खनिज तथा ऊर्जा संसाधन पाठ 5 | भूगोल दीर्घ उत्तरीय प्रश्न Ncert Solution For Class 10th

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खनिज तथा ऊर्जा संसाधन पाठ 5 | भूगोल दीर्घ उत्तरीय प्रश्न Ncert Solution For Class 10th के इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, आज इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी विद्यार्थियों को इस पाठ से जुड़ी हर परीक्षा उपयोगी दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पढ़ने के लिए मिलेगा, अध्ययन करने के बाद आगामी परीक्षा की तैयारी करने में आपको सभी विद्यार्थियों को काफी हद तक मदद मिलेगी |

खनिज तथा ऊर्जा संसाधन पाठ 5 | भूगोल दीर्घ उत्तरीय प्रश्न  के उत्तर Ncert Solution For Class 10th

खनिज तथा ऊर्जा संसाधन पाठ 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
खनिज तथा ऊर्जा संसाधन पाठ 5 लघु उत्तरीय प्रश्न
खनिज तथा ऊर्जा संसाधन पाठ 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1 भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है। क्यों ?
उत्तर-(क) भारत एक उष्णकटिबंधीय या एक गर्म देश है इसलिए यहाँ सौर ऊर्जा की उत्पादन क्षमता की अधिक संभावना है। एक अनुमान के अनुसार यह लगभग 20 मेगावॉट प्रति वर्ग किलोमीटर प्रति वर्ष है।
(ख) भारत में फोटोवोल्टाइक तकनीक उपलब्ध है जिसके द्वारा सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत में बदला जा सकता है।
(ग) सूर्य का प्रकाश प्रकृति का एक मुफ्त उपहार है इसलिए निम्न वर्ग के लोग आसानी से सौर ऊर्जा का लाभ उठा सकते हैं।
(घ) जबकि कोयला, पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस आदि ऊर्जा के स्रोत एक बार प्रयोग करके दुबारा प्रयोग में नहीं ला सकते वहाँ सौर ऊर्जा एक नवीकरण स्रोत है। इसे बार-बार प्रयोग में लाया जा सकता है।
(ङ) सौर ऊर्जा के प्रयोग से हम बहुत सी विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं जो तेल, गैस आदि के आयात के कारण हमें दूसरे देशों को देनी पड़ती है।
(च) सौर ऊर्जा का प्रयोग हम अनेक प्रकार से कर सकते हैं, जैसे खाना बनाने, पम्प द्वारा जल निकालने, पानी को गर्म करने, दूध को कीटाणु रहित बनाने तथा सड़कों पर रोशनी करने आदि के लिए।
2 भारत में ऊर्जा के विभिन्न साधन कौन-कौन से है? वर्णन करें।
उत्तर-कोयला. खनिज तेल, परमाणु ऊर्जा तथा विद्युत आदि ऊर्जा के मुख्य साधन हैं।
इनका विवरण इस प्रकार हैं-
(क) कोयला- यह शक्ति का प्रारंभिक साधन है। यह औद्योगिक कच्चे माल के रूप में भी इस्तेमाल होता है। कोयले द्वारा पानी को वाष्प में बदला जाता है जो औद्योगिक क्रांति का आधार बना। वाष्प इंजन, जिसमें कोयले का प्रयोग होता हैं, रेलों और उद्योगों में काम लाया जाता है।
(ख) खनिज तेल- यह अति दहनशील पदार्थ है। इसका प्रयोग अन्तर्दहन इंजनों में किया जाता है। खनिज तेल का परिष्कार करके डीजल, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, उड्डयन स्पिरिट आदि प्राप्त किए जाते हैं। इससे सड़क परिवहन, जहाजों, वायुयानों आदि को चालक शक्ति प्राप्त होती है।
(ग) प्राकृतिक गैस-प्राकृतिक गैस का शक्ति के साधन के रूप में अधिक प्रयोग किया जाता है। अब पाइपों के सहारे गैस दूर-दूर के स्थानों पर पहुँचायी जा रही है और इससे अनेक प्रकार की औद्योगिक इकाइयाँ चल रही है। गैसें खनिज तेल के साथ और अलग से भी मिलने लगी है।
(घ) जल विद्युत- इसे पैदा करने के लिए गिरते हुए पानी की शक्ति का प्रयोग करके टरबाईन को गतिमान किया जाता है। अभी तक ज्ञात शक्ति के साधनों में यह सबसे सस्ता साधन है। जल विद्युत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि निरंतर प्रयोगों के बावजूद भी इसके स्रोत समाप्त नहीं होते क्योंकि जल-साधन नवीकरण योग्य हैं।
(ङ) परमाणु ऊर्जा- इसे प्राप्त करने के लिए अणु पदार्थों को नियंत्रित परिस्थितियों में विखंडित करते हैं। इससे असीम ऊर्जा प्राप्त होती है जिसका उपयोग विविध उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
(च) ऊर्जा के अन्य स्रोत- शक्ति के अनेक गैर-परंपरागत स्रोत भी है जिनका प्रयोग निरंतर किया जा सकता है। इनमें सूर्य, वायु, ज्वार-भाटा, ज्योथर्मल, बायोगैस, भूतापी ऊर्जा आदि शक्ति के साधनों का उल्लेखनीय स्थान हैं।

खनिज तथा ऊर्जा संसाधन पाठ 5 क्लास 10th नसरत सलूशन भूगोल 

3 ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर-ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत-
(क) वायु ऊर्जा- वायु ऊर्जा का प्रयोग पानी बाहर निकालने, खेतों में सिंचाई करने और बिजली पैदा करने के लिए किया जाता है। ऐसा अनुमान है कि वायु से कोई 20,000 मेगा वाट बिजली पैदा की जा सकती है। इस समय वायु से प्राप्त कोई 990 मेगा वाट बिजली, शक्ति-ग्रिड में जोड़ी जाती है।वायु ऊर्जा का उपयोग गुजरात, तमिलनाडु, उड़ीसा और महाराष्ट्र में किया जाता है।
(ख) ज्वारीय ऊर्जा- ज्वारीय ऊर्जा का विकास करने के लिए कच्छ और कैम्बे की खाड़ियाँ अधिक उपयुक्त हैं।
(ग) ज्यो-थर्मल ऊर्जा- हिमाचल प्रदेश में गर्म पानी के चश्मों से पैदा की जाती है। इसका प्रयोग ठण्डे भण्डार के केन्द्रों में किया जाता है।
(घ) बायोगैस- बायोगैस या प्राकृतिक व्यर्थ की सामग्री के विभिन्न साधनों जैसे- बंजर भूमि आदि से प्राप्त लकड़ी, नगरों के कूड़े-करकट, पशुओं के गोबर, मनुष्य के मल-मूत्र, गन्ने की खोई आदि से भी बिजली पैदा की जाती है। खेती के कूड़े-करकट, जैसे धान के छिलके और गन्ने की खोई से भी बिजली उत्पन्न की जाती है।
(ङ) सौर ऊर्जा- सूर्य से भी बिजली का बहुत बड़ा और अक्षय भण्डार प्राप्त होता है। सूर्य में ऊर्जा उत्पन्न करने की अपार क्षमता है और यह ऊर्जा का सार्वलौकिक स्रोत है। सौर चूल्हे इसी ऊर्जा से कार्य करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम आकार के सौर केन्द्र स्थापित किए गए है। ताकि इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का प्रयोग खाना पकाने, पानी गर्म करने, फसलें सुखाने आदि के लिए किया जा सके।jac 

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