जन-संघर्ष और आंदोलन पाठ 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न Ncert Solutions for class 10th civics

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जन-संघर्ष और आंदोलन पाठ 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | Ncert Notes Civics

जन-संघर्ष और आंदोलन पाठ 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
जन-संघर्ष और आंदोलन पाठ 5 लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
जन-संघर्ष और आंदोलन पाठ 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
1 किस तरह से नेपाली लोगों का संघर्ष पूरे विश्व के लोकतांत्रिक विचार रखने वाले लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है?
उत्तर-(क) नेपाल में अप्रैल 2006 में एक प्रसिद्ध आंदोलन चला। इसका उद्देश्य नेपाल में लोकतंत्र की फिर से बहाली था, जैसा कि पहले सत्ता की बागडोर चुने हुए प्रतिनिधियों के पास थी और राजा संवैधानिक प्रमुख था। 2001 में राजा और परिवारजनों की रहस्यमय हत्या के बाद नया राजा ज्ञानेन्द्र बना। उसे लोकतांत्रिक सरकार पसन्द नहीं थी। अतः उसने कमजोर लोकतांत्रिक व्यवस्था का फायदा उठाया।
(ख) फरवरी 2005 में राजा ने प्रधानमंत्री को हटा दिया और लोकसभा भंग कर दी। इस पर जनता भड़क उठी और लोकतंत्र की पुनः बहाली के लिए अप्रैल 2006 में भीषण आंदोलन चल पड़ा। 
(ग) सभी प्रमुख राजनैतिक दलों ने Seven Party Alliance (SPA) का गठन किया। साथ ही काठमांडू में चार दिन की हड़ताल हो गई। इसमें माओवादियों सहित कई दलों ने भाग लिया। लाखों लोग इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने लगे। लोग अपनी मांगों पर अड़े हुए थे कि संसद को फिर से बहाल किया जाए। सत्ता की बागडोर दी जाए।
(घ) 24 अप्रैल 2006 को जब लोगों द्वारा दी गई चेतावनी का अंतिम दिन आया, राजा ने सभी माँगे मान ली। SPA ने गिरिजा प्रसाद कोइराला को नया प्रधानमंत्री बनाया। संसद द्वारा राजा के सभी विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए। SPA और माओवादियों ने नई संविधान एसेम्बली को चुना। इस आंदोलन को नेपाल की स्वतंत्रता प्राप्ति का दूसरा आंदोलन कहते हैं।
2 दबाव-समूहों की गतिविधियाँ लोकतांत्रिक सरकार के कामकाज में कैसे उपयोगी होती है?
उत्तर-विभिन्न दबाव समूह अपने ही ढंग से लोकतंत्र की सेवा करते हैं और उसकी जड़ें मजबूत करते हैं।
(क) प्रायः सरकार धनी एवं शक्तिशाली लोगों के अनुचित दबाव में आ सकती है। दबाव समूह तथा आंदोलन समूह इस अनुचित दबाव को कम करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
(ख) ये हित समूह विभिन्न प्रकार के दबावों में संतुलन बनाए रखते हैं। यदि एक दबाव समूह अपनी बात मनवाने के लिए सरकार पर अनुचित दबाव डालता है तो बाकी हित समूह इस अनुचित दबाव को विफल कर देते हैं।
(ग) विभिन्न प्रकार के दबाव समूह के विरोध और प्रतिविरोध से सरकार को यह पता चलता है कि जनता क्या चाहती है।
(घ) यदि किसी एक समूह द्वारा सरकार पर अपने पक्ष में नीतियों बनाने के लिए दबाव डाला जाता है, तो दूसरे समूह द्वारा पहले के पक्ष में नीतियों नहीं बनाने के लिए सरकार पर दबाव डाला जाता है। यह सरकार को जनता के विभिन्न वर्गों की इच्छाओं को सुनने तथा समझने का मौका प्रदान करता है। इस प्रकार दबाव समूह सरकार के कामकाज में उपयोगी सिद्ध होता है।

पाठ 5 जन-संघर्ष और आंदोलन लोकतांत्रिक राजनीति के नोट्स| Class 10th

3 वर्ग विशेष के हित-समूह और जन सामान्य के हित-समूह में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-वर्ग विशेष के हित समूह और जन सामान्य के हित-समूह में अंतर-
(क) वर्ग हित-समूह अमूमन समाज के किसी खास हिस्से अथवा समूह के हितों को बढ़ावा देना चाहते हैं जबकि जनसामान्य के हित-समूह किसी खास की बजाए सामूहिक हित का प्रतिनिधित्व करते हैं।
(ख) वर्ग विशेष के हित-समूह का उदाहरण मजदूर संगठन, व्यावसायिक संघ और पेशेवरों (वकील, डॉक्टर, शिक्षक आदि) के समूह आदि हैं जबकि जन सामान्य के हित-समूह का उदाहरण बामसेफ है।
(ग) वर्ग विशेष के हित-समूह वर्ग विशेषी होते हैं क्योंकि ये समाज के किसी खास तबके जैसे कि मजदूर, कर्मचारी, व्यवसायी, उद्योगपति, धर्म विशेष के अनुयायी अथवा किसी खास जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि जनसामान्य के हित-समूह का लक्ष्य अपने सदस्यों का नहीं बल्कि सर्वसामान्य की मदद करना होता है।
(घ) वर्ग विशेष के हित-समूह का मुख्य सरोकार पूरे समाज का नहीं बल्कि अपने सदस्यों की बेहतरी और कल्याण करना होता है, जबकि सामान्य के हित-समूह जन सामान्य के हित के लिए संघर्ष करते हैं तथा इसके लिए सरकार पर दबाव बनाते हैं।
4 दबाव समूह समाज के किसी खास तबके के हितों एवं दृष्टिकोणों की संगठित अभिव्यक्ति होते हैं। विवेचना करें।
उत्तर-(क) समान पेशे, हित, आकांक्षा अथवा विचारधारा के लोगों का वह समूह जो अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सरकार पर दबाव डालता है, दबाव समूह के नाम से जाना जाता है।
(ख) दबाव समूह ऐसे लोगों का औपचारिक संगठन है, जिनके साझा हित एवं स्वार्थ होते हैं। दबाव समूह सार्वजनिक नीति निर्माण से संबंधित पहलुओं को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।
(ग) दबाव समूह समाज किसी खास हिस्से या समूह के हितों एवं दृष्टिकोणों को संगठित रूप से अभिव्यक्त करते हैं। व्यावसायिक संघ व्यवसायियों के हितों के लिए सरकार पर दबाव डालते हैं।
उसी प्रकार कृषक संगठन कृषि के क्षेत्र में सरकार की नीतियों एवं फैसलों पर दबाव डाल सकते हैं। एक कृषक संगठन शिक्षकों के कल्याण के लिए दबाव नहीं डालता, उसी प्रकार शिक्षक संघ सिंचाई की सुविधाओं की माँग नहीं करता।
(घ) ऑल इंडिया रेलवे मैन्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, मुस्लिम मजलिस, स्टुडेन्ट फेडरेशन, फेडरेशन ऑफ इन्डियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज आदि दबाव समूहों के कुछ उदाहरण हैं।jac

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