अध्याय 15 हमारा पर्यावरण विज्ञान अभ्यास प्रश्नोत्तर क्लास 10 th

अध्याय 15 हमारा पर्यावरण विज्ञान

हमारा पर्यावरण अभ्यास प्रश्नोत्तर परिचय

अध्याय 15 हमारा पर्यावरण अभ्यास प्रश्नोत्तर में आपका स्वागत है ,आज आप इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्नों एवं उनके उत्तर के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे, इस ब्लॉग में परीक्षा उपयोगी सभी महत्पूर्ण सवालों का जवाब अध्ययन करने को मिलेगा ,इसलिए आप सभी विद्यार्थी से निवेदन है की आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े ताकि इस पाठ से सबंधित और अभ्यास प्रश्न का कोई भी प्रश्न छूटे नहीं , क्योकिं आप पढ़ेंगे तो आपका ही नॉलेज बढ़ेगी , तो चलिए शुरू करते है


प्रश्न-1. क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय?

उत्तर – वे पदार्थ जिनका अपघटन जीवाणु अथवा दूसरे मृतजीवियों द्वारा हो सकता है अर्थात् वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं जैव निम्नीकरणीय’ कहलाते हैं। जैसे :-लकड़ी, कागज आदि।

इसके अतिरिक्त वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित नहीं होते हैं ‘अजैव निम्नीकरणीय’ कहलाते हैं। अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ ‘अक्रिय (inert)’ होते हैं तथा प्रकृति में लम्बे समय तक बने रहते हैं। जैसे :- प्लास्टिक, काँच आदि।

प्रश्न-2. ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।

उत्तर – जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को कई प्रकार से प्रभावित करते हैं। ये पदार्थ जब मिट्टी में दबाए जाते हैं तो इनका सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन हो जाता है। इससे भूमि की पुनः पूर्ति होती है।

कई बार इन पदार्थों के अत्यधिक उत्पादन से इनके कचरे के ढ़ेर जमा हो जाते हैं तो इनमें बहुत अधिक रोगाणु उत्पन्न हो जाते हैं जो जीवों पर बहुत बुरा प्रभाव डालते हैं।

इनके अपघटन से बहुत अधिक गैसें निकलती हैं जो पौधा घर प्रभाव व वैश्विक ऊष्मीकरण प्रभाव उत्पन्न करती हैं, जिससे पर्यावरण तथा जैव समुदाय प्रभावित होते हैं।

प्रश्न-3. ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।

उत्तर – अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ वायु, मिट्टी तथा जल में मिल कर इन्हें प्रदूषित करते हैं। CFCs जैसे रसायन हमारे चारों ओर के सुरक्षात्मक आवरण ओजोन को अवक्षेपित कर रहे हैं, जिससे पराबैंगनी विकिरण पर्यावरण में प्रवेश कर रहे हैं जो हमारे लिए हानिकारक हैं।

कीटनाशक पदार्थ व अन्य रासायनिक पदार्थ जल तथा मिट्टी में मिलकर अनेक जीवों को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न-4 . पोषी स्तर क्या हैं? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बताइए।

उत्तर – पोषीस्तर :- आहार श्रृंखला का प्रत्येक चरण अथवा कड़ी एक पोषी स्तर बनाते हैं।
आहार शृंखला का उदाहरण
हरे पौधे → खरगोश → लोमड़ी → शेर
इस आहार श्रृंखला में हरे पौधे उत्पादक हैं। अतः प्रथम पोषी स्तर पर स्थित हैं। ये हरे पौधे प्राथमिक उपभोक्ता द्वारा खाये जाते हैं। अतः प्राथमिक उपभोक्ता (खरगोश) द्वितीय पोषी स्तर का निर्माण करता है। लोमड़ी इस आहार श्रृंखला में तृतीय पोषी स्तर का निर्माण करती है तथा
शेर सबसे अन्त में अर्थात् द्वितीय उपभोक्ता (लोमड़ी) को खाने वाला जीव चतुर्थ पोषी स्तर का निर्माण करता है।

प्रश्न-5 . पारितंत्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है?

उत्तर – कुछ सूक्ष्मजीव जीवों के मृत शरीरों तथा उनके अपशिष्ट पदार्थो को अपघटित करते हैं। जो सूक्ष्मजीव इन जटिल पदार्थों को अपघटित करके सरल पदार्थों में बदल देते हैं, अपमार्जक कहलाते हैं। अपमार्जक पृथ्वी पर उपस्थित सभी मृत शरीरों तथा अपशिष्ट पदार्थों को अपघटित करके मूल पदार्थों में बदल देते हैं, जिससे जैव पदार्थों का चक्रण हो पाता है। अपघटन के बाद बने मूल पदार्थों का पौधे दोबारा प्रयोग करते हैं।

प्रश्न-6 . ओजोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?

उत्तर – ओजोन ‘0’ के अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनते हैं। ओजोन एक घातक विष है। परन्तु वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर ओजोन एक आवश्यक प्रकार्य संपादित करती है। यह सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरणों से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। यह पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। ये मानव में त्वचा कैंसर जैसी बीमारियाँ उत्पन्न करते हैं। यदि हमारी पृथ्वी के चारों ओर यह ओजोन की परत न हो तो ये पराबैंगनी विकिरण वायुमण्डल में प्रवेश कर जाएंगे और जीवों को हानि पहुँचाएंगे और वैश्विक उष्मीकरण प्रभाव भी उत्पन्न करेंगे।

प्रश्न-7 . आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान दे सकते हैं? किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- सामान्यतः कचरे का वैज्ञानिक विधि से ही निपटारा किया जाना चाहिए कचरे के निपटान की कई विधियाँ हैं। ये विधियाँ कचरे की प्रकृति पर निर्भर करती हैं। सामान्यतः कचरा दो प्रकार का होता है ठोस कचरा एवं द्रव कचरा। अधिकांश ठोस कचरे का निपटारा विभिन्न शहरी क्षेत्रों में खाली पड़े हुए भूमि क्षेत्रों को भरने में किया जाता है। कुछ ठोस अपशिष्टों का जैसे प्लास्टिक, कागज, धातुएँ आदि का पुनः चक्रण किया जाता है। घरेलू कचरे का उपयोग लाभकारी रूप में किया जा सकता है। इन अपशिष्टों का उपयोग कंपोस्ट खाद का निर्माण करके किया जा सकता है। यह खाद पौधों एवं वृक्षों के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।

अध्याय 15 हमारा पर्यावरण अभ्यास प्रश्न के छोटे सवाल

प्रश्न-1. निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं

(a) घास, पुष्प तवा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास
उत्तर – (a), (c) और (d)

प्रश्न 2. निम्न से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं

(क) घास, गेहूँ तया आम (ख) घास, बकरी तथा मानव
(ग) बकरी, गाय तथा हाथी
(य) पास, मछली तया बकरी
उत्तर – (ख) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3. निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं

(क) बाजार जाते समय सामान के लिए कपड़े का बेला से जाना करना
(ख) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बंद
(ग) स्कूटर पर जाने के बजाए विद्यालय तक पैदल जाना।
(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर-(घ) उपरोक्त सभी।

अध्याय 15 हमारा पर्यावरण अभ्यास प्रश्न के परीक्षा उपयोगी सवाल

प्रश्न 4. क्या होगा यदि हम एक पोपी स्तरों के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डालें )

उत्तर – पर्यावरण के विभिन्न संघटकों के मध्य अन्योन्य क्रिया में एक संघटक से दूसरे में ऊर्जा का प्रवाह होता है। यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें तो इससे नीचे के पोषीस्तर के सभी जीवों की संख्या निरंतर बढ़ती चली जाएगी तथा इसके ऊपर के पोषी स्तर के जीवों के लिए जीवन का निर्वाह कठिन हो जाएगा। इस प्रकार संपूर्ण जैव समुदाय तथा पारितंत्र प्रभावित होता है अर्थात् नष्ट हो सकता है।

प्रश्न 5. क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों के पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव है?

उत्तर- किसी पोपी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव चिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा। यदि हम किसी पोधी स्तर के सभी जीवों को हटाते हैं तो इस स्तर से निम्न पोषी स्तर के जीवों की संख्या बहुत अधिक हो जाएगी जिससे उनके बीच आवास, भोजन व अन्य आवश्यकताओं के लिए प्रतिद्वंद्वता बढ़ जाएगी और कमजोर जीवों के लिए जीवन का निर्वाह असंभव हो जाएगा। हटाए गए पोषी स्तर से उच्च पोषी स्तर के जीवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इससे संपूर्ण पारितंत्र प्रभावित हो जाएगा।

किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव नहीं है, क्योंकि उत्पादकों को हटाने से ऊपर के सभी पोषी स्तरों के जीव मर जाएंगे। इसके अतिरिक्त किसी भी अन्य पोषी स्तर के जीवों को नष्ट करने से ऊपर तथा नीचे के स्तरों पर भी उनकी संख्या के घटने तथा बढ़ने का प्रभाव पड़ता है।

अध्याय 15 हमारा पर्यावरण के पाठ से परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाला सवाल

प्रश्न 6. जैविक आवर्धन (Biological magnification) क्या है। क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैव आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा।

उत्तर – विभिन्न फसलों को रोग, व्याधि एवं पीड़कों से बचाने के लिए पीड़कनाशक एवं रसायनों का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है। यह रसायन जल में पुलकर मिट्टी में अथवा जल स्त्रोतों में चले जाते हैं। मिट्टी से इन पदाथों का पोधों द्वारा जल एवं खनिजों के साथ-साथ अवशोषण हो जाता है तथा जलाशयों से ये जलीय पौधों एवं जंतुओं के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यह एक तरीका है जिससे वे आहार श्रृंखला में प्रवेश करते हैं। चूंकि ये पदार्थ अजैव निम्नीकृत हैं, अतः ये प्रत्येक पोषी स्तर पर ऊतरोतर संग्रहित होते जाते हैं। क्योंकि किसी भी आहार मुंखला में मनुष्य शीर्षस्य है, अतः हमारे शरीर में यह रसायन सर्वाधिक मात्रा में संचित हो जाते हैं। इसे ‘जैन-आवर्धन’ कहते हैं। पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैप आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा। चूंकि ये पदार्थ अजैव निम्नीकृत हैं अतः ये प्रत्येक पोषी स्तर पर ऊतरोत्तर संग्रहित होते जाते हैं

प्रश्न 7. हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

उत्तर- वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित नहीं होते, अर्थात जो जैव प्रक्रम में अप्रभावी रहते हैं, ‘अजैव’ निम्नीकरणीय कहलाते हैं। इसी कारण बहुत से मानवनिर्मित पदार्थों जैसे कि प्लास्टिक का अपघटन जीवाणु अथवा दूसरे मृतजीवियों द्वारा नहीं हो सकता। इन पदाधों पर भौतिक प्रक्रम जैसे कि ऊष्मा तथा दाब का प्रभाव होता है, परन्तु सामान्य अवस्था में लम्बे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं। ये पदार्थ सामान्यतः अक्रिय (inert) हैं तथा लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं अथवा पर्यावरण के अन्य सदस्यों को हानि पहुंचाते हैं।

ये पदार्थ बहुत अधिक पर्यावरणीय समस्याएँ पैदा करते हैं। ये भूमि, जल तथा वायु प्रदूषण के मुख्य कारक होते हैं जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारियों पैदा होती हैं। अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ, हमारे वायुमण्डल के ऊपर की सुरक्षात्मक परत O3 (ओजोन) का अवक्षय कर रहे हैं।

उच्च स्तर की जीवन शैली ने सभी पदार्थों की पैकिंग को बढ़ावा दिया है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय हैं जो आजकल अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों का मुख्य हिस्सा हैं।

प्रश्न 8. यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उत्तर – यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो इसका निपटारा बहुत कठिन हो जाएगा, क्योंकि जैव निम्नीकरणीय उत्पादों का निपटारा इनके अपघटन के द्वारा ही संभव है। लेकिन यदि सारा उत्पादित कचरा जैव निम्नीकरणीय होगा तो इसका अतिशीघ्र अपघटन न होने के कारण कचरे के ढेर लग जाएंगे जिनमें अनेक प्रकार के रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव उत्पन्न हो जाएंगे, जिससे अनेक जीव रोग की चपेट में आ सकते हैं। इनके अपघटन से बहुत-सी हानिकारक गैसें निकलती हैं जो जीवों को हानि पहुँचा सकती हैं। इन गैसों के कारण वायुमण्डल में वैश्विक ऊष्मीकरण तथा ग्रीन हाऊस प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं जो पर्यावरण व जैव समुदाय पर बहुत बुरा प्रभाव डालते हैं।

प्रश्न 9. ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों है। इस तति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

उत्तर – ओजोन (O3 ) हमारे वायुमण्डल के बाहर एक सुरक्षात्मक आवरण बनाती है। लेकिन वायु प्रदूषण तथा CFCs रसायन के प्रयोग के कारण ओजोन परत लगातार अवक्षेपित होती जा रही है। यह हमारी चिंता का विषय बना हुआ है। इसकी क्षति से पराबैंगनी विकिरण पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश कर रहे हैं। ये विकिरण हमारी आँखों को प्रभावित करते हैं, शरीर की
प्रतिरोधक शक्ति को प्रभावित करते हैं। इनके प्रभाव से त्वचा कैंसर हो सकता है। इस क्षति को सीमित करने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वानुमति बनी कि CFCS उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए।


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