महिलाओं की स्थिति में सुधार पाठ 8 लघु उत्तरीय प्रश्न, Ncert Solution For Class 8th history

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महिलाओं की स्थिति में सुधार पाठ 8 लघु उत्तरीय प्रश्न | Ncert Solution For Class 8th history के इस पोस्ट में सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पोस्ट के माध्यम से कक्षा आठ में पढ़ रहे सभी विद्यार्थियों के लिए पाठ से जुड़े हर महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न जो परीक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं, उन सभी प्रश्नों को इस पोस्ट पर प्रभाव किया गया है, जो पिछले कई परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं, इसलिए इस पोस्ट में दिए गए जितने भी प्रश्न है, उन सभी प्रश्नों की आंसर को ध्यान से पढ़ें ताकि आपकी परीक्षा की तैयारी और भी अच्छी हो सके-

महिलाओं की स्थिति में सुधार पाठ 8 लघु उत्तरीय प्रश्न, Ncert Solution For Class 8th history

महिलाओं की स्थिति में सुधार पाठ 8 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
महिलाओं की स्थिति में सुधार पाठ 8 लघु उत्तरीय प्रश्न
महिलाओं की स्थिति में सुधार पाठ 8 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

19 वीं शताब्दी में लोग लड़कियों को स्कूल जाने से क्यों मना कर रहे थे?
उत्तर-19 वीं शताब्दी में लोगों में आम धारणा यह बैठ गई थी कि अगर लड़कियाँ स्कूल जाने लगेंगी, तो वह घरेलू कामकाज में ध्यान नहीं देंगी।

स्कूल जाने के क्रम में उन्हें सार्वजनिक स्थलों से होकर गुजरना पड़ता है। लोगों की धारणा थी कि इस तरह आने-जाने से लड़कियाँ बिगड़ जायेंगी। वैसे माता-पिता जिनके विचार संकीर्ण नहीं थे, उन्होंने घरों में ही लड़कियों को पढ़ाने के लिए व्यवस्था की।

2 केशव चंद्र सेन ने बाल विवाह रोकने के लिए क्या प्रयास किये?
उत्तर-भारतीय समाज में बाल-विवाह महिलाओं के विकास में एक रोधक बना। कम उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती थी। अलग-अलग क्षेत्रों में विवाह की उम्र भिन्न-भिन्न निर्धारित
थी।

जैसे- बड़ौदा राज्य में 1901 ई० में विवाह के लिए लड़के-लड़कियों की उम्र क्रमशः 16 एवं 12 निर्धारित थी। केशव चन्द्र सेन के प्रयासों से 1872 ई० में देसी बाल-विवाह अधिनियम पारित हुआ। जिसमें बाल-विवाह पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था की गई।

3 प्राचीन काल में महिलाओं की सामाजिक स्थिति कैसी थी?
उत्तर-प्राचीन काल में महिलाओं की सामाजिक स्थिति काफी बेहतर थी। हड़प्पा सभ्यता के काल में समाज मातृसत्तात्मक था। ऋग्वैदिक काल में भी स्त्रियों की स्थिति सम्मानजनक थी। वे
अपने पति के साथ यज्ञ कार्यों में सम्मिलित होती एवं दान दिया करती थी। पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था।

स्त्रियाँ भी शिक्षा ग्रहण करती थी। ऋग्वैदिक काल में लोपामुद्रा, घोषा, सिकता, अपाला जैसी विदुषी स्त्रियों का जिक्र मिलता है। विवाह न करने की स्थिति में यदि पुत्री पिता के घर में ही रहती है, तो वह पिता की संपत्ति में हिस्सेदार होती थी। सामान्यतः समाज में एक पत्नी प्रथा का ही प्रचलन था, लेकिन उत्तर वैदिक काल आते-आते अंतर्वीय विवाह, बहुविवाह, दहेज प्रथा आदि का प्रचलन हो गया।

स्त्रियों की दशा ऋग्वैदिक काल की तुलना में अच्छी नहीं रह गई थी। कई ग्रंथों में कन्याओं के जन्म की निंदा की गई। वहीं, पुत्र को परिवार का रक्षक बताया गया। गुप्तकाल के साहित्य और कला में नारी का आदर्श रूप झलकता है, पर व्यापारिक दृष्टि में उनका स्थान गौण था। पति के मरने पर पत्नी को सती होने के लिए प्रेरित किया जाता था।

4 पंडिता रमाबाई पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-पंडिता रमाबाई- संस्कृत के महान विदुषी पंडिता रमाबाई ने महिलाओं की दुर्दशा पर एक किताब लिखी जिसमें उन्होंने कहा कि हिन्दु धर्म महिलाओं का दमन करता है। उन्होंने यह
भी कहा कि ससुराल वाले महिलाओं के साथ अत्याचार करते हैं।

उन्होंने पूना में एक विधवा गृह की स्थापना की जिसमें अत्याचार सहने वाली महिलाओं को ऐसी चीजें सिखाई जाती थी जिससे वे अपनी रोजी-रोटी चला सके। jac board