NCERT Solutions for Class 8 Geography l मानव संसाधन पाठ 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

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NCERT Solutions for Class 8 Geography मानव संसाधन पाठ 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

मानव संसाधन पाठ 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
मानव संसाधन पाठ 6 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
मानव संसाधन पाठ 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

1 जनसंख्या परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ? जनसंख्या परिर्वतन के मुख्य कारण कौन-कौन से हैं ? व्याख्या करें।
उत्तर-जनसंख्या परिर्वतन एक प्रक्रिया है। आबादी की संख्या वितरण एवं संघटन में लगातार परिवर्तन होता रहता है। यह परिवर्तन तीन प्रक्रियाओं- जन्म, मृत्यु एवं प्रवास के आपसी संयोजन से होता है।

जनसंख्या परिवर्तन के मुख्य कारण निम्नांकित हैं-

(क) जन्म-दर- जन्म-दर से आशय एक दिए हुए समय में प्रति 1000 व्यक्तियों पर जीवित जन्मों की संख्या से है। ऊंची जन्म-दर से आशय अधिक जनसंख्या से है अर्थात् जन्म-वर जितनी ऊंची होगी जनसंख्या उतनी ही तेजी से बढ़ेगी।

(ख) मृत्यु-दर- मृत्यु-दर से आशय प्रति 1000 व्यक्तियों पर मृतकों की संख्या से है। ऊँची मृत्यु-दर से आशय जनसंख्या की वृद्धि-दर का कम होना और नीची मृत्यु-दर से आशय जनसंख्या की वृद्धि दर का अधिक होना है। वर्तमान में अच्छी स्वास्थ्य, शिक्षा व आवास सुविधाओं के
कारण मृत्यु-दर में कमी आई है, इससे जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है।

(ग) प्रवास- प्रवास के कारण भी जनसंख्या के आकार में परिवर्तन होता है। किसी स्थान में लोगों के आने जाने को प्रवास कहते है। यदि जनसंख्या की यह अदला-बदली एक देश में ही हो तो इससे जनसंख्या परिवर्तन में कोई अन्तर नहीं आता। परन्तु यदि प्रवास एक देश से दूसरे
देश में होते तो इसमें जनसंख्या परिवर्तन में अवश्य फर्क पड़ेगा।

2 जनसंख्या पिरामिड से आप क्या समझते हैं ? किसी देश के जनसंख्या पिरामिड से किन बातों का पता चलता है ?
उत्तर-जनसंख्या संघटन का अध्ययन करने में जनसंख्या पिरामिड सहायक होते हैं। जनसंख्या पिरामिड को आयु-लिंग पिरामिड भी कहते हैं।

किसी देश के जनसंख्या पिरामिड से निम्न बातों का पता चलता है-

जनसंख्या पिरामिड में कुल जनसंख्या के लिंग प्रतिशत को विभक्त किया जा सकता है। इनको 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग तथा 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग में विभक्त किया जा सकता है। कुल जनसंख्या के प्रतिशत से लिंग प्रतिशत ज्ञात किया जा सकता है। जनसंख्या पिरामिड का आधार जन्मे शिशुओं की स्थिति को दिखाता है।

शिखर की तरफ बढ़ते हुए यह क्रमशः प्रौढ़ों व वृद्धों की जनसंख्या दिखाता है। कम जन्म एवं मृत्यु-दर वाले देशों का पिरामिड का आधार संकरा होता है। यह स्थिति विकसित देशों में होता है।

3 जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख करें।
उत्तर-जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक-
जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों को हम दो वर्गों में विभक्त कर सकते हैं- भौगोलिक कारक, मानवीय कारक।भौगोलिक कारक- इसके अंतर्गत भू-आकृति, जलवायु एवं प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता है।

(क) भू-आकृति- पर्वत एवं पठारों की अपेक्षा लोग समतल मैदानों में रहना अधिक पसंद करते हैं, क्योंकि मैदानी क्षेत्र कृषि कार्य, गृह निर्माण, यातायात आदि के लिए उपयुक्त होते हैं। भारत में गंगा के मैदानी क्षेत्र सघन बसे हुए हैं, जबकि हिमालय के क्षेत्र विरल बसाव वाले हैं।

(ख) जलवायु-अत्यधिक गर्म या ठंडी जलवायु वाले क्षेत्र मानव बसाव के लिए उपयुक्त नहीं होते। शीतोष्ण एवं उष्णाई जलवायु वाले प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व अधिक पाए जाते हैं। यही कारण है कि गर्म एवं ठंडे मरुस्थलीय प्रदेशों- सहारा, अंटार्कटिक, कनाडा में विरल जनसंख्या है।

(ग) प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता-जल, उपजाऊ मृदा एवं खनिज संसाधनों की उपलब्धता लोगों को बसने के लिए आकर्षित करती है। नदी घाटियों के क्षेत्र जहाँ प्रचुर मात्रा में अलवणीय (मीठा) जल उपलब्ध हैं. वहाँ घनी आबादी है। झारखंड का छोटानागपुर का पठारी इलाका खनिज संसाधनों से समृद्व है। अतः घनी आबादी है। मध्यपूर्व के अरब देशों में पेट्रोलियम भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। ये क्षेत्र जलवायु प्रतिकूल होते हुए भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

मानवीय कारक-

(क) सामाजिक कारक- अच्छी शिक्षा, स्वास्थ और आवास वाले क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक पाया जाता हैं। जैसे- पुणे, बेंगलुरू आदि।

(ख) आर्थिक कारक- ऐसे प्रदेश जहाँ रोजगार के साधन उपलब्ध होते हैं, वहाँ घनी जनसंख्या पायी जाती है। औद्योगिक क्षेत्र ऐसे ही क्षेत्र हैं। भारत का मुंबई, अहमदाबाद, जमशेदपुर, जापान का ओसाका ऐसे ही शहर हैं।

(ग) सांस्कृतिक कारक- अत्यधिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले स्थान, लोगों को बसने के लिए आकर्षित करते हैं। वाराणसी, हरिद्वार, येरूसलम, वेटिकन सिटी ऐसे ही शहर हैं।

4 जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करें।
उत्तर-जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक-

(क) जलवायु- जलवायु का भी जनसंख्या के घनत्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरणतः लोग अत्यधिक गरम अथवा ठंडी जलवायु वाले प्रदेशों की बजाय सामान्य वर्षा शीतोष्ण प्रदेश में घने रूप से बसे पाए जाते हैं।

(ख) मृदा एवं खनिज भंडार- मृदा कृषि की प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक है। अतः मनुष्य को भोजन, वस्त्र व घर इसी पर निर्भर है। अतः उपजाऊ मृदा वाले मैदानों में जनसंख्या घनी पाई जाती है। इसी प्रकार खनिज भंडारों से युक्त भागों ने भी लोगों को गंभीरता से आकर्षित किया है।

(ग) स्थलाकृति- यह जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक है। उदाहरणतः लोग पर्वत एवं पठारों की तुलना में मैदानों में रहना पसंद करते हैं।

5 विश्व में जनसंख्या के असमान वितरण के क्या कारण हैं ?
उत्तर-विश्व में जनसंख्या के असमान वितरण के कारण-

(क) स्थलाकृति- लोग पर्वतों और पठारों की तुलना में मैदानी भाग में ही रहना पसन्द करते हैं।
(ख) जलवायु- सामान्य जलवायु में लोग अधिक बसते हैं परंतु ध्रुवीय प्रदेश अथवा अत्यधिक गरम में कम।
(ग) मृदा- कृषि की उपयुक्त भूमि में बंजर भूमि की अपेक्षा लोग अधिक बसते हैं।
(घ) जल-जहाँ अलवणीय जल की प्राप्ति सुगमता से होती है वहाँ लोग अधिक बसते हैं। नदी घाटियों में लोग अधिक बसते हैं परन्तु मरुस्थल में कम ।
(ङ) खनिज-खनिज निक्षेपों वाले क्षेत्रों में लोग अधिक बसे हुए हैं। दक्षिणी अफ्रीका में हीरे का खान होने के कारण अधिक लोग बसते हैं। jac board