लोकतंत्र के परिणाम पाठ 7 दीर्घ उत्तरीय पश्न | Ncert Solution For Class 10th Civics

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लोकतंत्र के परिणाम पाठ 7 दीर्घ उत्तरीय पश्न | Ncert Solution For Class 10th Civics के महत्वपूर्ण क्वेश्चन आंसर में आप सभी छात्र – छात्राओं का स्वागत है, इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से आपको इस पाठ से संबंधित सभी महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का उत्तर सरल एवं विस्तार से कवर किया गया है, जो पिछले कई परीक्षाओं में इस तरह के प्रश्न पूछे जा चुके हैं, यदि आप अपनी तैयारी को अच्छी बनाना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को एक बार जरूर पूरा पढ़ें आपको जरूर पसंद आएगा तो चलिए शुरू करते हैं |

लोकतंत्र के परिणाम पाठ 7 दीर्घ उत्तरीय पश्न के उत्तर Ncert Notes

लोकतंत्र के परिणाम पाठ 7 दीर्घ उत्तरीय पश्न के उत्तर
लोकतंत्र के परिणाम पाठ 7 लघु उत्तरीय पश्न के उत्तर
लोकतंत्र के परिणाम पाठ 7 अति लघु उत्तरीय पश्न के उत्तर
1 लोकतंत्र किन परिस्थितियों में सामाजिक विविधता को संभालता है और उनके बीच सामंजस्य बैठाता है ?
उत्तर-विश्व भर में कोई एक ऐसा देश नहीं जहाँ धर्म, जाति, भाषा या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव न हो। परन्तु यह केवल लोकतंत्र में ही सम्भव है कि हर प्रकार की विविधताओं और विभिन्नताओं में आपसी सामंजस्य पैदा किया जाता है।
(क) यह लोकतंत्र में ही सम्भव है कि विभिन्न भाषा बोलने वाले लोगों को भी अपनी भाषा विकसित करने का मौका दिया जाता है। हर भाषा के लोग अपने निजी स्कूल खोल सकते हैं और अपनी-अपनी भाषा को प्रोत्साहन दे सकते हैं।
दिल्ली में कई तमिल स्कूल हैं, उर्दू भाषा में शिक्षा देने वाले स्कूल हैं, पंजाबी तथा अन्य भाषाओं में शिक्षा देने वाले स्कूल हैं। सब मिलकर प्यार से शिक्षा कार्य कर रहे हैं।
(ख) लोकतंत्र में ही यह सम्भव है कि यहाँ हर आर्थिक तबके के लोगों को बराबर का वोट का अधिकार है, उसमें अमीरी गरीबी का कोई अन्तर नहीं रखा जाता।
(ग) यह लोकतंत्र में ही सम्भव है कि पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी बराबर का वोट का अधिकार है और महिलाओं को अपने व्यवसाय चुनने का पूर्ण अधिकार है।
(घ) यह लोकतंत्र में ही सम्भव है कि हर धर्म के लोग अपने धर्म-स्थान बना सकते हैं और अपने ही ढंग से पूजा पाठ कर सकते हैं। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में हर धर्म के विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा दी जाती है और सरकारी नौकरियों में किसी से कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
(ड) लोकतंत्र ही यह सम्भव बनाता है कि किसी भी जाति के लोग किसी भी धर्म के लोग बसों, रेलगाड़ियों आदि में इकट्ठे सफर कर सकते हैं और होटलों में या किसी भी स्थान पर रुकने में कोई पाबन्दी नहीं है।
(च) लोकतंत्र ही यह सम्भव बनाता है कि बहुदल के लोग अल्पदल के साथ मिलकर चलते हैं और दोनों एक दूसरे की भावनाओं की कदर करते हैं।
2 गैर-लोकतांत्रिक सरकारों के कुछ समान लक्षण लिखें।
उत्तर- गैरलोकतांत्रिक सरकारों, जैसे- म्यांमार नाइजीरिया, पाकिस्तान, चीन आदि सरकारों के कुछ सामान्य लक्षण निम्नांकित हैं-
(क) गैर-लोकतांत्रिक सरकारों में लोग सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना नहीं कर सकते, ऐसा करने पर उन्हें कई यातनाएँ दी जाती है, और जेल तक में धकेल दिया जाता है।
(ख) गैर-लोकतांत्रिक सरकारों में शासनकर्ता, चाहे वह राजा हो या सैनिक प्रमुख, सर्वेसर्वा होता है।
(ग) गैर-लोकतांत्रिक सरकारे या देशों में विरोधी दलों का कोई स्थान नहीं होता। वहाँ केवल वही राजनीतिक दल टिक सकता है जो सरकार की हाँ में हाँ मिलाने वाले हों।
(घ) गैर-लोकतांत्रिक सरकारों में मजदूरों और कारीगरों को संघ बनाने की कोई अनुमति नहीं होती। केवल ऐसे संगठन ही वहाँ पनप सकते हैं जो सरकार की नीतियों का अनुमोदन करने वाले हों।
(ङ) गैर-लोकतांत्रिक देशों में सभी लोग राजा और सैनिक नेता के रहमोकरम पर होते हैं। वे जब चाहे उन्हें कोई भी दण्ड दे सकते हैं, पकड़कर जेल भी भेज सकते हैं।
(च) गैर-लोकतांत्रिक देशों में एक साधारण नागरिक अपने बलबूते पर किसी भी उच्च स्थान को प्राप्त नहीं कर सकता। यदि वह अपनी जमीर को मार ले और हाँ में हाँ मिलाता जाए तो वह कुछ भी प्राप्त कर सकता है।

लोकतंत्र के परिणाम पाठ 7 Ncert Notes

3 लोकतंत्र की मुख्य विशेषताएं क्या है?
उत्तर- लोकतंत्र की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है –
स्वतंत्रता मानव विकास के लिए आवश्यक है-
लोकतंत्र की मुख्य शक्ति स्वतंत्रता है, स्वतंत्रता के बिना, किसी व्यक्ति का पूर्ण विकास संभव नहीं है, जितनी स्वतंत्रता व्यक्ति को लोकतंत्र में प्राप्त हो सकती है।
उतनी स्वतंत्रता किसी को शासन में नहीं होती। लोकतंत्र में, नागरिकों को विचारों को व्यक्त करने, एक समुदाय का निर्माण करने, सरकार की आलोचना करने और समाचार पत्रों आदि की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
व्यक्ति किसी भी धर्म को स्वीकार करने या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है। लोकतांत्रिक प्रणाली में स्वतंत्रता का अधिकार केवल दिया ही नहीं जाता, बल्कि लोगों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका का भी प्रबंध किया जाता है।
यह समानता के सिद्धांत पर आधारित है-
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का मुख्य सिद्धांत समानता है। इसका मतलब केवल राजनीतिक समानता नहीं है, बल्कि आर्थिक और समाजिक समानता भी है।
लोकतंत्र में जाति, संपत्ति, धर्म या रंग के आधार पर राजनीतिक क्षेत्र में कोई भेदभाव नहीं किया जाता है, बल्कि सभी को विकसित होने के लिए समान अधिकार दिए जाते हैं।
लोकतंत्र के परिणाम में लोगों को राजनीतिक शिक्षा मिलती है-
लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव होते हैं। इन चुनावों को जीतने के लिए, विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव आंदोलन चलाते हैं और अपने दल की नीतियों को घोषित करते है।
उनके नेता शासन की प्रशंसा या आलोचना करते है। जनता अपने प्रतिनिध चुनती है। और शासन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेते है। इन सभी गतिविधियों के माध्यम से जनता को राजनीतिक शिक्षा मिलती है।
लोकतंत्र आम लोगों की भलाई का मनोरथ रखता है-
लोकतंत्र लोगों का, लोगों द्वारा और लोगों के लिए शासन है। लोकतंत्र में, प्रभुसत्ता लोगों के हाथों में होती है। इसलिए जनता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खुद ही शासक होती है। लोकतंत्र का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण जनता की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति है।
लोकतंत्र एक ऐसी प्रणाली है जिसमें कोई व्यक्ति या किसी विशेष वर्ग के कल्याण के लिए प्रशासन चलाया नहीं जाता है, बल्कि संपूर्ण जनता के कल्याण के लिए प्रयास किए जाते हैं।
विदरोह या क्रांति की कोई संभावना नहीं होती –
प्राचीन काल में, जब राजतंत्र होता था, तो इतिहास गवाह है कि कभी-कभी शासन परिवर्तन के दौरान खून-खराबा होता था। लेकिन लोकतंत्र एक ऐसा शाशन है जिसमें अयोग सरकार को बदलने के लिए हिंसक कार्रवाई नहीं की जाती है।
बल्कि लोग मतदान के अधिकार का उपयोग करके शांतिपूर्ण तरीके से सरकार बदल सकते हैं। इस संबंध में, गिलक्रिईस्ट (Gilchrist) ने कहा है कि, “लोकतंत्र सार्वजनिक सहमति का शासन है, इसलिए यह क्रांतिकारी नहीं हो सकता है।
मजबूत और कुशल शासन –
लोकतंत्र का शासन मजबूत और कुशल होता है। लोकतंत्र में, शासकों को जनता का समर्थन प्राप्त होता है, जिसके कारण सरकार अपने निर्णयों को दृढ़ता से लागू करती है। शासन कुशलतापूर्वक शासन चलाते है।
उदारवादी सरकार –
लोकतंत्र में सरकार उदारवादी है जिसके द्वारा देश की बदलती परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक सुधार संभव हो सकते हैं।
देशभक्ति की भावना का विकास –
लोकतंत्र लोगों की अपनी सरकार होती है, अपनी सरकार होने के कारण लोक इसे सफलतापूर्वक चलाने की कोशिश करते हैं, इस तरह लोगो का अपने देश से प्यार बढता हैं ।
और लोग राष्ट्र को अपना राष्ट्र मानते हैं और इसके लिए महान बलिदान करने में संकोच नहीं करते हैं। जे. एस. मिल के कथन के अनुसार, लोकतंत्र लोगों के देश प्यार को बढ़ता है क्योंकि नागरिक यह अनुभव करता है कि सरकार उनकी ही बनाई हुई है और मजिस्ट्रेट उनके मालिक नहीं, सगों सेवक हैं।
नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की सुरक्षा –
लोकतांत्रिक प्रणाली के लोगों को अनेक प्रकार के महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त होते हैं। विचार प्रगट करन, सभा करन, सरकार की आलोचना करन, वोट देन, चुनाव लडने आदि जैसे प्रभावशाली अधिकार केवल लोकतांत्रिक प्रणाली में ही संभव होते है।
क्योंकि शासन उत्तरदाई होता है और शाशक एक निश्चित समय के लिए सीधे जनता द्वारा प्रत्ख रूप में चुने जाते हैं। इसलिए, शासक लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की उलंघना करने की जुहरत नहीं करते हैं।
लोकतांत्रिक प्रणाली में, लोगों के अधिकार और स्वतंत्रताए संरक्षित रहती है। लोगों के अधिकारों की सुरक्षा लिए लोकतंत्र प्रणाली में कानूनी प्रबंध में किए जाते हैं।
यह राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करता है –
किसे एक शासन की श्रेष्ठता केवल शासन प्रबंध, आर्थिक विकास और निष्पक्ष न्याय पर नहीं, बल्कि नागरिक के चरित्र पर भी निर्भर करता है, जो उस शासन की उसारी करते हैं और शासन की रक्षा करते है।
लोकतंत्र की यह विशेषता है कि कोमी चरित्र का गुण नागरिक के भीतर उत्पन्न होता है। लोकतंत्र नागरिक के अंदर ऐसी राष्ट्रीय भावना पैदा करता है कि वह ऐसा कोई कार्य नहीं करते हैं जिससे कि राष्ट्र को हानि पहुंचन की संभावना हो।
जे.एस. मिल के कथन के अनुसार, “लोकतंत्रीय शासन ओर किसी अन्य प्रणाली से राष्ट्रीय चरित्र का अधिक और उच्चतर विकास करता है।
जिम्मेदार सरकार –
एक लोकतांत्रिक प्रणाली में, शासन लोगों की इच्छा के अनुसार चलाया जाता है। जनता सरकार चलाने के लिए एक योग्य प्रतिनिधि चुनती है।
जनता के चुने हुए प्रतिनिधि जनता के विश्वास को ग्रहण करते हैं और जनमत की राय के आधार पर शासन करते हैं। लोगों पर आधारित होने से सरकार में स्थिरता पैदा होती हैं।
जनता के प्रतिनिधियों को इस बात का अहसास होता है कि अगर वे प्रशासन को जनता की इच्छा अनुसार नहीं चलाते हैं, तो उन्हें अगले चुनाव में नहीं चुना जाएगा। यह भी संभव है कि आयोग शासकों को अगले चुनाव से पहले हटा दिया जाए। जनता के चुने हुए प्रतिनिधि जनता के हर काम के प्रति जिम्मेदार होते हैं।
भरातरी की भावना –
सामाजिक समानता और राजनीतिक समानता लोकतांत्रिक प्रणाली की अनिवार्य विशेषताएं हैं। ऐसी शासन प्रणाली में धर्म, जाति, रंग आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है।
कानून के सामने सब लोग समान होते है और सभी को कानून की समान सुरक्षा प्राप्त होती है। ऐसी स्थिति में लोगों के अंदर भरातरी भावना की विकास होना बिलकुल स्वाभाविक है।
कानूनों का अधिक पालन – लोकतंत्र में, जनता के चुने हुए प्रतिनिधि कानून का निर्माण करते है। दूसरे शब्दों में, लोग अपने ही प्रत्ख रूप में बनाए कानूनों के अधीन हैं। यह स्वाभाविक है कि, जनता की इच्छा अनुसार जनता के चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा बनाए कानूनों की आज्ञा का पालन ज्यादा हो। ncert

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