देशप्रेम, देश भक्ति, देशभक्त या देश की सेवा

देशप्रेम पर निबंध, परिचय

देशप्रेम पर निबंध के परिचय के माध्यम से हमें मालूम होता है, की धरती की हर प्राणी अपनी मातृभूमि या जन्मभूमि से जुड़ा ही होता है। वह इससे अपना अलग अस्तिव नहीं मानता है । मनुष्य इस धरती में कहीं भी चला जाये,या विदेश भी क्यों न चला जाए पर उन्हें विदेशों में कितनी ही सुख भले ही मिले, पर वह वापस अपने देश आना जरूर चाहता है।

वह अपना देश, अपनी जन्मभूमि कभी नहीं भूलता है। मनुष्य की तरह ही पशु पक्षी भी अपनी जन्मभूमि के स्नेह प्यार के बंधन एवं आकर्षण में बंधे होते हैं।इसलिए पक्षी पशु या कोई भी प्राणी सारा दिन अपनी भूख मिटाने के लिए दाना पानी की खोज में यहाँ वहाँ घूमते जरूर हैं। पर रात होते ही अपने अपने जगहों पर पहुँच जाते हैं। देशप्रेम पर निबंध में हम जानेंगे –

  • देशप्रेमियों से मिलाने प्रेरणा
  • देश प्रेम किसे कहते है
  • देशप्रेम का महत्व
  • देशप्रेम- एक उच्च भावना
  • राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक
  • सार्वभौम एवं सार्वजनिक भावना

देशप्रेमियों से मिलाने प्रेरणा ।

देशप्रेम पर निबंध के माध्यम से हमें पता चलता है की देश प्रेम की भावना मनुष्य के हदय को देशभक्ति से ओत प्रोत कर देती है, और समय आने पर वह अपनी सब कुछ देश सेवा के लिए त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहते है। इतिहास को झांक कर देखने से हमे पता चलता है की देशभक्तों के बलिदान की गाथाओं का कई उदहारण भरा पड़ा है।

वे सभी देशप्रेमियों को सम्मान और स्नेह दिया जाता है। हमारे देश भारत के कवियों और साहित्यकारों ने शहीदों और देश के लिए मर मिटने वाले देशभक्तों की अमर गाथाओं, कहानियों एवं उनके जीवनियों को जी खोल कर विस्तार से सरल भाषा लिखा है।ताकि देश प्रेम से ओत पोत देशभक्तों को प्रेरणा मिल सके ।

देशभक्ति के उदाहरण केवल ये शहीद होने वाले सिपाही,पुलिस,आर्मी, दरोगा ही नहीं हैं। बल्कि देश का नाम को सारे विश्व में रोशन करने वाले वैज्ञानिक, खिलाड़ी, कवि, गायक, वादक,डॉक्टर,इंजीनियर और लेखक भी महान देशभक्तों की गिनती में आते हैं। ऐसे बहुत से समाज सुधारकों, कलाकारों और समाज सेवकों के कार्यों या उनके योगदान का उदहारण भरा पड़ा है, जिन्होंने देश की उन्नति के लिये अपना सार जीवन त्याग कर दिया। हमारे देशवाशियों का उन्हें शत- शत नमन हैं। हमारे देश भारत उनकाहमेशा ऋणी बना रहेगा।

देश प्रेम किसे कहते है?

देशप्रेम पर निबंध से पता चलता है की देश का महत्व, देशप्रेम-एक उच्च भावना, राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक। जिस देश में हम जन्में है, जिसकी धरती का हमने अन्न-जल लिया ,हम खेल-कूद कर बड़े हुए है, उसके प्रति हमारा स्वाभाविक हो जाता है। वही स्वाभाविक लगाव देशप्रेम कहलाता है। देशप्रेम का देश के कण-कण से प्रेम होना, उसके पेड-पौधे, पत्थर, जीव-जंतु और सभी मानवों से प्रेम होना। कुछ लोग देश के लिए मरनेवालों को ही देशप्रेमी मानते हैं। यह धारणा गलत है। असली देशप्रेमी वही है, जो स्वदेश हित के लिए जीता है। 

देशप्रेम पर निबंध में देशप्रेम का महत्व

 संस्कृत की उक्ति है- ‘

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी 

अर्थात माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं। बिना स्वदेश के जीवन धारण करना ही कठिन है। इसलिए देश को माँ की संज्ञा दी जाती है। जिस प्रकार हमारे अपनी माँ के प्रति कुछ कर्तव्य और स्नेह-संबंध होते हैं. वैसे ही अपने देश के प्रति भी कुछ दायित्व होते हैं। देश-भावना से शून्य व्यक्ति तो समाज पर बोझ होता है।

मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार-

है भरा नहीं जो भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं।

वह हृदय नहीं, वह पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।। 

देशप्रेम- एक उच्च भावना

देशप्रेम की भावना बड़ी उच्च भावना है। उसी भावना से प्रेरित होकर देशभक्त अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देते हैं। क्या नहीं था महाराणा प्रताप के पास ? धन, धरती, वैभव, सिंहासन और यदि वे मानसिंह की भाँति अकबर से समझौता कर लेते तो और भी क्या नहीं मिलता? लेकिन फिर वह कौन-सी तड़प थी कि हल्दी घाटी की तीव्र अभिलाषा।

स्वतंत्रता संग्राम के समय कितने ही देशभक्तों ने जेल की यातनाएँ भोगी, हँसते-हँसते लाठियाँ खायीं, दिन का चैन और रात की नींद गॅवाई और सहर्ष फाँसी के तख्तों को चूम लिया। यह देशप्रेम ही तो था कि लाला लाजपतराय ने छाती चौड़ी कर क्रूर अंग्रेजों की लाठियाँ खाई, सुभाष बाबू ने विदेश में जाकर आजाद हिंद फौज का गठन किया तथा नेहरू ने ऐश्वर्य और वैभव के जीवन को ठुकरा दिया। संसार के अन्य देशों के इतिहास भी देशप्रेम की गाथाओं से रँगे पड़े हैं।

राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक

 देश प्रेम की भावना राष्ट्रीय एकता के लिए परम आवश्यक है। आज देश जाति, धर्म, भाषा, वर्ण, वर्ग, प्रांत दल आदि के नाम पर बँटा हुआ है। ऐसे समय में देशभक्ति की भावना इस टूटन और बिखराव को दूर करके सारे देश को एकजुट कर सकती है। 

सार्वभौम एवं सार्वजनिक देश प्रेम

सभी मनुष्य के ह्रदय में देशभक्त की भावना होती हैं,और सभी के हृदय में मातृभूमि के प्रति प्रेम होता ही है, किन्तु मनुष्य अपने दैनिक जीवन के कार्यों में इतना व्यस्त रहता है, कि उसकी यह भावना दब-सी जाती है।जब कोई योग्य नेता या देशभक्त उन्हें मिल जाता है तो उनके अंदर देशप्रेम की भावना जाग्रत होने लगाती है ।