यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति पाठ 2 लघु उत्तरीय प्रश्न Ncert Solution For Class 9th

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यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति पाठ 2 लघु उत्तरीय प्रश्न Ncert Solution For Class 9th के इस ब्लॉग पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पोस्ट में आज हम पढ़ने वाले हैं, इस पाठ से संबंधित जितने भी महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी प्रश्न है |
जो पिछले कई परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं, उन सभी प्रश्नों को इस पोस्ट पर कवर किया गया है, उम्मीद है, इस तरह की प्रश्न आने वाले परीक्षा में भी पूछे जा सकते हैं, इसलिए यदि आप इस पेज पर हैं, तो कृपया करके पूरा ब्लॉग पढ़ें ताकि आपको सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के जवाब यहीं पर मिल जाए |

यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति का प्रश्न उत्तर, Ncert Solution Class 10th

1 सोवियतों की उन तीन मांगों को लिखें जिनकी वजह से जार का पतन हुआ था ।
उत्तर- (क) देश में शांति स्थापित की जानी चाहिए तथा देश में हर वास्तविक काश्तकार को ही जमीन दी जाए।
(ख) देश के सभी उद्योग पूर्णतया मजदूरों के नियंत्रण में हो।
(ग) गैर-रूसी समुदायों को समान स्तर दिया जाए तथा संपूर्ण शक्तियों केवल सोवियतों के हाथों में ही दी जानी चाहिए।
2 कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो (साम्यवादी घोषणा-पत्र) नामक दस्तावेज क्रांतिकारी क्यों था?
उत्तर-साम्यवादी घोषणा-पत्र का समाजवादी आंदोलन पर बड़ा भारी प्रभाव पड़ा था। सन् 1840 ई० में कम्युनिस्ट घोषणा पत्र को कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने लिखा था। उनके विचारों से दासता, सामन्तवाद और पूंजीवाद सब एक समान है।
उनका जोर मजदूरों के हितों की ओर अधिक था न कि मिल मालिकों के हितों की और। वे व्यक्ति के काम के अनुसार उसे विशेषाधिकार देने के पक्ष में थे, न कि जन्म या वंशानुगत के अनुसार विशेषाधिकार देने के पक्ष में।
3 उग्रवादियों (गरमपंथी) की विचारधारा क्या थी ?
उत्तर- उग्रवादियों की विचारधाराएँ-
(क) यूरोप में लोगों का यह समूह जो अपने देश में एक ऐसी सरकार स्थापित करने के लिए हर कदम उठाने के लिए तैयार था जो लोगों के बहुमत पर अवलम्बित हो।
(ख) इस समूह के कुछ लोग महिलाओं को मताधिकार दिए जाने के समर्थक भी थे।
(ग) ये चरमपंथी बड़े-बड़े भूमि स्वामियों एवं धनी कारखाना मालिकों को विशेषाधिकार दिए जाने के घोर विरोधी थे।
(घ) उग्रपंथी निजी संपत्ति को बनाये रखने के विरोधी नहीं थे लेकिन वे कुछ ही लोगों के हाथों में सम्पदा के केन्द्रीयकरण के घोर विरोधी थे।
4 1905 की क्रांति के बाद रूस के जार निकोलस द्वितीय द्वारा आरम्भ किए गए दो सुधारों का वर्णन करें।
उत्तर-रूस का जार निकोलस द्वितीय पक्का तानाशाह था। परन्तु जब रूस में 1905 ई० की क्रांति हुई तो वह सुधार करने के लिए तैयार हो गया।
(क) उसने लोगों को स्वतंत्रता से अपने विचार अभिव्यक्त करने और संघ बनाने की स्वतंत्रता दे दी और प्रेस से भी अंकुश हटा लिये।
(ख) वह यह भी मान गया कि कानून लोगों की चुनी हुई संस्था द्वारा बनाए जायेंगे, जिसे ड्यूमा कहा जाता था।
5 बोल्शेविक कौन थे?
उत्तर-यह रूस के औद्योगिक मजदूरों की एक राजनीतिक पार्टी थी जिसका नेता लेनिन था। इस पार्टी के साथ औद्योगिक मजदूरों का अधिक भाग था इसलिए इसे बहुसंख्यक गुट या बोल्शेविक गुट कहा जाता है।
यह गुट क्रांतिकारी विचारधारा में विश्वास रखता था। उनका विचार था कि जिस देश में न तो संसद हो और न ही नागरिकों को कोई जनतांत्रिक अधिकार दिए गए हों वहाँ शान्तिमय ढंग से कोई परिवर्तन नहीं लाये जा सकते। यह पार्टी ही अंत में 1917 ई० में रूस में एक सफल क्रांति लाने में कामयाब हुई।

यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति का प्रश्न उत्तर, Ncert Solution notes

6 रूस में केरेन्स्की सरकार क्यों अलोकप्रिय हो गई थी?
उत्तर-(क) वह जनता की नब्ज को महसूस करने में विफल रहा।
(ख) लोग शान्ति चाहते थे लेकिन वह युद्ध जारी रखना चाहता था।
(ग) गैर-रूसी जनता ने उसकी सरकार के अधीन समान स्तर पाना चाहा जिसे देने में वह हिचकिचा रहा था याद रहे इस विषय में बोल्शेविक दल की नीतियों पूर्णतया स्पष्ट एवं लोकप्रिय थीं।
7 रूस के इतिहास में कौन-सी घटना ‘खूनी रविवार के नाम से जानी जाती है ?
अथवा. ‘लाल रविवार’ अथवा ‘खूनी रविवार के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-सन् 1905 में रूसी क्रांतिकारी आंदोलन जोर पकड़ रहा था। 7 जनवरी (रविवार) 1905 में मजदूरों का एक समूह जार की याचिका देने के लिए जा रहा था।
मजदूरों के इस समूह पर सेंट पीटर्सबर्ग ने निकट गोलियाँ चलाई गई जिससे हजारों मजदूर (स्त्रियाँ, पुरुष व बच्चे) घटना स्थल पर ही मारे गये और इससे भी अधिक घायल हो गये। यही घटना रूस के इतिहास में ‘खूनी रविवार’ या लाल रविवार के नाम से जानी जाती है।
8 मेन्शेविक पार्टी के क्या उद्देश्य थे ?
उत्तर-यह रूस के औद्योगिक मजदूरों का एक अन्य राजनीतिक दल था जो परिवर्तन लाने के लिये शान्तिमय ढंग अपनाने के पक्ष में था न कि क्रांतिकारी ढंग अपनाने के पक्ष में। इस दल के साथ औद्योगिक मजदूरों की कम गिनती थी।
इसलिए इस दल को अल्पसंख्यक दल या मेन्शेविक गुट कहा जाता था। यह दल यूरोप के विशेषकर फ्राँस और जर्मनी के राजनीतिक दलों की भांति चुनाव में भाग लेकर विधान मण्डल या संसद आदि का निर्माण करना चाहता था। परंतु इस दल को कोई विशेष सफलता प्राप्त न हुई क्योंकि रूस का जार संवैधानिक ढंग पर चलने वाला न था।
9 फरवरी क्रांति में रूस की जनता की चार मुख्य माँगें क्या थी ?
उत्तर-फरवरी क्रांति में रूस की जनता की चार मुख्य माँगें थी-
(क) शान्ति अर्थात् प्रथम विश्व युद्ध से रूस अलग हो जाए।
(ख) जोतने वालों को ही जमीन दी जाए। चर्च, पादरियों, सामन्तों से भूमि छीन ली जाए।
(ग) उद्योगों पर मजदूरों का नियंत्रण।
(घ) गैर-रूसी जातियों को समानता का दर्जा ।
10 अक्टूबर क्रांति फरवरी क्रांति से कैसे भिन्न है ? इसके क्या परिणाम निकले?
उत्तर-यह क्रांति का दूसरा दौर था। यह क्रांति नवम्बर मास में हुई परन्तु उसे अक्टूबर क्रांति का नाम दिया जाता है क्योंकि प्राचीन रूसी कैलेण्डर अंतर्राष्ट्रीय कैलेंडर से आठ दिन पीछे था।
फरवरी क्रांति के पश्चात् रूस की राजसत्ता केरेंस्की नामक नेता ने संभाली परंतु वह लोगों की इच्छाएँ पूरी न कर सका, उद्योगों पर मजदूरों का अधिकार स्थापित न करा सका, किसानों को भूमि न दिला सका इसलिए नवम्बर 1917 ई० को रूस में दुवारा क्रांति हुई।
अस्थायी सरकार को भंग कर दिया गया। केरेंस्की देश छोड़कर भाग गया और शासन की बागडोर लेनिन के हाथ में आ गई।

यूरोप में समाजवाद एवं रूस की क्रांति से संबंधित प्रश्न उत्तर

11 कम्युनिस्ट इंटरनेशनल का क्या महत्व था ?
उत्तर-कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के शीघ्र ही पश्चात् 1919 ई० में की गई। इस संस्था ने साम्यवाद को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने का प्रयत्न किया।
इसके प्रभावाधीन अनेक देशों में साम्यवादी संगठनों की स्थापना हुई और विश्व के अनेक प्रजातंत्रीय देशों ने राजनीतिक समानता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक समानता लाने का भी प्रयत्न किया। द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रारम्भ होते ही सारा संसार युद्ध के भयंकर वातावरण में उलझगया और इस प्रकार 1943 ई० में कम्युनिस्ट इंटरनेशनल को भंग कर दिया गया।
12 रूस की 1917 की क्रांति के दो राजनैतिक कारण बताएँ।
उत्तर-रूस की 1917 की क्रांति के दो राजनीतिक कारण-
(क) 1905 ई० की क्रांति- सन् 1905 की रूसी क्रांति को 1917 की क्रांति की जननी कहा जाता है। 22 जनवरी, 1905 को मास्को में एक माँग पत्र को लेकर मजदूरों व कृषकों द्वारा शान्तिपूर्ण ढंग से एक जुलूस निकाला जा रहा था कि जार की सेना ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चला दी।
फलस्वरूप 1000 लोग मारे गये, हजारों लोग घायल हुए और 60 हजार लोगों को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया गया। जगह-जगह हड़तालें तथा दंगे हुए। जार ने दमन के द्वारा क्रांति दबा दी किन्तु क्रांति की ज्वाला अन्दर ही अन्दर सुलगती रही और 1917 में एक महान क्रांति के रूप में प्रकट हुई।
(ख) जार का अत्याचारी शासन-जार एक निरंकुश शासक था। वह साम्राज्यवादी नीति में विश्वास रखता था। निरन्तर युद्धों के कारण रूस आर्थिक संकट में फंस गया था। लोगों को जार का शासन असहनीय होता जा रहा था। वह लोगों पर तरह-तरह के अत्याचार करता था। अतः अत्याचारी शासन ने भी 1917 की क्रांति को लाने में सहायता की।
13 लेनिन के अनुसार, रूसी क्रांति को सफल बनाने के लिए कौन दो परिस्थितियाँ आवश्यक थीं?
उत्तर-लेनिन के अनुसार रूसी क्रांति को सफल बनाने के लिये निम्नांकित दो परिस्थितियों आवश्यक थी-
(क) तानाशाही समाप्त होनी चाहिए जिसका अर्थ है कि रूस के जार को हटाना होगा अन्यथा वह रूस की क्रांति के मार्ग में अनेक अड़चनें पैदा करेगा।
(ख) रूस को प्रथम विश्वयुद्ध से अलग हो जाना चाहिए क्योंकि शान्ति स्थापित किये बिना कुछ प्राप्त होने वाला नहीं। क्रांति के लाभ तो युद्ध के वातावरण में कभी भी प्राप्त नहीं हो सकते।
14 रूस की अक्टूबर 1917 की क्रांति में बोल्शेविक दल ने किस प्रकार योगदान दिया था ?
उत्तर-बोल्शेविक पार्टी ने युद्ध (प्रथम विश्व युद्ध) को समाप्त करने के लिए स्पष्टतया अपनी नीतियाँ रखीं, भूमि का किसानों को हस्तान्तरण तथा यह नारा आगे बढ़ाया कि “सभी शक्तियाँ सोवियतों को’।
गैर-रूसी नागरिकों के मामले पर बोल्शेविक ही केवल मात्र ऐसी पार्टी थी जिसकी नीतियाँ पूर्णतया स्पष्ट थीं। लेनिन ने लोगों के इस अधिकार की घोषणा की कि आत्म-निर्णय का अधिकार, उन सभी को भी है जो रूसी साम्राज्य के अधीन (उपनिवेश के रूप में) हैं।

यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति का प्रश्न उत्तर

15 किसानों की हीन दशा 1917 ई० की रूसी क्रांति के लिए कहाँ तक उत्तरदायी थी?
अथवा. 1917 की रूसी क्रांति से पहले रूस में कृषकों की दशा का वर्णन करें।
उत्तर-1861 ई० से पहले रूस में सामन्त प्रथा थी।
तब किसान भूमिदास के रूप में जमीनों को जोतते-बोते थे परंतु वे भूमि की उपज का अधिकांश भाग सामन्तों को विशेषकर रूस के शासक, जिसको जार कहते थे, को दे देते थे। इन पर करों का भी बड़ा बोझ था।
यद्यपि 1861 ई० में सामन्त-प्रथा समाप्त कर दी गई फिर भी रूस के किसानों की दशा बहुत खराब रही क्योंकि उनके पास छोटे-छोटे खेत थे जिन पर पुराने तरीकों से खेती की जाती थी। उन पर ऋणों का बोझ रहता था तथा खेती की दशा सुधारने के लिए उनके पास धन न था।
इस कारण किसानों को, जो देश की जनसंख्या के 75% थे, दो समय भोजन भी नहीं मिल पाता था। इस प्रकार किसानों की हीन दशा तथा भूमि के लिए उनकी भूख 1917 ई० की क्रांति का एक प्रबल (सामाजिक) कारण सिद्ध हुई।
16 1917 की क्रांति से पूर्व ऐसा क्यों कहा जाता था कि रूस पुरानी दुनिया में रह रहा था।
उत्तर-रूस पर अभी भी सामन्तवादी कुलीन वर्गों द्वारा शासन किया जाता था और नये उदित हो रहे मध्यम वर्ग रूस के शासन में कोई भूमिका नहीं थी।
जार का शासन निरंकुश तथा स्वेच्छाचारी था। जार अभी भी राजाओं के दैविक शक्ति सिद्धांत में विश्वास रखता था।
17 रूस के इतिहास में 9 जनवरी, 1905 का क्या महत्त्व है?
उत्तर-(क) 9 जनवरी, 1905 रूस की 1917 की क्रांति का पूर्वाभ्यास बन गया।
(ख) इस दिन हजारों शान्तिपूर्ण कार्यकर्ता (श्रमिक) मारे गये तथा रूस की सेनाओं के द्वारा इतने ही बुरी तरह घायल कर दिये गये, जबकि वे उसे (जार को) एक माँग-पत्र देने जा रहे थे।
(ग) इससे सेना तथा नौसेना सहित संपूर्ण रूस में हलचल पैदा हो गई। इसने लोगों को क्रांति के लिए तैयार किया।
18 रूस में 1905 में क्रांतिकारी उथल-पुथल क्यों पैदा हुई थी? क्रांतिकारियों की क्या माँगें थीं?
उत्तर-आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं और वास्तविक वेतनों में 20 प्रतिशत तक की गिरावट आई थी। प्युतिलोव आयरन वर्क्स से अनेक श्रमिकों को निकाल दिया गया था। इसीलिए मजदूर स्त्रियाँ, पुरुष तथा बच्चे शांतिपूर्ण ढंग से एक जुलूस के रूप में जार को ज्ञापन देने जा रहे थे।
फादर गैपॉन इनके नेता थे। परंतु विंटर पैलेस पहुंचने से पूर्व ही पुलिस द्वारा उन पर गोलियां बरसाई गईं, जिससे 100 से अधिक मजदूर मारे गए व 300 से अधिक घायल हुए। रूस में 1905 की क्रांतिकारी उथल-पुथल इसी कारण से हुई थी।
क्रांतिकारियों की माँगे थीं- केवल आठ घंटे काम, वेतनों में वृद्धि तथा कार्य स्थितियों में सुधार
यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति पाठ 2 इतिहास कक्षा 9 पाठ 2 सवाल जवाब
19 बोल्शेविक पार्टी का 1917 की रूस की क्रांति लाने में क्या हाथ है ?
उत्तर-अक्टूबर 1917 में रूस की क्रांति लाने में बोल्शेविक पार्टी की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही-
(क) लेनिन द्वारा अंतरिम सरकार का भंग किया जाना- फरवरी 1917 ई० में रूस में जो क्रांति हुई उसके परिणामस्वरूप वहाँ राजकुमार केरेंस्की के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार की स्थापना की गई। परन्तु यह सरकार लोगों की इच्छाओं को पूरा न कर सकी इसलिए इसने शीघ्र ही लोगों का सहयोग खो दिया।
इस अवसर पर लेनिन ने बोल्शेविक पार्टी का पुनर्गठन किया क्रांति का रूप केरेस्की की सरकार की ओर किया और उसे जबरदस्ती भंग कर दिया। राजकुमार केरेस्की भाग खड़ा हुआ और इस प्रकार सरकार की बागडोर बोल्शेविक पार्टी के हाथ में आ गई। इस प्रकार अक्टूबर 1917 की क्रांति सफल हुई।
(ख) किसानों और मजदूरों के हाथ में नेतृत्व सौंपना- बोल्शेविक पार्टी ने सत्ता मजदूरों और किसानों के हाथ में सौंप दी। उन्होंने जमीदारों की संपत्ति और भूमियों को छीन लिया और कइयों की हत्या कर दी। तब मजदूरों और किसानों के संघों ने गाँवों और नगरों के स्थापित प्रशासन को संभाल लिया।
20 फरवरी क्रांति से क्या तात्पर्य है? इसे ऐसा क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-फरवरी क्रांति- यह क्रांति रूसी पंचांग के अनुसार 27 फरवरी, 1917 को हुई। अतः इसे ‘फरवरी क्रांति के नाम से जाना जाता है।
रूस के तत्कालीन शासक जार निकोलस द्वितीय बिना किसी तैयारी के मित्र राष्ट्रों के साथ प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया परन्तु बिना हथियारों, वर्दी, रसद तथा कुशल नेतृत्व के रूसी सेना की पराजय ही नहीं हुई, बल्कि भारी संख्या में रूसी सैनिक मारे गये। देश में भोजन की कमी हो गई। अतः देश में अशान्ति तथा अराजकता फैल गई।
जनता रोटी और कुशासन का अंत चाहती थी। जार को सिंहासन छोड़ने पर मजबूर किया गया और राजकुमार केरेन्स्की के नेतृत्व में अस्थायी सरकार की स्थापना की गई।
इतिहास कक्षा 9 पाठ 2 question answer in Hindi
21 ‘अक्टूबर क्रांति’ का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-अक्टूबर क्रांति- यह क्रांति का दूसरा दौर था। पुराने रूसी कैलेण्डर के अनुसार यह क्रांति
25 अक्टूबर से प्रारम्भ हुई।
फरवरी क्रांति के बाद रूस की राजसत्ता केरेन्स्की ने संभाली थी, परन्तु वह जनता की इच्छाएँ एवं आवश्यकताएँ पूरी न कर सका। वह उद्योगों पर मजदूरों का अधिकार स्थापित न करा सका, किसानों को भूमि न दिला सका, अतः अक्टूबर में पुनः क्रांति हो गई।
अस्थायी सरकार को भंग कर दिया गया। केरेन्स्की देश छोड़कर भाग गया और शासन की बागडोर लेनिन के हाथ में आ गई।
22 स्तालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम क्या था ? वर्णन करें।
उत्तर– स्तालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम-
(क) सभी किसानों को सामूहिक खेतों में काम करने का आदेश कर दिया।
(ख) ज्यादातर जमीन और साजो-समान सामूहिक खेतों के स्वामित्व में सौंप दिए गए।
(ग) सामूहिकीकरण के बावजूद उत्पादन में नाटकीय वृद्धि नहीं हुई बल्कि 1930-1933 की खराब फसल के बाद तो सोवियत इतिहास का सबसे बड़ा अकाल पड़ा जिसमें 40 लाख से ज्यादा लोग मारे गए।jac board 

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