उपनिवेशवाद और आदिवासी समाज पाठ 4 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर Ncert Solution For Class 8th

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उपनिवेशवाद और आदिवासी समाज पाठ 4 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर Ncert Solution For Class 8th के इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी को पाठ से जुड़े लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर जो परीक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, और पिछले कई परीक्षाओं में इस तरह के प्रश्न पूछे जा चुके हैं, उन सभी प्रश्नों के उत्तर इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी को पढ़ने के लिए मिलेगा इसलिए इस पोस्ट को कृपया करके पूरा पढ़ें ताकि आपको परीक्षा की तैयारी करने में और भी आसानी हो सके-

उपनिवेशवाद और आदिवासी समाज पाठ 4 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर Ncert Solution For Class 8th

उपनिवेशवाद और आदिवासी समाज पाठ 4 अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
उपनिवेशवाद और आदिवासी समाज पाठ 4 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
उपनिवेशवाद और आदिवासी समाज पाठ 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

1 झूम खेती कैसे की जाती है?
उत्तर-झूम खेती को घुमंतु खेती भी कहा जाता है। इस तरह की खेती एक जगह से दूसरे जगहों पर घूम-घूम कर की जाती है। जंगलों के छोटे-छोटे भूखण्डों पर जमीन तक धूप लाने के लिए पेड़ों के उपरी हिस्से काट देते थे और जमीन पर उगी घास-फूस जलाकर साफ कर देते थे।

इसके बाद वे राख को खाली जमीन पर छिड़क देते थे। इस राख में पोटाश होती थी जिससे मिट्टी उपजाऊ हो जाती थी।

वे कुल्हाड़ी से पेड़ों को काटते थे और कुदालों से जमीन की ऊपरी सतह को जोतने के बजाय खुरच देते थे और बीज रोपने के बजाय उन्हें खेत में बिखेर देते थे। जब एक बार फसल तैयार हो जाती थी, तो उसे काटकर वे दूसरी जगह के लिए चल पड़ते थे।

2 अंग्रेज काश्तकारों को स्थायी रूप से क्यों बसाना चाहते थे?
उत्तर-काश्तकारों से अंग्रेजों को काफी परेशानी थी जो यहाँ-वहाँ भटकते रहते थे और एक जगह ठहरकर नहीं रहते थे। वे चाहते थे कि आदिवासियों के समूह एक जगह स्थायी रूप से
रहें और खेती करें।

स्थायी रूप से एक जगह रहने वाले किसानों को नियंत्रित करना आसान था। अंग्रेज अपने शासन के लिए आमदनी का नियमित स्रोत चाहते थे।

फलस्वरूप उन्होंने जमीन के बारे में कुछ नियम लागू कर दिए। उन्होंने जमीन को मापकर प्रत्येक व्यक्ति का हिस्सा तय कर दियाकि किसे कितना लगान देना होगा। इसी कारण से अंग्रेज काश्तकारों को स्थायी रूप से बसाना चाहते थे।

3 बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों के सामने क्या घोषणा की?
उत्तर-अपनी किशोरावस्था में बिरसा जिन विचारों के संपर्क में आए. उनसे वह काफी गहरे तौर पर प्रभावित थे। बिरसा का आंदोलन आदिवासी समाज को सुधारने का आंदोलन था।

उन्होंने मुंडाओं से आह्वान किया कि वे शराब पीना दें. गावों को साफ रखें और डायन व जादू-टोने में विश्वास न करें। बिरसा ने मिशनरियों और हिंदू जमींदारों का भी लगातार विरोध किया।

वह उन्हें बाहर का मानते थे, जो मुंडा जीवन शैली को नष्ट कर रहे थे। बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों के सामने घोषणा की कि वे अपने गौरवपूर्ण अतीत को पुर्नजीवित करने का संकल्प लें।

4 संथाल विद्रोह के क्या परिणाम हुए?
उत्तर-30 जून, 1855 को संथाल परगना में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ। राजमहल क्षेत्र में बघनाडिह गाँव के सिद्धो ने नेतृत्व संभाला। दस हजार संथालों के बीच सिद्धो ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रॉति की घोषणा की।

सिद्धो के साथ उनके तीनों भाई (कान्हू, चाँद और भैरव) भी थे। उस विद्रोह को संथाल विद्रोह कहा गया। उस विद्रोह की लपटें हजारीबाग में भी फैली थी। वहाँ उसका नेतृत्व लुबिया मांझी, बैस मांझी और अर्जुन मांझी ने संभाला था।

जनजातीय विद्रोहों में संथाल विद्रोह सबसे जबरदस्त था। संथाल विद्रोह का प्रमुख कारण अंग्रेजी उपनिवेशवाद और उसमें निहित शोषण, बंगाली एवं पद्दाही महाजनों तथा साहूकारों का शोषण था। यह विद्रोह गैर-आदिवासियों को भगाने, उनकी सत्ता समाप्त कर अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए छेड़ा गया था।

इस आंदोलन में अपना देश और अपना राज का नारा दिया गया। इस आंदोलन में सिद्धो को राजा, कान्हू को मंत्री चाँद को प्रशासक तथा भैरव को सेनापति चुना गया। इस विद्रोह के कारण संथाल परगना को स्वायत्तता दी गयी। वहाँ जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गयी।

5 दीकुओं से आदिवासियों के गुस्से का क्या कारण था ?
उत्तर-आदिवासी सभी आसपास आ रहे बदलावों और अंग्रेज शासन के कारण पैदा हो रही समस्याओं से बेचैन थे। उनकी परिचित जीवन पद्धति नष्ट होती दिखाई दे रही थी। आजीविका खतरे में थी। धर्म छिन्न-भिन्न हो रहा था।

अंग्रेज अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों को मानने के लिए बाध्य कर दिया। उन्हें अंग्रेजों को नजराना देना पड़ता था। अंग्रेजों ने सम्पूर्ण जंगल पर अपना अधिकार कर लिया था और जंगलों को राज्य की सम्पत्ति घोषित कर दिया था।

अंग्रेजों ने जंगल के भीतर आदिवासियों के रहने पर भी पाबंदी लगा दी थी। उपर्युक्त कारणों से दीकुओं से आदिवासियों को गुस्सा का कारण बन गया।

6 अंग्रेजों के आने के बाद आदिवासी मुखियाओं की क्या दशा हुई?
उत्तर-अंग्रेजों के आने से पहले बहुत सारे इलाकों में आदिवासियों के मुखियाओं का महत्वपूर्ण स्थान होता था। उनके पास औरों से ज्यादा आर्थिक ताकत होती थी और अपने इलाके पर
नियंत्रण रखते थे।

कई जगह उनकी अपनी पुलिस होती थी और वे जमीन एवं वन प्रबंधक के स्थानीय नियम खुद बनाते थे। ब्रिटिश शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं के कामकाज और अधिकार काफी बदल गए थे।

उन्हें कई-कई गाँवों पर जमीन का मालिकाना हक तो मिला लेकिन उनकी शासकीय शक्तियाँ छिन गई और उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों को मानने के लिए बाध्य कर दिया गया।jac board