Parasmani moral education। पारसमणि पाठ 6 ( नैतिक शिक्षा ) परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर। Ncert Solution For Class 8th

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Parasmani moral education। पारसमणि पाठ 6 ( नैतिक शिक्षा ) परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर। Ncert Solution For Class 8th के इस लेशन में आप सभी छात्रों का स्वागत है, इस लेशन में आप सभी छात्रों को इस पाठ से जुड़ी सभी प्रश्न जो परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, इस पोस्ट पर कवर किया गया है जो पिछले कई परीक्षाओं में भी पूछे जा चुके हैं, इसलिए इस पोस्ट को पूरा ध्यान से अध्ययन करें जिसे आपकी नॉलेज और increase हो सके-
सही विकल्प का चयन करें-

Parasmani moral education। पारसमणि पाठ 6 ( नैतिक शिक्षा ) परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर। Ncert Solution For Class 8th

1 ‘पारसमणि’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
(a) हमें स्वयं के मेहनत एवं क्षमता पर भरोसा करना चाहिए।
(b) हमें दूसरों की काबलियत पर भरोसा करना चाहिए।
(c) हमें अपने आप धन के प्रति आश्वस्त रहना चाहिए।
(d) हमें किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
उत्तर-(a)

2 ‘पारसमणि पाठ के लेखक कौन हैं?
(a) आचार्य रामचंद्र शुक्ल,
(b) भरत व्यास,
(c) श्रीमन्नारायण.
(d) रामानंद दोषी।
उत्तर-(d)

3 हम किस प्रकार सफलता प्राप्त कर सकते हैं ?
(a) सेवा, कौशल और लगन से,
(b) उपकार, कौशल और अशिक्षा से,
(c) द्वेष, अनिच्छा और उपकार से,
(d) अभिमान, उत्थान एवं सजगता से।
उत्तर-(a)

4 सोना का होना और न होना दोनों किसका कारण है ?
(a) विपदा.
(b) आपदा,
(c) अनहोनी.
(d) समस्या।
उत्तर-(d)

निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर लिखें-

1 पारसमणि के बारे में क्या मान्यता प्रचलित है ?
उत्तर-पारसमणि के बारे में यह मान्यता प्रचलित है कि इसके स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है।

2 सोने का होना और न होना दोनों ही समस्या के कारण क्यों हैं ? लिखें।
उत्तर-सोने का होना और न होना दोनों ही समस्या का कारण है क्योंकि यह जिसके पास है उसे मद या घमण्ड से मारता है और जिसके पास नहीं है, उसे लोभ से त्रस्त रखता है।

3 इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर-इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें स्वयं के मेहनत एवं क्षमता पर भरोसा करना चाहिए। हम अपनी लगन, मेहनत एवं कौशल से कोई भी इच्छित फल प्राप्त कर सकते हैं।
याचना करने एवं अति सरलता से हमें कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है।

निम्नांकित कथन सही है या गलत, क्यों ? उत्तर दें-

(क) हमें अपना हाथ किसी उद्योग के लिए बढ़ाना चाहिए, याचना के लिए नहीं।
(ख) हमें स्वयं पर भरोसा करना चाहिए।
(ग) हमें किसी भी परिस्थिति में निराशा नहीं होना चाहिए।
(घ) सोने में जितनी अच्छाई है, उससे कम बुराई भी नहीं है।
(ङ) हमारे हर कार्य का उद्देश्य धन-प्राप्ति होना चाहिए।

उत्तर-(क) सही है, क्योंकि याचना से जो भी प्राप्त होता है वह अत्यल्प एवं भीख के समान होता है जबकि मेहनत के लिए बढ़ा हुआ हाथ सफलता के साथ आत्मसंतोष भी देता है।

(ख) सही है, क्योंकि स्वयं पर भरोसा रखकर हम किसी भी बाधा को पार कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

(ग) सही है, क्योंकि निराश हो जाने पर हम अपनी स्वाभाविक क्षमताओं का भी पूर्ण उपयोग नहीं कर पाते हैं जो अगली असफलता एवं निराशा का कारण बन जाता है।

(घ) सही है, क्योंकि सोना एक ओर हमारे धन-सम्पत्ति के रूप में हमारे सुख-दुःख में काम आता है तो दूसरी ओर प्रचुर मात्रा में हासिल हो जाने पर हमें घमण्डी और अहंकारी भी बना देता है।

(ड) गलत है, क्योंकि हर कार्य का उद्देश्य केवल धन प्राप्ति नहीं होना चाहिए बल्कि धन प्राप्ति के साथ समाज और राष्ट्र कल्याण भी होना चाहिए।