पाठ 6 फसल सारांश,भावार्थ,आशय,नागार्जुन क्लास 10th हिंदी 

पाठ-6 फसल  का सारांश

पाठ-6 फसल  का सारांश,भावार्थ, आशय क्लास 10th हिंदी ncert solution 

पाठ-6 फसल  का सारांश में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है , आज हम कवी नागार्जुन द्वारा रचित कविता फसल पाठ  का भावार्थ को बहुत ही विस्तार से समझेंगे , इसलिए आपसे अनुरोध है की आप इसमें अंत तक बने रहें ताकि इस पाठ  से जुड़ी किसी भी प्रकार का सवाल को हल करने में कोई परेशानी न हो , तो चलिए अध्ययन करना शुरू  करते है 

1. एक के नहीं,
दो के नहीं,
ढेर सारी नदियों के पानी का जादू:
एक के नहीं,
दो के नहीं,
लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा :
एक की नहीं,
दो की नहीं,
हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुण धर्म :

उद्धृत काव्यांश का आशय (व्याख्या) स्पष्ट करें।

कवि बताता है कि फसल को उगाने में पानी की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। कोई एक या दो नदियों का जल ही नहीं, अपितु ढेर सारी नदियों का जल फसलों को सींचता है। इस जल का फसलों पर जादुई प्रभाव लक्षित होता है। पानी का जादू फसलों के विकास में देखा जा सकता है। इसी प्रकार फसलों के उगाने में एक-दो व्यक्तियों के हाथों का श्रम नहीं लगता, बल्कि लाखों-करोड़ों हाथों का स्पर्श इस फसल को गरिमा प्रदान करता है। ये सभी लोग मिलकर फसल को परिणाम तक पहुंचाते हैं | फसल हजार-हजार खेतों की मिट्टी में उगती तथा फलती-फूलती है। मिट्टी का गुण-धर्म ही फसल उगाना है। इस प्रकार मिट्टी, मानव का श्रम तथा नदियों का जल- ये सभी मिलकर फसल पैदा करने में अपना-अपना योगदान देते हैं।

2. फसल क्या है?
और तो कुछ नहीं है वह
नदियों के पानी का जादू है वह
हाथों के स्पर्श की महिमा है
भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण धर्म है
रूपांतर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का ।

उद्धृत काव्यांश का आशय (व्याख्या) स्पष्ट करें।

कवि प्रश्न करता है- खेतों में उगी हुई ये फसलें आखिर क्या हैं? वह स्वयं उत्तर देता है कि ये फसलें और कुछ नहीं हैं, बल्कि पानी के अमृत-भरे प्रभाव से सींचकर पुष्ट हुई हैं। इनमें नदियों का जादुई प्रभाव है। ये किसानों के हाथों का स्पर्श और श्रम पाकर इतनी फली-फूली हैं। आशय यह है कि इन फसलों में किसानों की मेहनत छिपी है। ये फसलें कहीं भूरी मिट्टी से उपजी हैं, कहीं काली मिट्टी से उपजी हैं तो कहीं संदली मिट्टी से उपजी हैं। आशय यह है कि इनमें अपनी-अपनी मिट्टी का गुण, स्वभाव, स्वाद और प्रभाव छिपा हुआ है। ये फसलें सूरज की किरणों का बदला हुआ रूप हैं। आशय यह है कि सूरज की किरणों ने ही इन्हें ऊष्मा देकर इस तरह का रूपाकार प्रदान किया है। हवाओं की थिरकन सिमट कर इन फसलों में समा गई है। आशय यह है कि इन्हें बड़ा करने में वायु का भी भरपूर योगदान है।


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शब्द-संपदा

दंतुरित – बच्चों के नए-नए दाँत
धूलि-धूसर गात- धूल मिशङ्की से सने अंग-प्रत्यंग
जलजात- कमल का फूल
अनिमेष- बिना पलक झपकाए लगातार देखना
इतर- दूसरा
मधुपर्क- दही, घी, शहद, जल और दूध का योग जो देवता और अतिथि के सामने
रखा जाता है। आम लोग इसे पंचामृत कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग
बच्चे को जीवन देने वाला आत्मीयता की मिठास से युक्त माँ के प्यार के
है ।

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