फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर | NCERT Solution For Class 9th History

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फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर | NCERT Solution For Class 9th History के इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पाठ में आप सभी विद्यार्थियों को पाठ से जुड़ी महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न जो कि पिछले कई परीक्षा में पूछे जा चुके हैं, उन सभी प्रश्नों को इस पोस्ट का कवर किया गया है इस तरह के प्रश्न आने वाले परीक्षा में भी पूछे जा सकते हैं, इसलिए इस पोस्ट को कृपया करके पूरा पढ़ें ताकि आपकी तैयारी और भी अच्छी हो सके तो चलिए शुरु करते हैं |

फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 दीर्घ  उतरीय प्रश्न उत्तर Ncert Solution

फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर
फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1 फ्राँस में क्रांति की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई ? वर्णन करें।
उत्तर-फ्रांस की क्रांति के मुख्य कारण निम्नांकित थे-
(क) राजनीतिक कारण- फ्रॉस में एकतंत्रीय, स्वेच्छाचारी और निरंकुश शासन था। राजा शासन का सर्वोच्च अधिकारी होता था। फलतः शासन में भ्रष्टाचार का बोलबाला हो गया था। राज्य की संपूर्ण आय पर राजा का निजी अधिकार था।
फ्राँस की सरकार निरंकुश होने के अलावा अव्यवस्थित भी थी। वहाँ न्याय प्राप्त करना पत्थर पर दूब जमने की आशा करना था। देश में कानून की एकरूपता का अभाव था।
वहाँ के लोगों को किसी प्रकार की स्वतंत्रता नहीं थी। राजा की निरंकुशता के विरुद्ध कोई आवाज नहीं उठा सकता था। भाषण, लेखन, प्रकाशन आदि पर जबरदस्त प्रतिबन्ध था। इससे जनता में असन्तोष भीतर-ही-भीतर बढ़ता जा रहा था।
(ख) सामाजिक कारण- फ्रॉस का समाज तीन वर्गों में बँटा था- पादरी वर्ग, सामंत वर्ग और साधारण वर्ग। पादरियों एवं सामंतों को विशेष अधिकार प्राप्त थे। चर्च एवं सामंतों के पास बड़ी-बड़ी जागीरें थीं। पर, उन्हें कोई कर देना नहीं पड़ता था।
किसान और मजदूर तीसरे वर्ग में आते थे। वे करों के बोझ से दबे हुए थे। उन्हें कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। उस समय फ्राँस का शासक लुई सोलहवाँ बड़ा ही आयोग्य शासक था।
(ग) आर्थिक कारण- फ्रांस की आर्थिक व्यवस्था भी बड़ी ही दयनीय थी। आय और व्यय का कोई बजट तैयार नहीं होता था और इसका न कोई ब्योरा ही रखा जाता था। फ्राँस का व्यापारी वर्ग भी राजसत्ता से ऊब चुका था।
एक जगह से दूसरी जगह माल ले जाने के लिए बहुत तरह की चुंगी देनी पड़ती थी। फ्राँस की सेना भी तत्कालीन शासन से अंसतुष्ट थी।
(घ) बौद्धिक कारण- फ्रांस की क्रांति में वहाँ दार्शनिकों का विशेष हाथ रहा है। यदि फ्राँस में दार्शनिक नहीं होते तो वहाँ क्रांति भी नहीं होती। दार्शनिकों ने फ्रांस की दुर्बल एवं पीड़ित जनता की क्रांति का झंडा उठाने की प्रेरणा दी।
इन दार्शनिकों में मॉण्टेस्क्यू, वाल्टेयर, रूसो आदि प्रमुख थे। इन्हीं की प्रेरणा से फ्रांस की जनता ने अत्याचारी शासन का अंत करने का निश्चय किया।
(ङ) तात्कालिक कारण- पेरिस में बास्तिल नामक एक बड़ा दुर्ग था जो जेल के रूप में प्रयुक्त होता था। इसमें राजनीतिक कैदी रखे जाते थे।
14 जुलाई 1789 ई० को पेरिस की जनता ने बास्तिल के जेलखाने को तोड़ दिया और सभी बंदियों को रिहा कर दिया। इसी के साथ फ्राँस की क्रांति का आरंभ हो गया।
फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 के प्रश्न उत्तर notes
1857 की क्रांति के प्रश्न उत्तर Class 9 NCERT
2 फ्रांसीसी समाज के किन तबकों को क्रांति का फायदा मिला? कौन-से समूह सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर हो गए ? क्रांति के नतीजों से समाज के किन समूहों को निराशा हुई होगी ?
उत्तर-फ्राँसीसी समाज के किन तबकों को क्रांति का फायदा मिला- सर्वसाधारण श्रेणी के फ्रॉस के सभी लोगों को क्रांति से लाभ रहा क्योंकि जब उन्हें सभी प्रकार के कर पुरोहित श्रेणी और कुलीन श्रेणी को देने पड़ते थे, उन्हें अधिकार नाम की कोई चीज प्राप्त नहीं थी।
इस श्रेणी में गाँवों के किसान, शहरों के मजदूर और मध्य श्रेणी के लोग जैसे कर्मचारी, वकील, व्यापारी, चिकित्सक आदि लोग सम्मिलित थे। क्रांति के पश्चात् ऐसे लोगों को शोषण से मुक्ति मिली और स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व के अधिकार प्राप्त हुए।
कौन से समूह सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर हो गए- उच्च वर्ग के लोगों जो प्रथम और द्वितीय वर्गों में आते थे, को अपनी शक्तियों से हाथ धोना पड़ा क्योंकि केवल इन्हीं लोगों को विशेषाधिकार प्राप्त थे।
ऐसे वर्गों में उच्च पादरी, सामंत और कुलीन लोग सम्मिलित थे। अब फ्रॉस में समानता और बन्धुत्व के आधार पर समाज का गठन किया गया।
क्रांति के नतीजों से समाज के किन समूहों को निराशा हुई होगी- निसन्देह जिन वर्गों के पास विशेषाधिकार थे उन्हीं को क्रांति के परिणामों से निराशा हो सकती थी। चर्च की संपत्ति को छीन लिया गया और उसे जनसाधारण में बाँट दिया गया ऐसे में पुरोहित श्रेणी को काफी निराशा हुई।
इसी प्रकार जब कुलीन श्रेणी के कर एकत्रित करने तथा खुलेआम शिकार करने के अधिकारों को समाप्त कर दिया गया तो उन्हें भी क्रांति के परिणामों से निराशा ही होने वाली थी।

फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 हिंदी में कक्षा 9 एनसीईआरटी

फ्रांसीसी क्रांति के प्रश्न उत्तर कक्षा 9 Ncert Solution
3 उन्नीसवीं और बीसवीं सदी की दुनिया के लिए फ्रांसीसी क्रांति कौन-सी विरासत छोड़ गई?
उत्तर-फ्रॉस की क्रांति विश्व इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। यूरोप के इतिहास पर इसका विशेष प्रभाव पड़ा। इसने संसार को स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व के तीन मुख्य विचार दिये जिनके कारण यह क्रांति सदा के लिए अमर हो गई। विश्व, विशेषकर यूरोप के इतिहास में इसका महत्व निम्नांकित प्रभावों के कारण है-
(क) इसके कारण फ्रांस में सामंतवाद का अंत हुआ और देखते ही देखते मध्य वर्ग के लोगों ने चर्च की जमीनें खरीद ली। उधर सरकार ने भी अभिजात वर्ग (अमीर वर्ग) की भूमियाँ हड़प ली।
(ख) फ्रॉस की क्रांति ने विशेषतः यूरोपीय देशों में तथा धीरे-धीरे सारे विश्व में लोकतंत्र के विचारों को पनपने में सहायता की। सरकार का उद्देश्य भारत जनता को सुखी बनाना हो गया न कि कुछ विशेष लोगों के अधिकारों का ध्यान रखना।
(ग) इस क्रांति ने संसार के लोगों में स्वतंत्रता की भावना कूट-कूट कर भर दी और तत्पश्चात् जनता को अपनी प्रभुसत्ता का ज्ञान हुआ।
(घ) फ्रॉस की क्रांति ने समानता के आधार पर अधिकार दिये जाने की विचारधारा का प्रचार किया। इसके परिणामस्वरूप कानून की दृष्टि में अमीस्गरीब राजा-रंक आदि सबके अधिकार समान हो गए।
शीघ्र ही व्यस्क मताधिकार के आधार पर बिना संपत्ति वाले लोगों, मजदूरों और किसानों आदि को भी राजनीतिक अधिकार दिये जाने लगे।
(ङ) इस क्रांति ने बन्धुत्व के विचार को विश्व में फैलाया। इसी क्रांति ने यह बताया कि देश के नव-निर्माण के लिये प्रेम, एकता और सहयोग आदि सदगुणों की अति आवश्यकता होती है।
(च) फ्रॉस की क्रांति द्वारा विश्व में राष्ट्रीयता के विकास को प्रोत्साहन मिला। फ्रॉस से प्रेरित होकर पोलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, इटली आदि देशों मेंराष्ट्रवाद का विकास हुआ।
(छ) फ्रॉस की क्रांति से ही शिक्षा प्राप्त करके सभी अपनी जनता का अधिक कल्याण करने के लिए प्रयत्न आरम्भ कर दिए और इस तरह शासन में सुधार किये जाने लगा।
फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 दीर्घ प्रश्न उत्तर class 9th history
4 उन जनवादी अधिकारों की सूची बनाएँ जो आज हमें मिले हुए हैं और जिनका उद्गम फ्रांसीसी क्रांति से हुआ।
उत्तर-भारत में हम निम्नांकित छ: मौलिक अधिकारों से लाभप्रद हो रहे हैं-
(क) समानता का अधिकार,
(ख) स्वतंत्रता का अधिकार,
(ग) शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार,
(घ) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार,
(ङ) शोषण के विरुद्ध अधिकार,
(च) संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
इन अधिकारों को निरीक्षण करें तो हमें आसानी से इस बात का ज्ञान हो जाता है कि इनमें से बहुत से अधिकारों का उत्पत्ति का स्रोत फ्राँस की क्रांति ही है-
(क) समानता का अधिकार- समानता का अधिकार फ्रांस की क्रांति की ही देन है। फ्राँस के क्रांतिकारियों ने समानता के अधिकार को प्राप्त करने पर बहुत जोर दिया क्योंकि वे अनेक प्रकार की समाज में व्याप्त असमानताओं से अप्रसन्न थे।
क्रांति के सफल होने पर एक ऐसे समाज की नींव पड़ी जो समानता के नियमों पर आधारित थी पादरी और कुलीन वर्ग के सभी विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया गया।
(ख) स्वतंत्रता का अधिकार- इस अधिकार की जननी भी फ्रॉस की क्रांति ही थी। इस क्रांति ने राजा के दैवी अधिकारों को समाप्त कर दिया और जनसाधारण को सामन्तों और पादरी वर्ग द्वारा थोपे गए बहुत से बन्धनों को धराशायी करके लोगों को मुक्ति दिलाई।
(ग) प्रजातंत्र की भावना को प्रोत्साहित करना- फ्रॉस की क्रांति ने फ्रॉस के राजा और रानी को फाँसी पर चढ़ाकर देश में प्रजातंत्र की स्थापना की।
(घ) बन्धुत्व की विचारधारा को प्रोत्साहन देना- ऊँच-नीच की सभी दीवारों को तोड़ कर फ्रॉस की क्रांति ने भाईचारे की भावना को प्रोत्साहित किया अब समाज के सभी वर्गों- किसानों, मजदूरों, कारीगरों, गरीबों, महिलाओं आदि के लिए अनेक सुधार किये जाने लगे। ऐसी भावना के जागृत होने से सभी लोगों को विभिन्न अधिकारों से लाभ उठाने के सुअवसर प्राप्त हो
सके।
फ़्रांसीसी क्रांति NCERT Solutions for Class 9th: पाठ 1 –  इतिहास
5 क्या आप इस तर्क से सहमत हैं कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश में नाना (अनेक) अंतर्विरोध थे?
उत्तर-इस कथन के विषय में विचारकों के दो मत हैं कि क्या सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश में अंतर्विरोध थे या नहीं। बहुत से लेखक इस विचार के हैं कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश, की आलोचना नहीं की जा सकती। सम्भवतः नागरिक और मानव अधिकारों की स्पष्ट घोषणा करने का यह विश्व में पहला प्रयत्न था।
इसमें मानव के तीन मौलिक अधिकारों- स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व पर जोर दिया गया। यह विश्व को फ्रॉस की क्रांति की महान देन है। लगभग सभी अधिकारों के प्रति यदि किसी को कोई भ्रान्ति है तो वह अस्पष्ट है और तथ्यों से बहुत दूर है।
वास्तव में फ्रांस के क्रांतिकारियों की किसी और बात या घटना के लिये तो
आलोचना की जा सकती है कि उन्होंने रक्तपात में अपने हाथ रंगे परन्तु मानव अधिकारों को इतिहास के रंगपटल पर रखकर उन्होंने प्रजातंत्रीय धारणा को लाने में बड़ा योग दिया और ऐसे में उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए।
मरा और केमली डेसमॉलिंस ने अवश्य हमें इन अधिकारों के प्रयोग में सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
हर अधिकार सीमा रहित नहीं है। मेरा स्वतंत्रता का अधिकार मुझे इस बात की आज्ञा नहीं देता कि मेरे मन में जो आए करता जाऊ, जब जी करे तो दूसरे की चीज उठा लूं या जब मन करे अगले के घर में घुस जाऊँ।
हर अधिकार की सीमा निश्चित है, उस सीमा को पार करने से विरोधाभास हो सकते हैं। उसमें स्वतंत्रता के अधिकार की कोई गलती नहीं वह तो हमारी अपनी गलती है कि हम किसी भी अच्छाई को बुराई में बदल लें।
यदि अधिकारों का प्रयोग करना हो तो हमें दूसरों के अधिकारों का भी ध्यान
रखना है तब मानव अधिकारों के संदेश में कोई विरोधाभास या प्रतिकूलता नहीं मिलेगी।
फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 दीर्घ प्रश्न उत्तर class 9th
6 नेपोलियन के उदय को कैसे समझा जा सकता है? वर्णन करें।
उत्तर-नेपोलियन का जन्म 1769 ई० में रोम सागर के द्वीप कोर्सिका की राजधानी अजासियों में हुआ था। वह असाधारण प्रतिभा का स्वामी था। उसने ब्रियनी और पेरिस के फौजी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की।
सेना में भर्ती होकर वह अपनी वीरता, असीम साहस और सैनिक योग्यता द्वारा उन्नति करता हुआ सेनापति बन गया।उसने ब्रिटेन (1793 ई०), सार्डीनिया (1796 ई०) और आस्ट्रिया (1797 ई०) के विरुद्ध विजय प्राप्त की।
इसके शीघ ही पश्चात् वह डिरेक्ट्री का प्रथम बना और थोड़े समय पश्चात् (1804 ई०) वह फ्रॉस का सम्राट बन गया। नेपोलियन ने अपनी योग्यता तथा प्रशासकीय कुशलता के बल पर फ्रॉस में शांति और व्यवस्था स्थापित की। नेपोलियन की गिनती विश्व के महान सेनापतियों में की जाती है।
वह बहुत परिश्रमी, इरादे का पक्का, तलवार का धनी और बहुत वीर सैनिक था। जब पहली बार उसे इटली में फ्रॉस की सेना का कमांडर बनाकर भेजा गया तो उसने अपनी मधुर वाणी से अपने सैनिकों में एक अद्भुत जोश भर दिया।
बुरी दशाओं और संघर्षों का मुकाबला करने पर भी सैनिक उसके प्रति पूरी वफादारी रखते थे। इरादों का वह इतना पक्का था कि वह कहा करता था कि असंभव शब्द मुों के कोष में होता है।
40 हजार सैनिकों के साथ आल्पस जैसे कठिन एवं दुर्गम पहाड़ को पार करके उसने यह बात सिद्ध कर दी थी कि संसार में कुछ भी असंभव नहीं है। उसने कानूनों में अनेकों सुधार किये जो ‘कोड नेपोलियन’ के नाम से प्रसिद्ध हैं।
नेपोलियन ने, जब वह सेंट हेलेना में कैद था, स्वयं कहा था कि ‘मेरा सच्चा गौरव इसमें नहीं है कि मैंने चालीस युद्ध जीते क्योंकि वाटरलू की हार इन विजयों को कलंकित कर देगी परंतु जिसको कोई नहीं कलंकित कर सकता तथा जो सदा रहेगा वह मेरा सिविल कोड है।
आज भी फ्रांस, जर्मनी, हॉलैंड, बेल्जियम, इटली और दक्षिणी अमेरिका के देशों में ये कानून कुछ परिवर्तनों के साथ लागू हैं।
उसने प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी एवं व्यापारिक शिक्षा की व्यवस्था की। उसने अध्यापकों को राजकोष से वेतन देने की पद्धति शुरू की।
उसने यातायात की सुविधा और व्यापार के विकास के लिए फ्रॉस में सड़कों का जला बिछाया, नहरें बनवाई तथा पेरिस को एक अति सुंदर नगर बना दिया। उसने 1800 ई० में ‘फ्रॉस के बैंक’ की स्थापना की।
उसने सभी को योग्यता के आधार पर उन्नति करने के अवसर प्रदान किये। वह
निष्पक्ष होकर राज्य-कर्मचारियों की नियुक्ति करता था। वह समाज में रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और विशेष अधिकार नहीं पनपने देता था।
फ्राँसीसी क्रांति एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान – (इतिहास)
7 ओलम्प दे गूज के घोषणापत्र में उल्लिखित मूलभूत अधिकार का वर्णन करें।
उत्तर-ओलम्प दे गूज के घोषणापत्र में उल्लिखित मूलभूत अधिकार-
(क) औरत जन्गना स्वतंत्र है और अधिकारों में पुरुष के समान है।
(ख) सभी राजनीतिक संगठनों का लक्ष्य पुरुष एवं महिला के नैसर्गिक अधिकारों को संरक्षित करना है ये अधिकार है- स्वतंत्रता, संपत्ति, सुरक्षा और सबसे बढ़कर शोषण के प्रतिरोध का अधिकार।
(ग) समग्र संप्रभुता का स्त्रोत राष्ट्र में निहित है जो पुरुषों एवं महिलाओं के संघ के सिवाय कुछ नहीं है।
(घ) कानून सामान्य इच्छा की अभिव्यक्ति होनी चाहिए। सभी महिला एवं पुरुष नागरिकों का या तो व्यक्तिगत रूप से या अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि-निर्माण में दखल होना चाहिए।
यह सभी के लिए समान होना चाहिए। सभी महिला एवं पुरुष नागरिक अपनी योग्यता एवं प्रतिभा के बल पर समान रूप से एवं बिना किसी भेदभाव के हर तरह के सम्मान व
सार्वजनिक पद के हकदार हैं।
(ङ) कोई भी महिला अपवाद नहीं है। वह विधिसम्मत प्रक्रिया द्वारा अपराधी ठहरायी जा सकती है, गिरफ्तार और नजरबंद की जा सकती हैं पुरुषों की तरह महिलाएँ भी इस कठोर कानून का पालन करें।

फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 प्रश्न उत्तर क्लास ९

8 1791 के फ्रांस के संविधान की मुख्य विशेषताएँ लिखें।
उत्तर-फ्रांस के 1791 के संविधान की मुख्य विशेषताएँ-
(क) फ्रॉस के संविधान ने कानून बनाने संबंधी सभी शक्तियाँ नेशनल एसेम्बली को दे दिया जिसके सदस्यों का अप्रत्यक्ष रूप से चयन होता था।
(ख) फ्रांस के नागरिकों ने निर्वाचक मण्डल या समूह के लिए मतदान किया जिसने (निर्वाचक समूह ने) सभा का चुनाव किया। लेकिन यही सत्य है कि सभी नागरिकों को मताधिकार नहीं दिया गया। केवल 25 वर्ष से ऊपर वाले पुरुषों को ही मताधिकार मिला जो सरकार को एक मजदूर के तीन दिनों की मजदूरी के समान कर दिया करते थे
उन्हें सक्रिय नागरिक कास्तर मिला। इसका अर्थ था कि उन्हें मत देने का अधिकार मिल गया। फ्रॉस के शेष सभी पुरुषों एवं नारियों को निष्क्रिय नागरिक श्रेणी में रखा गया।
(ग) एक निर्वाचक कर्ता एवं राष्ट्रीय सभा का निर्वाचित सदस्य, वह आदमी होता था जो सर्वाधिक कर भुगतानकर्ताओं की श्रेणी में आता था।
(घ) यह संविधान व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकारों की घोषणा के साथ शुरू हुआ। अधिकार जैसे कि जीवन का अधिकार, भाषण की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून के सामने समानता, स्वाभाविक एवं नागरिक को देय माने गये जो जन्म से ही हर व्यक्ति (मानव) से जुड़े हुए हैं और ये अधिकार छीने नहीं जा सकते।
(ङ) इस संविधान ने घोषित किया कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक नागरिक के प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करें।
फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 NCERT Solutions for History Class 9th Chapter 1
9 ‘फ्रॉस की एक डिरेक्ट्री का शासन’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर-फ्राँस की एक डिरेक्ट्री का शासन-
(क) डिरेक्ट्री का गठन- जैकोबिन सरकार के पतन ने फ्रॉस के अधिक सम्पत्तिवान मध्यम वर्गों को राजनीतिक सत्ता हथियाने की अनुमति दी।
एक नया संविधान लागू किया गया था जिसने फ्रांसीसी समाज के बिना संपत्ति वाले सामाजिक वर्गों के लोगों को मताधिकार नहीं प्रदान किया।
(ख) नये संविधान ने दो निर्वाचित की जाने वाली विधान परिषदों की व्यवस्था की। इन सभाओं ने चुनाव के बाद तब एक डिरेक्ट्री को नियुक्त किया।
इस डिरेक्ट्री ने पाँच सदस्यों वाली एक कार्यकारिणी के हाथों में शक्तियाँ केन्द्रित न हों। जैसे कि जैकोबिन के अधीन राजनीतिक शक्तियों केन्द्रित होती थीं।
(ग) जो भी हो, इस डिरेक्ट्री के सदस्यों ने प्रायः विधायी परिषदों के साथ झगड़ा किया, तब उसने इन्हें (अर्थात् निर्देशकों) पदों से अलग करने की माँग की।
(घ) डिरेक्ट्री की राजनीतिक अस्थिरता ने सैनिक तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट के उत्थान के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
(ङ) सरकार के रूप में उपरलिखित परिवर्तनों के साथ आने वाली शताब्दी में फ्रॉस की क्रांति अपने आदर्शों-स्वतंत्रता, देश के कानून के सामने समानता और भाईचारे की भावना से ओत-प्रोत फ्रॉस तथा शेष यूरोप के लिए राजनीतिक आंदोलनों को शुरू करने वाली प्रेरणा बनी रही।
फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 NCERT Solutions, पाठ – 1  (कक्षा नवीं), सामाजिक विज्ञान
10 ‘फ्रॉस में दासता का उन्मूलन विषय पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर-दासता का उन्मूलन-
(क) संपूर्ण फ्रॉस में 18 वीं शताब्दी में दासता की बहुत ही थोड़ी आलोचना हुई। फ्रॉस की राष्ट्रीय असेम्बली ने लम्चे वाद-विवाद किये कि क्या आदमी के अधिकारों का विस्तार फ्रांस के सभी उपनिवेशों के लोगों सहित विस्तृत कर दिया जाये अथवा नहीं।
हमें याद रखना चाहिए कि उस समय इंग्लैंड के बाद फ्राँस का औपनिवेशिक साम्राज्य विश्व में सर्वाधिक विस्तृत था।
(ख) व्यापारी लोगों जिनकी आमदनी दास व्यापार पर ही निर्भर थी, से भारी विरोध होने के डर से राष्ट्रीय असेम्बली ने कोई भी कानून पास नहीं किया।
(ग) सन् 1794 में फ्रांस की सभा ने एक कानून पास करके सभी दासों को स्वतंत्र कर दिया। जो भी हो यह एक अल्पकालिक उपाय साबित हुआ। दस वर्षों के बाद नेपोलियन बोनापार्ट ने दासता को दुबारा मान्यता दे दी।
(घ) फ्रॉस के बागान मालिकों ने लोगों को दास बनाना अपना अधिकार समझा तथा अपने आर्थिक स्वार्थों के लिए आफ्रीकी नीयो को गुलाम बनाए रखा।
(ङ) अंततः 1848 में फ्रॉस के उपनिवेशों से दासता को समाप्त कर दिया गया। JAC BOARD
फ्राँसीसी क्रांति पाठ 1 NCERT Solutions

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