कृषि पाठ 4 भूगोल । NCERT Solution For Class 10th Geography long Question

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कृषि पाठ 4 भूगोल । NCERT Solution For Class 10th Geography long Question के इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से पाठ 5 कृषि से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न जो कई बार परीक्षा में पूछे जा चुके हैं, उन सभी प्रश्नों को इस ब्लॉग पोस्ट में कवर किया गया है, इसलिए इस ब्लॉग पोस्ट को पूरा पढ़ें ताकि आने वाले परीक्षा में अच्छा नंबर लाने में आपको मदद मिल सके ।

कृषि पाठ 4 भूगोल । NCERT Solution For Class 10th के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर 

कृषि पाठ  4 के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
कृषि पाठ 4 के लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
कृषि पाठ 4 के अति लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
1 दिन-प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम हो रही है। क्या आप इसके परिणामों की कल्पना कर सकते हैं?
उत्तर-(क) यह एक सर्वविदित तथ्य है कि दिन-प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम हो रही है, जबकि जनसंख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।
(ख) इसका परिणाम यह होगा कि खाद्यान्नों का गंभीर अभाव हो जाएगा तथा छोटे किसान भूमिहीन मजदूर बन जाएँगे। इससे शहरों पर बोझ बढ़ेगा।
(ग) पशुओं के लिए चारे का अभाव हो जाएगा। कृषि आधारित उद्योगों के समक्ष गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी क्योंकि उन्हें कच्चा माल नहीं मिल सकेगा।
(घ) कृषि अब भी भारत में सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराती है। कृषि के अधीन भूमि के निरन्तर कम होने से बेरोजगारी की समस्या विकट रूप धारण कर सकती है।
(ङ) कृषि योग्य भूमि के कम हो जाने का उद्योगों के विकास पर विशेषकर जो उद्योग कृषि-उत्पादों पर निर्भर करते हैं, बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
(च) व्यापार पर भी इस कृषि योग्य भूमि के कम होने का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
2 कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाएँ।
उत्तर-तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या को पर्याप्त भोजन प्रदान करने के लिए भारतीय कृषि में अनेक सुधार लाए जा सकते हैं। विशेषकर केन्द्र तथा राज्य सरकारें इस दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य कर सकती हैं और कर रही हैं। ये सुधार निम्नांकित हैं-
(क) जमींदारी प्रथा का उन्मूलन– किसानों के लिए जमींदारी प्रथा एक बहुत बड़ा अभिशाप था, इसलिए सरकार ने इस भ्रष्ट जमींदारी प्रथा को समाप्त कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप भूमिहीन काश्तकारों को जमीन के मालिकाना अधिकार दे दिए गए हैं। जमीन के न्यायसंगत और समान वितरण को निश्चित बनाने के लिए जोत की अधिकतम सीमा भी निश्चित की गई है।
जो कोई काश्तकार अपने पास रख सकता है।
(ख) खेतों की चकबन्दी- इससे पहले अधिकतर किसानों के पास छोटे-छोटे और बिखरे हुए खेत होते थे। ऐसी भूमि की जोत प्रायः आर्थिक रूप में अलाभकारी सिद्ध होती थी। इसलिए सरकार ने अत्यधिक सोच-विचार द्वारा इस प्रकार के छोटे और बिखरे हुए खेतों की चकबन्दी की और किसानों को कई प्रकार की अनावश्यक परेशानियों से बचाया।
(ग) प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण- किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए कई बड़ी और छोटी सिंचाई परियोजनाएँ शुरू की गई हैं।
(घ) खाद और उर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहन- सरकार ने कई कारखाने खाद और उर्वरकों के निर्माण के लिए खोले हैं ताकि भूमि की उपजाऊ शक्ति में वृद्धि हो।
(ङ) नए अधिक उपज वाले बीजों का विकास- उत्पादन में वृद्धि के लिए सरकार ने कई प्रकार के अधिक उपज देने वाले बीजों की किस्में विकसित की हैं। इनमें विशेष रूप से गेहूँ के बीज हैं जिनसे इन फसलों की उपज बहुत अधिक बढ़ गई है।
(च) कीड़े-मकोड़ों, फसलों की बीमारियों तथा टिड्डी दलों की रोकथाम- इससे पहले फसलों का एक बड़ा भाग कीड़े-मकोड़ों, टिड्डी दलों और कई प्रकार की बीमारियों से नष्ट हो जाता था। परन्तु अब सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण योजनाएँ शुरू की हैं ताकि पौधों की कीड़े-मकोड़ों, बीमारियों और टिड्डी दलों से रक्षा की जा सके।
(ज) खेती में आधुनिक उपकरणों का प्रयोग- खेती, विशेषकर गेहूँ की खेती में आधुनिक उपकरणों जैसे- ट्रैक्टरों, हार्वैस्टरों, थ्रेशरों आदि के प्रयोग से भी खेती उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। इन आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से न केवल समय की ही बचत हुई है वरन् चोरी-चकारी, आग आदि लगने तथा वर्षा से फसल के खराब होने की सम्भावनाएँ भी बहुत कम हुई हैं।
3 भारत में खाद्य सुरक्षा का विवरण दें।
उत्तर-(क) सभी लोगों के लिए भोजन की उपलब्धता तथा उसे प्राप्त करने के सामर्थ्य को खाद्य सुरक्षा के नाम से जाना जाता है।
(ख) खाद्य सुरक्षा के तीन पहलू हैं- खाद्य पदार्थों की उपलब्धता, खाद्य पदार्थों की सुलभता तथा लोगों के पास खाद्य पदार्थों को प्राप्त करने की सामर्थ्य ।
(ग) भारत में खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली का गठन किया गया है। इसके दो मुख्य आधार हैं-
बफर स्टॉक तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली। ये दोनों घटक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नीति के क्रियान्वयन में मुख्य भूमिका निभाते हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा नीति का उद्देश्य कम कीमत पर खाद्यान्नों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है।
(घ) भारतीय खाद्य निगम किसानों से समर्थन मूल्य पर चावल और गेहूँ प्राप्त करना है, फूड कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया प्राप्त खाद्यान्नों का भंडारण करती है तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से खाद्यान्नों का वितरण सुनिश्चित किया जाता है।

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