लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 लघु उतरीय प्रश्न। Ncert Solution For Class 9th Civics

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लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 लघु उतरीय प्रश्न, Ncert Solution For Class 9th Civics के इस पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी विद्यार्थियों को पाठ से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए मिलेगा इस ब्लॉग पोस्ट पर जो भी प्रश्न अंकित है, वह काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस तरह के प्रश्न पिछले की परीक्षाओं में भी पूछे जा चुके हैं ,इसलिए इस पोस्ट को कृपया करके पूरा पढ़ें जिसे आप की परीक्षा की तैयारी और भी अच्छी हो सके-

लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 लघु उतरीय प्रश्न के उत्तर Ncert Solution For Class 9th Civics

लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 अति लघु उतरीय प्रश्न के उत्तर
लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 लघु उतरीय प्रश्न के उत्तर
लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 दीर्घ उतरीय प्रश्न के उत्तर

1 लोकतंत्र में हमें अधिकारों की आवश्यकता क्यों रहती हैं ?
उत्तर-(क) एक लोकतंत्र में अधिकार विशेष भूमिका रखता है। अधिकार अल्पसंख्यकों के दमन से रक्षा करते हैं।
(ख) अधिकार यह सुनिश्चित करते हैं कि अधिसंख्यक लोग अल्पसंख्यकों पर जुल्म न कर सकें। सरकार को ऐसी दशाओं में नागरिक अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। कभी-कभी चुनी गई सरकारें भी ऐसी दशाओं में नागरिक अधिकारों का दमन करने लगती हैं

या उन्हें अधिकार नहीं दिला पायी हैं। यही कारण है कि कुछ अधिकारों को इतना ऊँचा रखने की आवश्यकता पड़ती है कि सरकार उनका उल्लंघन न कर सके। सभी लोकतंत्र व्यवस्थाओं में नागरिकों के अधिकार संविधान में उल्लिखित रहते हैं ।

2 अधिकारों को मूल क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-भारतीय संविधान के तीसरे अध्याय (अनुच्छेद 12-35) में नागरिकों के मूल (मौलिक) अधिकारों का वर्णन किया गया है। इन अधिकारों को मूल अधिकार इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये अधिकार मनुष्य की उन्नति तथा विकास के लिए आवश्यक माने जाते हैं। इनके प्रयोग के बिना कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की उन्नति नहीं कर सकता। ये अधिकार देश में सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना में सहायता करते हैं।

3 शोषण के विरुद्ध अधिकार से क्या समझते है ?
उत्तर-संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 के अनुसार नागरिकों को शोषण के विरुद्ध अधिकार दिया गया है।

अनुच्छेद-23 के अनुसार मनुष्यों को खरीदना बेचना तथा बेगार पर रोक लगा
दी गई है। अनुच्छेद-24 के अनुसार 14 वर्ष अथवा उससे कम आयु वाले बच्चे को किसी
कारखाने अथवा खान में नौकरी पर नहीं लगाया जा सकता।

4 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार क्या है ?
उत्तर-संविधान के अनुच्छेद 25 से लेकर 28 तक नागरिकों के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन किया गया है। इसके अनुसार सभी नागरिकों को अपनी इच्छानुसार किसी भी धर्म को मानने तथा उसका प्रचार करने का अधिकार है। इसके लिए उन्हें अपनी धार्मिक संस्थाएँ स्थापित करने तथा उनका प्रबन्ध करने का अधिकार है।

5 संस्कृति और शिक्षा-संबंधी अधिकार का वर्णन करें।
उत्तर-इस मूल अधिकार के अन्तर्गत नागरिकों के प्रत्येक समूह को जो भारत की भूमि पर रहता है तथा जिसकी अपनी निश्चित भाषा, लिपि तथा संस्कृति है, अपनी भाषा, लिपि तथा संस्कृति को सुरक्षित रखने का पूर्ण अधिकार है।

इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि किसी भी राजकीय अथवा राज्य से आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाली शिक्षा-संस्था में किसी भी विद्यार्थी को केवल उसके धर्म, जाति तथा भाषा आदि के आधार पर प्रवेश पाने से नहीं रोका जाएगा।

(अनुच्छेद-29) अनुच्छेद-30 के अनुसार धर्म अथवा भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी इच्छा के अनुसार शिक्षा-संस्थाएँ स्थापित करने तथा उन्हें चलाने का अधिकार होगा। इस अनुच्छेद में यह भी कहा गया है

कि राज्य द्वारा शिक्षा संस्थाओं को आर्थिक सहायता देते समय उनके साथ इस आधार पर किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं किया जाएगा कि वह अल्पसंख्यकों के प्रबन्ध के अधीन हैं।

लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 Ncert Solution For Class 9th Civics

6 ‘समानता का सिद्धांत सामाजिक जीवन को विस्तार देता है।’ व्याख्या करें।
उत्तर-(क) संविधान सामाजिक विभेद के एक उग्र स्वरूप का उल्लेख करता है। यह उग्र रूप अस्पृश्यता है अतः सरकार को इनका उन्मूलन करने के निर्देश दिए गए हैं।

(ख) प्रत्येक प्रकार की अस्पृश्यता को निषिद्ध ठहराया गया है। यहाँ पर अस्पृश्यता का अर्थ कतिपय जाति के लोगों को स्पर्श न करने देना नहीं है। इसमें ऐसे सामाजिक व्यवहार और सभी तरह की मान्यताओं को भी सम्मिलित किया जाता है जो कतिपय जाति में जन्म लेने के आधार पर लोगों को तुच्छ मानती है।

(ग) ऐसा व्यवहार सार्वजनिक स्थलों पर अन्य लोगों के साथ अनुक्रिया करने या उनमें प्रवेश करने से कुछ जाति के लोगों को रोकता है और उन्हें समानता का दर्जा नहीं देता है। इन्हीं कारणों से संविधान ने अस्पृश्यता को दण्डनीय अपराध बनाया है।

7 समानता का अधिकार हमारे समाज के लिए क्यों आवश्यक है ?
उत्तर– समानता का अधिकार हमारे समाज के लिए निम्न कारणों से आवश्यक है-
(क) हमारे समाज में ऊँच-नीच और स्त्री-पुरुष का भेदभाव था, इस अधिकार के द्वारा यह भेदभाव समाप्त हो गया।

(ख) हमारे समाज में हरिजनों की दशा बड़ी सोचनीय थी, इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर नहीं जाने दिया जाता था। उनसे छुआछूत का व्यवहार होता था। इस अधिकार के द्वारा यह भेदभाव समाप्त कर दिया गया है।

8 अधिकारों को देश के संविधान में लिखने की क्या आवश्यकता है?
उत्तर-अधिकारों को देश के संविधान में मुख्य स्थान दिया गया है क्योंकि इन्हीं अधिकरों को प्राप्त करने के लिये हमारे राष्ट्रीय नेता सारा जीवन-भर ब्रिटिश सरकार से लड़ते रहे।

इन अधिकारों को हमारे संविधान में इसलिए लिख दिया गया ताकि कोई भी सरकार इन अधिकारों को स्थगित करने या उनसे कोई छेड़खानी करने का प्रयत्न न कर सके। यदि कोई सरकार ऐसा करने का प्रयत्न करती है तो कोई भी नागरिक न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

9 अपनी सरकार के संबंध में सऊदी अरब नागरिकों की क्या स्थिति है ?
उत्तर-(क) इस देश पर वंशानुगत राजा का शासन है तथा उनके चुनाव या उन्हें बदलने में जनता की कोई भूमिका नहीं है।
(ख) राजा द्वारा ही विधायिका तथा कार्यपालिका के सदस्यों को मनोनीत किया जाता है। वह न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है तथा उनके किसी भी फैसले को बदल सकता है।
(ग) नागरिक किसी भी राजनीतिक दल अथवा संगठन का निर्माण नहीं कर सकते हैं। मीडिया कोई भी ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित नहीं कर सकती जो राजशाही को पसंद नहीं है।
(घ) वहाँ पर धर्म की स्वतंत्रता नहीं है। प्रत्येक नागरिक के लिये मुस्लिम होना अनिवार्य है। गैर-मुस्लिम निवासी अपने धर्मों का पालन व्यक्तिगत रूप कर सकते हैं किन्तु सार्वजनिक रूप से जन-सामान्य के बीच नहीं।
(ङ) महिलाओं पर कई तरह के सार्वजनिक प्रतिबंध लगाए गए हैं। एक पुरुष की गवाही दो महिलाओं की गवाही के तुल्य मानी जाती है।

लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 Polity Class 9 Chapter 6 NCERT

10 संविधान अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों को क्यों विनिर्दिष्ट करता है ?
उत्तर-(क) भिन्न भाषा या संस्कृति वाले प्रत्येक नागरिक समुदाय को उसका संरक्षण करने का अधिकार है।
(ख) सरकार द्वारा अनुरक्षित किसी शैक्षिक संस्थान में प्रवेश लेने का सरकारी सहायता पाने से किसी भी नागरिक को इस आधार पर बाधित नहीं किया जा सकता है कि उसका धर्म या भाषा भिन्न है।
(ग) सभी अल्पसंख्यकों को शैक्षिक संस्थानों को अपनी पसंद से खोलने और जनकी व्यवस्था करने का अधिकार है। यहाँ पर अल्पसंख्यक का अर्थ केवल राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक अल्पसंख्यक नहीं है। कुछ स्थलों में भाषा विशेष को बोलने वाले लोग कम होते हैं।

जैसे- आंध्र प्रदेश तेलुगु बोलने वाले लोग अधिक हैं लेकिन इसके पड़ोसी राज्य कर्नाटक में तेलुगु भाषियों की संख्या कम हैं। पंजाब में सिख पंथ के लोग अधिक हैं लेकिन राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में उनकी संख्या कम है। इन सभी के द्वारा अपनी अपनी भाषा और धर्म का स्वतंत्रता से पालन किया जा सकता रहा है।

11 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर-(क) यह कानून द्वारा 1993 में स्थापित एक स्वतंत्र आयोग है। न्यायपालिका की तरह ही आयोग भी सरकार के हस्तक्षेप से पूर्णतः मुक्त है। इस आयोग की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं और इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, ऑफिसरों तथा देश के संभ्रांत और प्रतिष्ठित नागरिक रहते हैं। यह न्यायालय के मामलों पर विचार नहीं करता है।

यह मानव अधिकार का उल्लंघन होने पर पीड़ित व्यक्तियों की सहायता करता है। संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए सभी अधिकार इसकी अधिकारिता के अन्तर्गत आते । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिपादित उन समस्त अंतर्राष्ट्रीय संधियों में वर्णित मानव अधिकार भी आते हैं जिन पर भारत सरकार ने अपने हस्ताक्षर किए हैं।

(ख) यह आयोग दोषी को स्वयं दण्डित नहीं कर सकता है। दण्ड देने की अधिकार न्यायालयों के पास ही है। यह मानव आयोग अधिकारों का हनन होने के सभी मामलों की स्वतंत्र और विश्वस्तरीय जाँच करता है। यह ऐसे हनन में किसी सरकारी अधिकारी के संलिप्त रहने अथवा इस पर नियंत्रण लगाने की जाँच भी करता है तथा देश में मानव अधिकारों को प्रोन्नत करने के अन्य सामान्य उपायों को लागू करता है।

(ग) आयोग अपनी जाँच और संस्तुति सरकार के समक्ष प्रस्तुत करता है। इसको जाँच करने की विस्तृत शक्तियाँ प्राप्त हैं। किसी न्यायालय की तरह यह गवाहों को बुला सकता है, किसी सरकारी अधिकारी से प्रश्न पूछ सकता है, किसी सरकारी दस्तावेज की माँग कर सकता है, निरीक्षण के लिए किसी कारागार में जा सकता है या अपने दल को मामले की प्रत्यक्ष
जाँच करने के लिए भेज सकता है।

12 भारत के नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों को सूचीबद्ध करें।
उत्तर-भारत के नागरिकों को निम्नांकित छ: मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं-
(क) समानता का अधिकार,
(ख) स्वतंत्रता का अधिकार,
(ग) शोषण के खिलाफ अधिकार,
(घ) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार,
(ङ) सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बन्धी अधिकार,
(च) शैक्षिक और सांस्कृतिक अधिकार ।

13 स्वतंत्रता के अधिकार के अनुसार नागरिकों को कौन-कौन सी छः प्रकार की स्वतंत्रताएँ प्रदान की गयी हैं ?
उत्तर– स्वतंत्रता के अधिकार के अनुसार नागरिकों के निम्न छ: प्रकार की स्वतंत्रताएं प्रदान की गयी हैं-
(क) भाषण तथा विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
(ख) शांतिपूर्वक तथा बिना शास्त्रों के सभा करने की स्वतंत्रता।
(ग) समुदाय या संघ बनाने की स्वतंत्रता।
(घ) सारे भारत में भ्रमण की स्वतंत्रता।
(ङ) भारत के किसी भाग में निवास करने या बस जाने की स्वतंत्रता।
(च) कोई कारोबार या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता।

14 एक नागरिक को ‘स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर-स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग करते समय एक नागरिक को निम्नांकित बातों का ध्यान रखना चाहिए-
(क) वह सावधानी से स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग करें ।
(ख) वह कोई भी ऐसा विचार व्यक्त न करें जिसमें किसी को हानि हो।
(ग) वह दूसरों के विचारों का आदर-सम्मान करें

15 राजनीतिक समानता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-राजनीतिक समानता से हमारा अभिप्राय यह है कि प्रत्येक नागरिक को बिना जाति, धर्म, रंग, लिंग, क्षेत्र, भाषा आदि के भेदभाव के सभी राजनैतिक अधिकार बराबर प्राप्त हों। जैसे मताधिकार, दल निर्माण का अधिकार, राजनैतिक दल की सदस्यता ग्रहण करने की स्वतंत्रता, आने-जाने की स्वततंत्रता, सरकार भागीदारी बनने का अधिकार आदि। राजनीतिक समानता के बिना लोकतंत्र की कल्पना संभव नहीं है।

16 धर्म निरपेक्ष राज्य का क्या अर्थ है ?
उत्तर-धर्म निरपेक्ष राज्य का अर्थ वह राज्य (देश) जिसमें हैं-
(क) सरकार का अपना कोई धर्म नहीं होता,
(ख) सरकार धार्मिक मामलों में दखल नहीं देती.
(ग) देश के नागरिक धर्म के मामले में स्वतंत्र होते हैं,
(घ) सरकारी पदों पर नियुक्ति के समय धर्म को आधार नहीं बनाया जाता है।

लोकतांत्रिक अधिकार पाठ 6 Ncert Notes For Class 9th Civics 

17 भारत में महिलाओं तथा बच्चों के संरक्षण के लिये बनाये किन्हीं तीन प्रमुख संवैधानिक उपबन्धों का वर्णन करें।
उत्तर-भारत में महिलाओं तथा बच्चों के संरक्षण के लिये बनाये गये तीन प्रमुख संवैधानिक उपबन्ध इस प्रकार है-
(क) समता के अधिकार के अन्तर्गत, अनुच्छेद 15 में यह व्यवस्था की गई है कि राज्य स्त्रियों तथा बालकों के लिये कोई भी विशेष उपबन्ध बना सकता है।
(ख) शोषण के विरुद्ध अधिकार के अन्तर्गत, अनुच्छेद 24 में यह व्यवस्था की गई है कि मानव (विशेषकर स्त्रियों और बालकों) से दुर्व्यवहार करने वाला विधि के अनुसार दंडनीय होगा।
(ग) शोषण के विरुद्ध अधिकार के अन्तर्गत अनुच्छेद 24 में यह व्यवस्था की गई है कि 14 वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिये नियोजित नहीं किया जायेगा या किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में नहीं लगाया जायेगा।

18 नागरिकों के आर्थिक अधिकारों से सम्बन्धित राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों का वर्णन करें।
उत्तर-(क) राज्य अपनी आर्थिक सामर्थ्य और विकास की सीमाओं के भीतर कार्य पाने के और बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निःशक्ता आदि की दशाओं में लोक सहायता पाने के अधिकार को प्राप्त कराने का प्रभावी उपबंध करेगा।
(ख) राज्य उपयुक्त विधान या आर्थिक संगठन द्वारा या किसी अन्य रीति से कृषि के उद्योग के या अन्य प्रकार के सभी कर्मकारों को निर्वाह-मजदूरी के अवसर प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।

19 मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के मध्य अंतर स्पष्ट करें। अथवा, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत मौलिक अधिकारों से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर- नीति निर्देशक सिद्धांतों तथा मौलिक अधिकारों में निम्न अंतर पाए जाते हैं-
(क) संविधान के द्वारा मौलिक अधिकार नागरिकों को दिए गए हैं परन्तु नीति निर्देशक सिद्धांत केन्द्र तथा राज्य सरकारों के मार्गदर्शन के लिए आदेश मात्र होते हैं।
(ख) मौलिक अधिकारों के पीछे कानूनी शक्ति है परन्तु नीति-निर्देशक सिद्धांतों के विषय में ऐसा नहीं है।
(ग) मौलिक अधिकारों का उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करना है जबकि नीति निर्देशक सिद्धांतों का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है।
(घ) मौलिक अधिकारों को पूरा करने के लिए राज्य को बाध्य किया जा सकता है, लेकिन नीति-निर्देशक तत्वों के लिए नहीं।

20 सरकार के प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व है?
उत्तर-सरकार हमारी सुरक्षा और भलाई के लिए अनेक कार्य करती है इसलिए हमारे सरकार के प्रति भी उत्तरदायित्व बन जाता है।
(क) हमें सरकार द्वारा बनाये गए कानूनों का पालन करना चाहिए। ऐसा करके हम शान्ति एवं व्यवस्था के निर्माण में अपना बड़ा योगदान दे सकते हैं।
(ख) हमें सरकार द्वारा लगाये गए करों को भी सहर्ष अदा करना चाहिए। इसी धन से ही सरकार देश में शासन को चलाती है।
(ग) हमें देश के अन्दर शान्ति तथा व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए। Jac Board 

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