चले जाएंगे और हम पूर्वजों से मिली इस सम्पदा को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित नहीं कर पाएंगे व इनका दोहन केवल वर्तमान आवश्यकताओं की ही पूर्ति कर पाएगा।

प्रश्न-6 . वन संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए।

उत्तर – वनों के संरक्षण के कुछ उपाय निम्नलिखित हैं:
(1) वनों की कटाई को रोक कर।
(2) पुनः वनारोपण कर हम वनों को संरक्षित कर सकते हैं।
(3) सामाजिक तथा पर्यावरण रूप में पेड़ों को लगा कर।
(4) वनों को आग से बचाकर।
(5) अधिक चराई रोक कर।
(6) पीड़क तथा कीटों से वनों को बचाकर।


प्रश्न-7 . अपने निवास क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परंपरागत पद्धति का पता लगाइए।

उत्तर – जल संग्रहण की परंपरागत प्रणाली निम्नलिखित हैं छोटे-छोटे गड्डे खोदकर, झीलों का निर्माण, साधारण जल संभर व्यवस्था की स्थापना, मिट्टी के छोटे बांध बनाना, रेत तथा चूने के पत्थर के संग्रहक बनाना तथा घर की छतों पर बावड़ी बनाकर जल एकत्र करना आदि।

प्रश्न-8 . इस पद्धति की पेय व्यवस्था (पर्वतीय क्षेत्रों, मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र) से तुलना कीजिए।

उत्तर – छोटे-छोटे गड्ढे खोदना, झीलों का निर्माण करना, साधारण जल संभर व्यवस्था की स्थापना, मिट्टी के छोटे बांध बनाना, रेत तथा चूने के पत्थर के संग्रहक बनाना, घर की छत्तों से जल एकत्र करना, खादिन, बड़े पात्र एवं नाड़ी, बंधारस, ताल, बंधिस, अहार, पाइन, कुल्ह, तालाब, एरिस, सुरंगम, कट्टा इत्यादि जल संग्रहण की परंपरागत तकनीक हैं। ये तकनीक स्थानीय होती हैं तथा इनका लाभ भी स्थानीय सीमित क्षेत्र को होता है। बड़े समतल भूभाग में जल संग्रहण स्थल मुख्यतः अर्धचन्द्राकार मिट्टी के गडढे अथवा निचले स्थान, वर्षा ऋतु में पूरी तरह भर जाने वाली नालियाँ प्राकृतिक जल मार्ग पर बनाए गए ‘चेक डैम’ जो कंक्रीट अथवा छोटे कंकड़ पत्थरों द्वारा बनाए जाते हैं।

प्रश्न-9 . अपने क्षेत्र में जल स्रोत का पता लगाइए। क्या इस स्रोत से प्राप्त जल उस क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है?

उत्तर – हमारे क्षेत्र में जल के स्त्रोत हैं – नदियाँ, झीलें, तालाब, कुँए, नहरें तथा अन्य जल संग्रहण के स्रोत । ये सभी स्त्रोत हमें तथा अन्य सभी निवासियों को बहुत बड़ी मात्रा में जल उपलब्ध करवाते हैं। जो हमारी खेती-बाड़ी व हमारे जीवन में जल की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। इससे एक बहुत बड़े क्षेत्र को लाभ होता है।

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रश्न-1. अपने घर को पर्यानुकूलित (पर्यावरण-मित्र) बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन से परिवर्तन सुझा सकते हैं?

उत्तर – अपने घर को पर्यानुकूलित बनाने के लिए हम निम्नलिखित परिवर्तन सुझा सकते हैं
(क) वाहनों का प्रयोग करने के बजाय पैदल साइकिल से चलना।
(ख) अपने घरों में बल्बों की बजाय फ्लोरेसेंट ट्यूब अधवा CFL का प्रयोग करना।
(ग) लिफ्ट का प्रयोग न करके सीढ़ियों का उपयोग करना।
(घ) सर्दी में ऊष्मक हीटर या सिंगड़ी का उपयोग न करके अतिरिक्त स्वेटर पहनना।
(ङ) धुंआ रहित चूल्हों का इस्तेमाल करना।
(च) घरेलू अपशिष्ट तथा जैव अपशिष्ट को इकट्ठा करके खाद बनाना या बायोगैस बनाने के लिए इस्तेमाल करना।
(छ) घरेलू अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों का पुनः चक्रण करना आदि।
(ज) बिना जरूरत के बिजली के पंखे, बल्ब व अन्य संयंत्रों का इस्तेमाल न करना आदि।


प्रश्न-2. क्या आप अपने विद्यालय में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं जिनसे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके?


उत्तर – (1) अतिरिक्त पंखे, बल्ब व अन्य विद्युत उपकरणों का व्यर्थ इस्तेमाल न करना।
(2) कुड़ा-कर्कट, प्लास्टिक की वस्तुएँ आदि कूड़ेदान में
डालकर हम विद्यालय के पर्यावरण को स्वच्छ रख सकते हैं।
(3) शोर कम करके हम ध्वनि प्रदूषण से बच सकते हैं।
(4) पेड़-पौधे अधिक से अधिक लगाकर।
(5) पानी का व्यर्थ इस्तेमाल या पानी को व्यर्थ न करके हम जल संरक्षण कर सकते हैं।

प्रश्न-3. इस अध्याय में हमने देखा कि जब हम वन एवं वन्य जंतुओं की बात करते हैं तो चार मुख्य दावेदार सामने आते हैं। इनमें से किसे वन उत्पाद प्रबंधन हेतु निर्णय लेने के अधिकार दिए जा सकते हैं? आप ऐसा क्यों सोचते हैं?

उत्तर – इन चारों दावेदारों में से हम वन के अंदर एवं इसके निकट रहने वाले लोगों, सरकार के वन विभाग के सदस्यों, वन्य जीवन एवं प्रकृति प्रेमियों को वन उत्पाद प्रबधन हेतु निर्णय लेने के अधिकार देना चाहेंगे। क्योंकि ये सब वन तथा वन्य जीवन का अनुचित दोहन नहीं करेंगे। यदि वन के अंदर एवं निकट रहने वाले लोगों को जागरूक किया जाए तो ये लोग वन उत्पाद प्रबधन में अपनी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

प्रश्न-4. एक एकल व्यक्ति के रूप में आप निम्न के प्रबंधन में क्या योगदान दे सकते हैं।
(क) वन एवं वन्य जंतु
(ख) जल संसाधन
(ग)कोयला एवं पेट्रोलियम?


उत्तर – (क) बन एवं वन्य जीव जन्तु – वन आज हमारी बहुत बड़ी आवश्यकता को पूरा कर रहे हैं। इनके लिए एक अकेला व्यक्ति अपने साथियों या किसी अन्य माध्यम की सहायता से बन के निकट के निवासियों या आम जनता को जागरुक कर सकता है। उन्हें अधिक से अधिक पेड़ लगाकर बन गया बन्य संपदा को सुरक्षित तथा संरक्षित करने के लिए जागरुक कर सकता है।

(ख ) जल समापन –जल भी बनों की तरह हमारी मूल जरुरत है हमें इसकी प्रत्येक द बचानी चाहिए। एक अकेला व्यक्ति जल संसाधनों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए लोगों को जागरूक कर सकता है। वह स्वयं भी अपने सान सान में अनेको परिवर्तन कर सकता है। जैसे जल का अर्थ इस्तेमाल न करना। जल संसाधनों को गन्दा व दूषित न करना, जल की एक-एक बूद बचाना।

(ग) कोयला एवं पेट्रोलियम – कोयला तथा पेट्रोलियम को संरक्षित रखने के लिए इनका इस्तेमाल कम से कम करक, इनके बजाय ऊर्जा के अन्य नवीकरणीय संसाधनों का प्रयोग करना व ऊर्जा की खपत करके भी एकल व्यक्ति इनके प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकता है।

5. आप एक एकल व्यक्ति के रूप में विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए क्या कर सकते हैं।

उत्तर – एकल व्यक्ति के रूप में में विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपना सकता हूँ
(1) वन तथा वन्य संपदा का अनुचित दुरूपयोग न करना। लोगों को इनकी सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए जागरूक करना।
(2) जल संसाधनों का अनुचित व अधिक दोहन न करना। जल की एक-एक बूंद बचाना। जल संरक्षण की विभिन्न विधियों का प्रयोग करके जल बचाना।
(3) ऊर्जा के अनवीकरणीय स्त्रोतों का उपयोग न करके नवीकरणीय स्त्रोतों का उपयोग करना तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों का दोहन न करना व ऊर्जा की खपत करना। इन सब बातों को अपना कर मैं विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रख सकते हैं।

प्रश्न-6. निम्न से संबंधित ऐसे पाँच कार्य लिखिए जो आपने पिछले एक सप्ताह में किए हैं-
(a) अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
(b) आपने प्राकृतिक संसापनों पर दबाव को और बढ़ाया है।

उत्तर – (a)(क) पानी को व्यर्थ नहीं बहने दिया।
(ख) खाली प्लास्टिक की थैलियों को फेंका नहीं बल्कि आगे इस्तेमाल के लिए इकट्ठा किया।
(ग) बाजार जाने के लिए स्कूटर के बजाय साईकिल का प्रयोग किया।
(b) (क) बगीचे में लगे पौधे काटे।
(ख) नहाने में अधिक पानी का उपयोग किया।
(ग) स्कूल जाने के लिए साइकिल की बजाय स्कूल बस का प्रयोग किया
(घ) स्कूल से आते वक्त क्लास के कमरे का पंख चलता छोड़कर विद्युत व्यर्थ की।

प्रश्न-7. इस अध्याय में उठाए बिन्दुओं (समस्याओं) के आधार पर आप अपनी जीवन-शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के संपोषण को बढ़ावा मिल सके?

उत्तर – (1) पेय जल को व्यर्थ होने से रोकना चाहिए।
(2) विद्युत का प्रयोग मितव्ययता से करना चाहिए।
(3) कम दूरी पर जाने के लिए साईकिल का प्रयोग करें न कि कार/स्कूटर का प्रयोग करें।
(4) पैट्रोल से चलने वाले वाहनों के बजाय C.N.G न चलने वाले वाहनों का प्रयोग करके।
(5) जब उपयोग में न हों, तब लाइटों तथा पंखों को बंद कर देना।
(6) प्लास्टिक के थैलों का कम से कम प्रयोग करके।


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