किसान और काश्तकार पाठ 6 लघु उत्तरीय प्रश्न |NCERT Solution For Class 9th History

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किसान और काश्तकार पाठ 6 लघु उत्तरीय प्रश्न |NCERT Solution For Class 9th History के इस पाठ में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है , आपको इस पोस्ट पर पाठ से जुड़ी हर महत्त्व पूर्ण परीक्षा उपयोगी सवाल का हल इस ब्लॉग पोस्ट पर अध्ययन करने को मिलेगा , इस लिए इस ब्लॉग पोस्ट को पूरा पढ़े , तो चलिए शुरू करते हैं –

किसान और काश्तकार पाठ 6 लघु उत्तरीय प्रश्न Ncert Solution

1 इंग्लैंड में हुए बाड़ाबंदी आंदोलन के कारणों की संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर- इंग्लैंड में बाडाबंदी आंदोलन में सहायक कारक-
(क) बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ अनाज तथा अन्य वस्तुओं की बढ़ती मांग।
(ख) वस्तुओं की ऊँची कीमतें। कृषि उत्पाद की ऊँची कीमतें ने बाड़ाबंदी को बढ़ावा दिया।
(ग) उन्नीसवीं शताब्दी में बाड़ाबंदी आवश्यक हो गई जिससे लंबे समय तक भूमि में निवेश किया जा सके।
(घ) बाड़ाबंदी ने धनी किसानों को अपने अधिकार में आई भूमि को बढ़ाने का अवसर दिया।
(ङ) इंग्लैंड में आधुनिक कृषि के आगमन से भी बाड़ाबंदी आंदोलन को बढ़ावा मिला। इसमें कृषि विधियों में परिवर्तन आए।
मुक्त भूमि समाप्त हो गई। धनी किसानों ने उत्पादन बढ़ाया तथा लाभ कमाया। छोटे किसानों ने अपनी भूमि धनी किसानों को बेच दी। अंततः बाड़ाबंदी के कारण बड़ी संख्या में गरीब गाँव छोड़ गए। कुछ दक्षिणी देशों की मध्य भूमियों में चले गए तथा कुछ शहरों को पलायन कर गए।
2 इंग्लैंड के गरीब श्रेशिंग मशीनों का विरोध क्यों कर रहे थे ?
उत्तर-साझी भूमियाँ गाँवों वालों के लिये वरदान थीं। गरीब लोगों को इससे अनेक लाभ थे। वे यहाँ से बेर, फल आदि के रूप में भोजन प्राप्त करते थे, अपनी भेड़-बकरियों तथा पशुओं को यहाँ से चारा मिलता था तथा अपने जलाने की लकड़ी भी वे यहाँ से प्राप्त कर लेते थे।
जब बड़े किसानों और जमींदारों ने इस साझी भूमि की बाड़ाबंदी कर ली तो उनका जीवन मुश्किल हो गया। परन्तु जब बड़े किसानों ने और जमींदारों ने श्रेशिंग मशीनें खरीद ली तो उन्हें अपनी नौकरी और रोजगार जाते हुए नजर आने लगा।
इस कारण गरीब जनता-श्रमिकों, खेतिहर मजदूरों और महिलाओं आदि ने इस श्रेशिंग मशीनों का डट कर विरोध किया।

किसान और काश्तकार के प्रश्न उत्तर और नोट्स इतिहास

3 कैप्टेन स्विंग कौन था ? यह नाम किस बात का प्रतीक था और वह किन वर्गों का प्रतिनिधित्व करता था ?
उत्तर-कैप्टन स्विंग एक काल्पनिक नाम था जो गरीब कामगरों द्वारा अपने उन पत्रों में लिखा जाता था जो वे बड़े किसानों एवं जमींदारों को उन द्वारा प्रयोग की जाने वाली श्रेशिंग मशीनों के विरोध में लिखते थे।
सामने तो बड़े किसानों एवं जमींदारों को कुछ कहने की उनकी हिम्मत नहीं थी, इसलिए वे कैप्टन स्विंग के नाम का प्रयोग करके उन्हें धमकी भरे पत्र लिखते थे। वास्तव में इन बड़े किसानों और जमींदारों ने उनका सारा चैन छीन लिया था, साझी जमीन पर उन्होंने अपना अधिकार कर लिया था और नई श्रेशिंग मशीनें लगाकर उन्होंने उनके रोजगार पर लात मार दी थी।
मरता क्या न करता वाली कहावत के अनुसार ये दिन में घुप रहते थे परन्तु रात पड़ते ही ये उन अमीर जमींदारों के फार्म-हाउसों पर आक्रमण कर देते थे, उनके भूसे और अनाज के गोदामों को आग लगा देते थे और मशीनों को भी तोड़-फोड़ डालते थे।
इस प्रकार कैप्टन स्विंग के नाम ने गरीब कामगरों को कानून के शिकंजे से बचाए रखा। 1830 के दशक में इन गरीब कामगरों के ये दंगे अपनी चरम सीमा पर थे। वे इतिहास में स्विंग दंगों के नाम से प्रसिद्ध हुए।
4 अठारहवीं शताब्दी में इंग्लैंड का एक संपन्न किसान खुले-खेत की व्यवस्था को किस दृष्टिकोण से देखता है ? वर्णन करें।
उत्तर-16वीं शताब्दी से ही इग्लैंड के कुछ भाग में खुले खेत और साझी भूमि की अर्थव्यवस्था आरंभ हो गई थी। 16वीं शताब्दी में जब ऊन की कीमतें बढ़ गई तो धनी किसान ऊन के उत्पादन को बढ़ाना चाहते थे जिससे अधिक लाभ कमाया जा सके।
वे इस बात के इच्छुक थे कि उनकी भेड की नस्ल सुधरे तथा उन्हें अच्छ धारा मिले। ये भूमि के अधिक भाग पर अधिकार करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने साझी भूमि को बांटना आरंभ किया तथा अपनी खेती को दूसरों से अलग करने के लिए बाड़ लगा ली।
उन्होंने छोटे ग्रामीणों को जिनकी झोपड़ी साझी भूमि पर थी खदेड़ दिया तथा अन्य लोगों के उसमें प्रवेश करने पर रोक लगा दी।

किसान और काश्तकार questions ans ncert

5 अठारहवीं शताब्दी में इंग्लैंड का एक मजदूर मुक्त भूमि व्यवस्था को किस दृष्टिकोण से देखता है? वर्णन करें।
उत्तर-साझी भूमि की समाप्ति ने श्रमिकों पर बुरा प्रभाव डाला। वे अपनी जीविका के लिए साझी भूमि पर ही निर्भर करते थे। जब बाड़ लगा दी गई तो घेरे वाली भूमि एक भूस्वामी की निजी संपत्ति हो गई।
गरीब लोग वहाँ से अपने ईंधन के लिए लकड़ी इकट्ठी नहीं कर सकते थे और न ही अपने जानवर चरा सकते थे तथा वे लोग उस भूमि से न तो फल इकट्ठे कर सकते थे और न ही जानवरों का शिकार कर सकते थे।
फसल काटने के बाद वे चारा भी नहीं इकट्ठा कर सकते थे। इस प्रकार एक मजदूर को साझी भूमि से अधिकार छिन जाने के बाद कानून से भी कोई राहत नहीं मिली।
6 अठारहवीं शताब्दी में इंग्लैंड का एक खेतिहर स्त्री मुक्त भूमि व्यवस्था को किस दृष्टिकोण से देखता है ? वर्णन करें।
उत्तर-मुक्त भूमि व्यवस्था के अन्तर्गत एक खेतिहर स्त्री अपने पति तथा परिवार के अन्य सदस्यों की सहायता करती थी। वह अपने बच्चों की देखभाल, करना, गाय घराना, ईधन तथा फल इकट्ठा करने जैसे कार्य करती थी। बाडाबंदी आंदोलन ने उसे बुरी तरह प्रभावित किया। उसकी पारिवारिक आय तथा रहन-सहन के स्तर पर प्रभाव पड़ा। वे अधिक गरीब बन गए।
किसान और काश्तकार नोट्स इन हिन्दी
7 भारतीय किसान अफीम की खेती के प्रति क्यों उदासीन थे?
उत्तर- भारतीय किसान अफीम पैदा करने को इसाक नहीं थे। उनकी इस अनिच्छुकता
को 2 अनेक कारण थे जिनमें से कुछ मुख्य निम्नांकित है-
(क) पोरस को जगाने के लिये, जिससे अफीम तैयार होती थी, अच्छी निगरानी और उत्तम भूमि की आवश्यकता पड़ती थी। परन्तु अपनी अच्छी भूमियों पर किसान वाले जगाते थे जिनसे उन्हें काफी आय हो जाती थी। यदि ऐसी उत्तम भूमियों पर पोस्त के पौधे लगाए जाते तो उन्हें घाटा पड़ता था। इसलिए कोई भी किसान अफीम बनाने के लिये तैयार न हुआ।
(ख) बहुत से किसानों की अपनी भूमि नहीं थी। यदि वे बड़े-बड़े जमींदारों से भूमि को ठेके पर लेते थे, तो पोस्त उगाकर उनकी इतनी कमाई नहीं हो सकती थी। ऐसे में वे ठेके की रकम कैसे अदा कर सकते थे। इसलिए वे अफीम तैयार करने में हिचकिचाते थे।
(ग) पोस्त का पौधा एक कमजोर पौधा होता है जिसकी देखभाल करना काफी कठिन कार्य होता था। यदि किसान अपना सारा समय पोस्त का पौधा में, ही लगा में तो उनके पास अपनी अन्य फसलें उगाने के लिये समय ही नहीं बचता था इसलिए भी अफीम तैयार करने में आनाकानी करते थे।
(घ) अफीम तैयार करने के लिये जो किसानों को कीमत दी जाती थी वह भी यात कम थी। इसलिए कोई भी अपनी इच्छा से अफीम तैयार करने के लिये रजामन्द नहीं होता था। JAC Board ranchi

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