मेरी प्रिय पुस्तक ‘रामचरितमानस’

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परिचय

मेरी प्रिय पुस्तक के इस निबंध में हमारे जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं । वे समय-समय पर एक अच्छे दोस्त व गुरु की भूमिका निभाती हैं । हर किसी मनुष्य को जीवन में सफलता दिलाने में पुस्तक का बहुत बड़ा योगदान होता है ।

‘रामचरितमानस’ मेरी सबसे प्रिय पुस्तक है, क्योंकि यह एक कहानी संग्रह ही नहीं है बल्कि उनसे अधिक व्यक्ति को दर्शन के साथ ही अच्छा चरित्र निर्माण हेतु सभी गुण विद्‌यमान हैं । इस पुस्तक में अयोध्या के राजा श्रीराम के जीवन चरित्र को दर्शया गया है, जिन्हें सब हिंदूजन भगवान का अवतार भी मानते हैं

  • भमिका,
  • विषय वस्तु,
  • उपयोगिता,
  • उपसंहार


भमिका-

 मुझे मेरी प्रिय पुस्तक से अत्याधिक प्रेम है। पुस्तकें मेरे जीवन की सच्ची संगिनी है। यों मुझे अनेक पुस्तकें पसंद हैं, लेकिन जिसने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया, वह है तुलसीदास की ‘रामचरितमानस’ | यह वह पुस्तक है, जिसकी छाप मेरे जीवन के प्रत्येक व्यवहार पर अंकित है।


मेरी प्रिय पुस्तक विषय वस्तु- 

मेरी प्रिय पुस्तक ‘रामचरितमानस’ में दशरथ-पुत्र राम की जीवन-कथा का वर्णन है। इसमें राम के जन्म, शिक्षण, विवाह, वनवास, सीता-हरण, रावण-संहार और राजतिलक का अत्यंत सजीव, स्वाभाविक और सुंदर वर्णन हुआ है। श्रीराम के जीवन की प्रत्येक लीला मन को भाने वाली है। उन्होंने किशोर अवस्था में ही राक्षसों का वध और यज्ञ-रक्षा का कार्य जिस कुशलता से किया है,

वह मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उनकी वीरता और कोमलता के सामने मेरा हृदय श्रद्धा से झुक जाता है। सीता-स्वयंवर के दृश्य में रावण, अन्य राजागण तथा परशुराम का व्यवहार अत्यंत रोचक है।  रामचरितमानस में मार्मिक स्थलों का वर्णन तल्लीनता से हआ है।

राम-वनवास, पसरय-मरण, सीता-हरण, लक्ष्मण रेखा, भरत-मिलन आदि के प्रसंग दिल को छून वाले हैं। इन अवसरों पर मेरे नयनों में आँसुओं की धार उमड़ आती है। विशेष रूप से राम और भरत का मिलन हृदय को छूने वाला है। 

उपयोगिता-

 इस पुस्तक में तुलसीदास ने मानव के आदर्श व्यवहार को अपने वाक जीवन में साकार होते दिखाया है। राम मर्यादा पुरूषोत्तम हैं। वे आदर्श पा, आदर्श पुत्र, आदर्श पति और आदर्श भाई हैं। भरत और लक्ष्मण आदर्श
भाई हैं। उनमें एक-दूसरे के लिए सर्वस्व त्याग की भावना प्रबल है। सील आदर्श पत्नी है। हनुमान आदर्श सेवक है। पारिवारिक जीवन की मधुरताका जैसा सरस वर्णन इस पुस्तक में है, वैसा अन्यत्र कहीं नहीं मिलता। 

उपसंहार

 यह पुस्तक केवल धार्मिक महत्त्व की नहीं है। इसमें मानव को प्रेरणा देने की असीम शक्ति है। इसमें राजा, स्वामी, दास, मित्र, पति, नारी स्त्री पुरूष सभी को अपना जीवन उज्ज्वल बनाने की शिक्षा दी गई है। राजा के बारे में उनका वचन है


जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी।

सो नृप अवस नरक अधिकारी।

इसी भाँति श्रेष्ठ मित्र के गुणों का वर्णन करते हुए वे कहते हैं –

निज दुख गिरि सम रज करि जाना।

मित्रक दुख-रज मेरू समाना।

जे न मित्र दुख होहिं दुखारी।

 तिन्हहिं विलोकत पातक भारी ।। 


तुलसीदास ने प्रायः जीवन के सभी पक्षों पर सूक्तियाँ लिखी हैं। उनके इन अनमोल वचनों के कारण यह पुस्तक अमरता को प्राप्त हो गई है। रामचरितमानस की भाषा अवधी है। इसे दोहा-चौपाई शैली में लिखा गया है। इसका एक-एक छंद रस और संगीत से परिपूर्ण है। इसकी रचना को लगभग 500 वर्ष हो चुके हैं। फिर भी आज इसके मधुर पद कंठ से गाए जाते हैं। यही इसकी महिमा और मधुरिमा का प्रमाण है।

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