रेल की एक यात्रा अथवा, मेरी अविस्मरणीय रेल-यात्रा

रेल यात्रा का वर्णन

रेल यात्रा पर निबंध परिचय

रेल यात्रा पर निबंध में किसी जगह से किसी दूसरे जगह पर जाना या यात्रा करना यात्रा कहलाता है। जब कभी भी कहीं दूर जाने की बात सामने आती है तो सबसे पहले हमारे विचार में रेल का ही सामने आता है।और कहा जाय तो रेल से यात्रा करना काफी आसान,आरामदायक और सुविधाजनक माना जाता है। दूर स्थानों के लिए यह सर्वोत्तम साधन माना जाता है। आज हम रेल यात्राओं से जुड़ी निबंध में पूछे जाने वाले सवालों,टॉपिक के बारे में यहां कुछ छोटे और बड़े निबंध सम्बंधित परीक्षा उपयोगी तथ्य को विस्तार में चर्चा करेंगे

  • मेरी पहली रेलगाड़ी यात्रा
  • यात्रा का उत्साह,
  • दृश्य,
  • स्टेशन का दृश्य
  • गाड़ी का दृश्य
  • गाड़ी से बाहर का दृश्य
  • चहल-पहल

मेरी पहली रेलगाड़ी यात्रा

रेल यात्रा पर निबंध के माध्यम से मै आपको हमारी पहली यात्रा के बारे में बताते हुए काफी ख़ुशी हो रही है ,यात्रा का उत्साह-यह बात सन 1986 की है। मुझे दिल्ली चंडीगढ़ जाना था। पिताजी के साथ था। मैं पाँचवीं कक्षा में पढ़ता था। पिताजी ने बतलाया था कि हर 12:30 पर नयी दिल्ली से चलनेवाली फ्लाईंग मेल से हमें चंडीगढ़ के लिए चलना है। यह मेरी प्रथम रेल-यात्रा थी। अतः मैं प्रातः से बहुत उत्साहित था। इससे पूर्व मैंने गाड़ी देखी अवश्य थी, लेकिन उस पर यात्रा नहीं की थी। 

स्टेशन का दृश्य

 हमारे टिकट पहले ही खरीदे जा चुके थे। उस दिन मेरे जल्दी पहुंचने के कारण हम 12:00 बजे ही नयी दिल्ली स्टेशन पर पहुंच गए। साफ-सुथरा चहल-पहल से भरा रेलवे स्टेशन था। कोई कुली को आगे किए अटेचियाँ लिए आ रहा था, कोई अपना बैग संभाले गाड़ियों की ओर लपका जा रहा था। 12:05 पर हमने अपनी जगह ढूँढ निकाली। मुझे खिड़की के पास बैठने का मौका मिला इसलिए मैं खुश था। गाड़ी पर बैठकर मुझे बहुत अच्छा लगा। 

रेल यात्रा पर निबंध के माध्यम से गाड़ी का दृश्य

 ठीक 12:30 पर गाड़ी चली। लगभग सभी सीटें यात्रियों से भर गयी थीं। लोग अपने-अपने सगे-संबंधियों के साथ किसी-न-किसी क्रिया में व्यस्त थे। अधिकांश लोग पत्र-पत्रिका, समाचार पत्र या पुस्तक आदि पढ़ रहे थे। एकाध जगह ताश का खेल चल रहा था। बुजुर्ग लगनेवाली यात्री देश-विदेश की चर्चा में व्यस्त थे। कहीं से हँसी के फव्वारे और मजाक के स्वर आ रहे थे। शायद यह किसी कॉलेज के छात्र-छात्राओं का समूह था, जो मीठी-मीठी बातों में आनंद ले रहा था। 

गाड़ी से बाहर का दृश्य

 गाड़ी के चलते ही मेरा ध्यान बाहर के दृश्यों की तरफ खिंच गया। मेरे लिए तो यह सजीव चलचित्र था। मैं दिल्ली से चंडीगढ़ के सारे दृश्यों को पी लेना चाहता था। मेरा ध्यान पटरी के काँटे बदलती गाड़ी की ओर गया। मैं समझ नहीं पाया कि गाड़ी कैसे उन आड़ी-तिरछी पटरियों में से अपना रास्ता ढूँढ़ पा रही है। यह मैं समझ पाऊँ कि गाड़ी रूक गयी। यह सब्जी मंडी स्टेशन था। यात्रियों का हुजूम स्टेशन पर खड़ा था। मैंने अपनी सीट संभाल ली। सब्जी मंडी स्टेशन पर इतने अधिक यात्री चढ़ी कि बीसियों यात्रियों को खड़ा रहना पड़ा। कई यात्री दो सीट पर तीन-तीन करके बैठे जा रहे थे।

चहल-पहल

रेल यात्रा पर निबंध के माध्यम से मैं सभी स्टूडेंट्स को प्लेटफॉर्म के अगल बगल का नजारा बताने का प्रयास कर रहा हूँ ,सब्जी मंडी से गाड़ी चली कि एक भक्ति-स्वर सुनाई दिया। यह कोई सूरदास जी थे, जो यात्रियों को गीत सुना कर अपना पेट भरते थे। यात्रियों ने उसका मीठा गीत सुना और बदले में उसे पैसे दिए। अब खिड़की के बाहर हरे-भरे खेतों, पुलों, नदियों, मकानों, रेलवे स्टेशनों की श्रृंखला शुरू हो गयी, जिन्हें मैं रूचि पूर्वक देखता रहा। मुझे सब कुछ भा रहा था। यह सब मेरे लिए नया था। सोनीपत स्टेशन पर सैंकड़ों यात्री उतर गए। इससे गाड़ी में फिर पर्याप्त जगह बन गयी। गाड़ी में खाने-पीने का सामान बेचनेवाले, जूते-पालिश करनेवाले, भीख माँगनेवाले, खिलौने बेचनेवाले आ जा रहे थे।

जहाँ जिस स्टेशन पर गाड़ी रुकती थी, वहीं चहल-पहल शुरू हो जाती थी। चाय, बोतल, पुस्तकें, पकौड़े आदि बेचने वाले अधीर हो उठते थे। इस सारी चहल-पहल में कब पानीपथ, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला आकर चला गया, मुझे पता ही न चला। मेरा ध्यान तो तब टूटा, जब पिताजी ने कहा-बेटा जल्दी चलो, जूते पहनो, स्टेशन आ गया है। मेरी वह प्रथम रेल-यात्रा आज भी मुझे स्मरण है। वह यात्रा सुखद थी।

प्लेटफार्म में मिलने वाली सुविधाएँ

रेल यात्रा पर निबंध के माध्यम से जानेंगे प्लेटफार्म में मिलने वाली सुविधाएँ के बारे में

  • सभी बोगियों में यात्रियों को बैठने के लिए अच्छी सीट की व्यवस्था
  • लाइट की सुविधाएं
  • पंखे की सुविधाएं
  • लेडीज और जेन्स सीट की अलग व्यवस्था
  • लेडीज और जेन्स के लिए अलग बाथरूम की सुविधा
  • यात्रियों के खाने के लिए कैंटीन की सुविधा
  • चार्जिंग सुविधा
  • पुलिस व्यवस्था
  • प्लेटफॉर्म पर पानी की सुविधा
  • प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को ठहरने के लिए विश्राम गृह की सुविधा
  • प्लेटफॉर्म पर अलग से बाथरूम की सुविधा
  • चिकित्सा सुविधा
  • और अन्य कई सारी सुविधाएँ

उपसंहार

रेल गाड़ी की यात्रा कई मायनों में बहुत खास होती है। हमें नयी-नयी विशेष जगहों को देखने का मौका मिलता है, वहीं बहुत कुछ हमें वहाँ के बारे में सीखने को भी मिलता है। जैसा कि हम सभी लोग जानते है कि हमारा देश भारत विभिन्नताओं से भरा पड़ा है। इस प्रकार की बात कही जाती है कि हमारे यहां कदम कदम पर वाणी और पानी बदलते रहता है। हमारे देश भारत की कई सारी भाषा, रीति रिवाज,पहचान और संस्कृतियों के बारे में जानने और उन्हें नजदीक से समझकर या महसूस करआनंद लेने का मजा ही अलग होता है।

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