नियंत्रण एवं समन्वय कक्षा 10 विज्ञान के नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर class 10

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नियंत्रण एवं समन्वय (control and coordination class 10 ) महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर

control and coordination class 10 नियंत्रण एवं समन्वय कक्षा 10 विज्ञान के नोट्स, महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर के इस सीरीज में आप सभी विद्यार्थियों के लिए इस पाठ से संबंधित जितने भी महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न पाठ के अंतर्गत दिए गए हैं , उन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के हल आपको इस ब्लॉग पोस्ट में पढ़ने के लिए मिलेगा इस ब्लॉग पोस्ट में करीब 50 से अधिक प्रश्नों का हल पढ़ने के लिए मिलेगा जो आने वाले सभी परीक्षाओं के लिए एक विद्यार्थी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, इसलिए इस पोस्ट में दिए गए सभी प्रश्नों का अध्ययन विद्यार्थियों को अवश्य करना चाहिए ताकि उन्हें आने वाली परीक्षाओं में इस पाठ से संबंधित प्रश्नों को लेकर किसी प्रकार की कोई समस्या ना हो |

नियंत्रण एवं समन्वय (samanvay meaning in hindi)

class 10 biology notes control and coordination

1 नियन्त्रण और समन्वय क्या है ? या  नियंत्रण एवं समन्वय किसे कहते है? या नियंत्रण एवं समन्वय की परिभाषा?
उत्तर-जीवधारियों के शरीर में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध ऐसी रासायनिक और शरीर क्रियात्मक व्यवस्था जिसके द्वारा शारीरिक क्रियाएँ आवश्यकतानुसार नियन्त्रण में रहती हैं और विभिन्न अंगों के बीच आपसी ताल-मेल बना रहता है, नियन्त्रण और समन्वयन कहलाती है।
2 एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाएँ तथा इसके कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर-तंत्रिका कोशिका के कार्य- न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। इसके मुख्य तीन भाग होते हैं-
(i) द्रुमिका, (ii) कोशिकाकाय, (iii) तंत्रिकाक्ष।
द्रुमिका, केन्द्रक, तंत्रिका का, अंतिम सिरा, तंत्रिकाक्ष, कोशिका काय,
सूचनाओं का आवेग द्रुमिका से कोशिकाय की ओर चलता है तथा फिर एक्सॉन में से होता हुआ सिनेप्स तक पहुंचता है। फिर इसे पार करता हुआ एक न्यूरॉन से दूसरे में गुजरता हुआ मेरुरज्जु तक पहुँचता है। इसी प्रकार सूचनाएँ मस्तिष्क से कार्यकारी अंग (पेशी, ग्रंथि) तक पहुँचती है।

control and coordination class 10 notes नियंत्रण एवं समन्वय के प्रश्न उत्तर

3 प्रतिवर्ती क्रिया किसे कहते हैं ? उदाहरण लिखें।
उत्तर-जीवधारियों में किसी दृश्य या अदृश्य, वाह्य अथवा आन्तरिक उद्दीपन के प्रभाव मे होने वाली वे अनैच्छिक क्रियायें जिनका संचालन एवं समम्वयन प्रायः मेरुरज्जु की तन्त्रिकाओं द्वारा होता है, प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहलाती हैं। उदाहरण- चौंकना, चीखना, छींक आना, डर जाना आदि।
4. प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है ?
उत्तर-मस्तिष्क शरीर का मुख्य समन्वय केन्द्र है। यह मेरुरज्जु से प्राप्त की गई सूचनाओं पर सोचने एवं उनका विश्लेषण करने का कार्य करता है। मस्तिष्क में प्रतिवर्ती क्रियाओं के संदेश भेजे जाते हैं। कुछ प्रतिवर्ती क्रियाएँ सीधे मस्तिष्क द्वारा ही नियंत्रित होती हैं। तीव्र प्रकाश में हमारे नेत्र की पुतली का संकुचित होना इसका एक उदाहरण है।
5 प्रतिवर्ती चाप किसे कहते हैं ? इसके कौन-कौन से भाग होते हैं ? इसे रेखा चित्र द्वारा दर्शाएँ।
या, प्रतिवर्ती चाप क्या हैं ? इसके कौन-कौन से घटक हैं ?
उत्तर-प्रतिवर्ती क्रिया में आवेगों के गमन-मार्ग को ही प्रतिवर्ती चाप कहा जाता है।
इसके निम्नांकित भाग होते हैं- (i) ग्राही अंग, (ii) संवेदी तंत्रिका, (iii) तंत्रिका केन्द्र,
(iv) प्रेरक तंत्रिका, (v) अभिवाही अंग।
मेरुरज्जु, संवेदी तंत्रिका, कोशिका, ग्राही, त्वचा में ग्राही, कार्यकर, भुजा में पेशी, प्रेरक तंत्रिका,
कोशिका,
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6 प्रतिवर्ती क्रिया एवं प्रतिवर्ती चाप में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-प्रतिवर्ती क्रिया- कार्यकारी अंगों का किसी उद्दीपन के प्रति अति तीव्रता से अचेतन अभिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं। प्रतिवर्ती क्रियाएँ मेरुरज्जु के द्वारा नियंत्रित होती है।
प्रतिवर्ती चाप- प्रतिवर्ती क्रिया में आवेगों के गमन-मार्ग को प्रतिवर्ती चाप कहते है।
7 मानव मस्तिष्क के कोई दो कार्य लिखें।
उत्तर-(i) शरीर की सम्पूर्ण जैविक क्रियाओं का नियन्त्रण एवं समन्वयन । (ii) शरीर की महत्वपूर्ण क्रियाओं जैसे संतुलन, स्मरण एवं ज्ञानेन्द्रियों की क्रियाशीलता पर नियन्त्रण।
8 अग्रमस्तिष्क के कार्यों का उल्लेख करें।
उत्तर-अग्रमस्तिष्क के कार्य-
(i) अग्रमस्तिष्क में संवेदी अंगों से सूचनाएँ प्राप्त की जाती है और आवेगों को कार्यकारी अंगों तक भेजा जाता है।
(ii) उद्दीपनों को ग्रहण कर अनुक्रिया अग्रमस्तिष्क द्वारा ही संपन्न होती है।
(iii) कई प्रकार की जटील मानसिक क्रियाएँ जैसे तर्क शक्ति, बुद्धि, विचार, प्रतिभा, दायित्व बोध आदि के केन्द्र अग्रमस्तिष्क में ही होते हैं।
9 स्वायत्त तंत्रिका तंत्र क्या है ? स्वायत्त तंत्रिका के क्या कार्य है ?
उत्तर- स्वायत्त तंत्रिका तंत्र- यह केन्द्रीय तंत्र से बाहर परन्तु उसी के समानान्तर स्थित होता है। यह शरीर के आंतरिक भागों जैसे- पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, मूत्रमार्ग, जनन मार्ग, रक्त नलिकाओं की पेशियों, आँख की पेशियों, हृदय की पेशियों एवं अंतःस्रावी ग्रन्थियों का नियंत्रण एवं समन्वयन करता है।
स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के कार्य-
(i) अनैच्छिक पेशियों को सिकुड़ने और फैलने का नियंत्रण,
(ii) हृदय की गति और दबाव का नियंत्रण,
(ii) आहारनाल की ग्रन्थियों के स्राव का नियंत्रण,
(iv) आँख की परितारिका के फैलने एवं संकुचित होने का नियंत्रण।
10 तंत्रिका ऊत्तक कैसे कार्य करता है ?
उत्तर-(i) तंत्रिका तंत्र अपने चारों तरफ से सूचनाएँ एकत्र कर उनको प्रवर्धित करता है और तदनुसार अनुक्रिया करता है।
(ii) तंत्रिका तंत्र एक आंतरिक तंत्र से दूसरे आंतरिक तंत्र तक सूचनाएँ पहुँचाता है।
11 हम एक अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं
उत्तर-हमारे अग्रमस्तिष्क में घ्राण केन्द्र होता है जो गंध से संबंधित सूचनाओं को प्राप्त करता हैं इसके बाद उस केन्द्र के एक अन्य भाग में उन सूचनाओं का विश्लेषण होता है। पहले से गंध के संबंध में एकत्रित सूचनाओं से प्राप्त गंध संबंधी सूचना का मिलान किया जाता है। यदि गंध के संबंध में प्राप्त सूचना पहले से एकत्रित सूचनाओं में से अगरबत्ती की गंध से मेल खाती है तो मस्तिष्क यह निष्कर्ष निकालता है कि प्राप्त सूचना अगरबत्ती की गंध से संबंधित है। इस प्रकार हमें अगरबत्ती की गंध का पता चल जाता है।

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12 मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों के आवागमन में व्यवधान होगा ?
उत्तर-(i) सभी संकेत जो मस्तिष्क से दूर या मस्तिष्क की ओर मेरुरज्जु से होकर चलते हैं, उनके आवागमन में व्यवधान उत्पन्न होगा।
(ii) प्रतिवर्ती क्रिया नहीं संपादित होगी।
13 मानव मस्तिष्क के विभिन्न भागों के नाम लिखें और कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर-मानव मस्तिष्क के विभिन्न भाग- सल्कस माइरस, प्रमष्तिष्क गोलार्ध, प्रमष्तिष्क,
मध्य मस्तिष्क, पान्स गेरौली, मेंडुला, अब्लांगेटा, सेरीबेलम।
मस्तिष्क को तीन भागों में बाँटा जाता है-
(i) प्रमस्तिष्क.
(ii) अनुमस्तिष्क,
(iii) मेडुला अब्लांगेटा।
(i) प्रमस्तिष्क के कार्य-
(a) मानसिक क्रियाएँ- जैसे- वृद्धि, विचार, स्मरणशक्ति, जागरुकता, प्रतिभा, दायित्व बोध, तर्क शक्ति, नैतिक ज्ञान और अश्वस संबंधी क्षमताएँ उत्पन्न करना।
(b) संवेदनाओं- जैसे- दर्द, गरमी, स्पर्श प्रकाश की अनुभुति, श्रवण, विषाद, गन्ध का ज्ञान कराना।
(c) स्वैच्छिक पेशियों को सक्रिय बनाना और उनकी क्रियाओं को नियंत्रित करना।
(ii) अनुमस्तिष्क- यह पेशीय गतियों को नियंत्रित करने एंव शारीरिक संतुलन बनाए रखने का कार्य करता है
(iii) मेंडुला अब्लांगेटा- यह हृदय की धड़कन रक्त परिसंचरण लार का स्राव एवं निगलने की क्रियाओं का नियंत्रण करता
14 बाह्य पर्यावरण की सूचनाओं की पहचान कौन करता है ?
उत्तर-कान, नाक, जीभ और त्वचा के अंदर पायी जाने वाली विशेष तंत्रिकाओं के शीर्षभाग जिन्हें ग्राही (रिसेप्टर) कहते हैं, वे बाह्य वातावरण की सूचनाओं को ग्रहण करते हैं।
15 पेशीय कोशिकाएँ अपना आकार कैसे बदलती हैं ?
उत्तर-यह कोशिकीय भागों के रासायनिक परिवर्तन पर निर्भर करता है। पेशीय कोशिकाओं में विशेष प्रकार के प्रोटीन पाए जाते हैं। ये प्रोटीन विद्युत-तंत्रिकीय आवेगों के प्रभाव में अपना आकार बदल लेते हैं। इसके कारण पेशीय कोशिकाओं के आकर भी बदलते हैं।
16 कुछ बहुकोशिय जीव तंत्रिकीय संचार के बजाय रासायनिक संचार का उपयोग क्यों करते हैं ?
उत्तर-कोशिकाएँ विद्युतीय आवेगों को लगातार देर तक उत्पन्न करने और भेजते रहने में समक्ष नहीं होती हैं। विद्युतीय संकेत भेजने में कोशिकाओं को अपनी व्यवस्था में परिवर्तन करना पड़ता है जिसमें समय लगता है। इस व्यवधान से बचने के लिए जीवों में तंत्रिकीय संचार के बदले रासायनिक संचार की व्यवस्था होती है।
17 तंत्रिका आवेग क्या है ? इसका संचरण तंत्रिका कोशिका के किस भाग द्वारा होता है ?
उत्तर-तंत्रिकोशिका से रासायनिक तथा विद्युत संकेतों के रूप में निकलने वाली सूचनाओं
को तंत्रिका आवेग कहते है। तंत्रिका आवेग द्रुमिका द्वारा कोशिकाकाय की ओर जाता है। तंत्रिकाक्ष एक अतिविशिष्ट तंत्रिका रेशा है, जो तंत्रिका आवेगों को अंतर्ग्रथन द्वारा एक कोशिकाय से दूसरी तंत्रिकोशिका अथवा ऊतक तक ले जाता है।
18 संवेदी तथा प्रेरक तंत्रिकाओं से क्या समझते हैं ?
उत्तर-संवेदी तंत्रिकाएँ- ऐसी तंत्रिकाएँ जिनके डेन्ड्राइट संवेदना ग्रहण करने वाले अंगों से जुड़े रहते हैं, संवेदी तंत्रिकाएँ कहलाती है। ये कोशिकाएँ आवेगों को ग्रहण करती हैं। प्रेरक तंत्रिकाएँ- लंबे तंत्रिकाक्ष वाली तंत्रिका कोशिकाओं को प्रेरक तंत्रिकाएँ कहते हैं। ये आवेगों को केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र से प्रेरक अंगों या पेशियों तक ले जाती है।
19 तंत्रिका तंत्र के दो आधार भूत घटक कौन-से हैं ?
उत्तर-तंत्रिका तंत्र के आधार भूत घटक-
(i) मस्तिष्क,
(ii) मेरुरज्जु ।
20 परिधीय तंत्रिका तंत्र क्या है। परिधीय तंत्रिका तंत्र की दो तंत्रिकाओं के नाम लिखें।
उत्तर-तंत्रिकाओं के समूह को परिधीय तंत्रिका तंत्र कहते हैं। वास्तव में मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु में अनगिनत तंत्रिकाएँ निकलती हैं जो आवेगों को लाती हैं एवं संदेशों को ले जाती हैं। मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु की इन्हीं तंत्रिकाओं को सम्मिलित रूप से परिधीय तंत्रिका तंत्र कहते हैं। परिधीय तंत्रिका तंत्र की तंत्रिकाओं के नाम-
(i) कपाल तंत्रिका, (ii) मेरु तंत्रिका।
21 प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अंतर है ?
उत्तर-प्रतिवर्ती क्रिया एक अनैच्छिक क्रिया है जो स्वतः होती है और उस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं रहता है। टहलना एक ऐच्छिक क्रिया है जिसे हम अपने अनुसार नियंत्रित और परिवर्तित करते हैं।
22 दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है।
उत्तर-तंत्रिकाक्ष से होकर आने वाला विद्युत आवेग कुछ रासायनिक पदार्थों को विमोचित कराता है जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर कहते हैं। ये रासायनिक पदार्थ अन्तर्ग्रथन (सिनेप्स) को पार करते हैं एवं अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका में समान प्रकार का विद्युत आवेग उत्पन्न करते हैं जो आगे बढ़ता है। यह आवेग अन्ततः तंत्रिका कोशिका से पेशी कोशिका या ग्रन्थि कोशिका तक जाता है।
23 पौधों में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है ?
उत्तर-पौधों में प्रकाशानुवर्तन प्रकाश-उद्दीपन के प्रभाव में अनुक्रिया के फलस्वरूप होता
है। प्रकाश से दूर वाले पादप-प्ररोह के क्षेत्र में ऑक्जीन हॉर्मोन के उच्च सांद्रण के कारण कोशिकाएँ लम्बाई में वृद्धि करती हैं और पादप प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ता है तथा बढ़ता।
24 काशानुवर्तन और गुरुत्वानुवर्तन में क्या अंतर है ?
उत्तर-प्रकाशानुवर्तन और गुरुत्वानुवर्तन में अंतर-
प्रकाशानुवर्तन
(a) पौधों का प्रकाश (सूर्य का प्रकाश) की ओर बढ़ना या गति करना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है।
(b) यह ऑक्सीन हॉर्मोन के कारण होता है।
गुरुत्वानुवर्तन
(a) पौधों की जड़ों का पृथ्वी के गुरुत्व की दिशा में बढ़ना गुरुत्वानुवर्तन कहलाता है।
(b) यह गुरुत्वाकर्षण बल के प्रति जड़ों की संवेदनशीलता के कारण होता है।
25 पौधों में उद्दीपन की दिशा में होने वाली गतियों को क्या कहते हैं ? इनके तीन प्रकारों के नाम उदाहरण सहित लिखें।
उत्तर-पौधों के उद्दीपन की दिशा में कार्य करने वाली पादप गतियों के आवेग को अनुवर्तन गति कहते हैं।
अनुवर्तन के तीन प्रकार निम्नांकित हैं-
(i) प्रकाशानुवर्तन- पौधे का प्ररोहतंत्र प्रकाश की दिशा में मुड़ जाता है।
(ii) गुरुत्वानुवर्तन- पौधे की जड़े हमेशा नीचे की ओर वृद्धि करती है।
(i) रसायनानुवर्तन- निषेचन के दौरान पराग नली की गति ।
26 पौधों में प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वाकर्षण, जलानुवर्तन और रसायनुवर्तन का एक-एक उदाहरण दें।
उत्तर-(i) प्रकाशानुवर्तन- पौधों का प्रकाश की ओर गति करना।
(ii) गुरुत्वाकर्षण- पौधों की जड़ों का पृथ्वी के गुरुत्व की दिशा में बढ़ना।
(iii) जलानुवर्तन- पौधों की जड़ों का जलस्रोत की दिशा में बढ़ना।
(iv) रसायनुवर्तन- परागनलिका का अंडाशय की ओर वृद्धि करना।

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27 हॉर्मोन किसे कहते हैं ?
उत्तर-वे रासायनिक पदार्थ जो जीवधारियों के शरीर में स्वतः संश्लेषित होते रहते हैं और जो जैविक क्रियाओं पर नियन्त्रण के साथ-साथ अंगों की कार्य प्रणालियों के बीच भी समन्वय स्थापित करते हैं, हॉर्मोन कहलाते हैं। पादप हार्मोन और जन्तु हॉर्मोन एक दूसरे से भिन्न होते हैं।
28 हॉर्मोनों की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर-(i) हार्मोनों का स्राव सीधे रक्त में होता है।
(ii) ये अन्तःस्रावी ग्रथियों में संश्लेशित किए जाते हैं।
29 पादप हॉर्मोन क्या है ? किन्हीं दो पादप हॉर्मोनों के नाम लिखें।
उत्तर-वे जटिल रासायनिक पदार्थ जिनका संश्लेषण पौधों के विभिन्न भागों में होता है, जो अपने संश्लेषण क्षेत्र से दूर स्थित क्रिया क्षेत्र में विसरण द्वारा पहुँचते हैं एवं वृद्धि, विकास तथा पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया के समन्वयन में सहायता करते हैं, पादप हॉर्मोन कहलाते हैं।
पादप हार्मोन- (i) ऑक्सिन, (ii) जिब्बेरेलिन।
30 पादप हॉर्मोन और जन्तु हॉर्मोन में दो अंतर लिखें।
उत्तर-(i) पादप हॉर्मोन दिशिक होते हैं, परंतु जन्तु हॉर्मोन दिशिक नहीं होते है।
(ii) पादप हॉर्मोन के लिए अलग से ग्रंथियाँ नहीं होती हैं, जबकि जन्तु हॉर्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों में बनते हैं।
31 दो पादप हॉर्मोन का उदाहरण दें जो वृद्धि को बढ़ाता है।
उत्तर-(i) ऑक्सिन पौधे के तने की लम्बाई को बढ़ाता है।
(ii) जिब्बेरेलिन पौधे के तने की वृद्धि करता है।
32 पादप हॉर्मोनों को नियामक क्यों कहते हैं ?
उत्तर-पादप हॉर्मोनों की सूक्ष्म मात्रा पौधों में चमत्कारिक परिवर्तन ला देती है। इनके प्रभाव से कई प्रकार की पादप क्रियाओं के बीच एक साथ समन पन स्थापित होता है। इसलिए इन्हें नियामक कहते हैं।
33 इन्सुलीन हॉर्मोन के दो कार्य लिखें।
उत्तर-इन्सुलीन हॉर्मोन के कार्य-
(i) कार्बोहाइड्रेट का उपापचय,
(i) ऊतकों में प्रोटीन के संग्रह में सहायता करना।
34 ऑक्जीन हॉर्मोन क्या है ? इसके कोई दो कार्य लिखें।
उत्तर-ऑक्जीन हॉर्मोन- यह पादप हॉर्मोनों का एक समूह है जो वृद्धि को नियंत्रण करते हैं। ये हॉर्मोन प्रायः अंकुरणशील बीजों के अंकुरों के अग्र भाग एवं जड़ों के अग्र भाग में पाए जाते हैं।
ऑक्जीन हॉर्मोन के कार्य-
(i) यह तने के शीर्षस्थ भाग में कोशिका विभाजन को तेज कर देता है जिससे
लम्बाई में वृद्धि होती है।
(ii) यह बीजों के अंकुरण को बढ़ाता है।
35 पौधों में साइटोकाइनिन कहाँ पाये जाते हैं ? उनका क्या कार्य है ?
उत्तर-साइटोकाइनिन पौधों के फलों एवं बीजों में पाया जाता है। साइटोकाइनिन वृद्धि
उत्प्रेरक हॉर्मोनों का समूह है। इस समूह के सभी हॉर्मोन मूलतः कार्बनिक पदार्थ
हैं।
साइटोकाइनिन हार्मोन कार्य-
(i) ये हॉर्मोन वृद्धि को उत्प्रेरित करते हैं।
(ii) साइटोकाइनिन पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि में सहायक होता है।
(iii) साइटोकाइनिन बीजों के अंकुरण में भी सहायक होते हैं।

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36 एबसिसिक अम्ल का क्या प्रभाव होता है ?
उत्तर- एबसिसिक अम्ल का प्रभाव- यह वृद्धि को मन्द करता है या रोक देता है तथा फलों एवं पत्तियों को पौधों से अलग करता है। यह RNA (राइबोज न्यूक्लिक अम्ल), प्रोटीनों और पर्णहरित की हानि को उत्प्रेरित करता है।
37 हमारे शरीर में थायरॉक्सिन हॉर्मोन का क्या कार्य है ?
उत्तर-हमारे शरीर में थायरॉक्सिन हॉर्मोन के कार्य-
(i) यह हॉर्मोन शरीर की सामान्य वृद्धि के लिए आवश्यक है।
(ii) यह हॉर्मोन शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का उपापचय को नियंत्रित करता है।
(iii) यह ऊत्तकों के अंतरकोशिकीय द्रवों की प्रतिशतता को नियंत्रित करता है।
(iv) यह हृदय की पेशियों और केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होता है।
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38 मानव में यौवनारंभ से संबंधित हॉर्मोनों के नाम लिखें।
उत्तर-मानव में यौवनारंभ से संबंधित हॉर्मोनों के नाम- (i) टेस्टोस्टेरॉन (नर में), (ii) एस्ट्रोजन (मादा में)।
39 नर तथा मादा जनन हॉर्मोनों के नाम एवं कार्य लिखें। नर जनन हॉर्मोन- टेस्टोस्टेरॉन,
उत्तर-(i) टेस्टोस्टेरॉन के कार्य- शुक्राणुओं का निर्माण ।
(ii) मादा जनन हॉर्मोन- एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टरॉन ।
एस्ट्रोजन के कार्य- द्वितीय लैंगिक लक्षणों का विकास एवं जनन शक्ति का विकास।
प्रोजेस्टरॉन के कार्य- भ्रूण के विकास एवं पोषण में सहायक ।
40 किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?
उत्तर-ऑक्सिन नामक हॉर्मोन प्ररोह के अग्रभाग में संश्लेषित होता है। यह हमेशा प्ररोह के छाया में स्थित भाग में विसरित होता है और क्षेत्र की कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि को उत्प्रेरित करता है। इसके कारण प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ जाता है।
41 छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर-छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति स्पर्श-उद्दीपन के कारण होती है। इसमें पत्तियाँ मुरझा जाती हैं तथा किसी प्रकार की वृद्धि नहीं होती। यह अनुक्रिया तुरंत होती है। इसके विपरीत प्रकाश की ओर प्ररोह की गति एक वृद्धि गति है, जो प्रकाश-उद्दीपन के प्रभाव में प्रकाश संवेदी रसायनों से उत्प्रेरित होती है।
42 पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है ?
उत्तर-पौधों की विशेष कोशिकाओं द्वारा कुछ रासायनिक पदार्थ स्रावित होते हैं जिन्हें पादप हॉर्मोन कहते हैं। विभिन्न प्रकार के पादप हॉर्मोन वृद्धि व विकास तथा बाह्य वातावरण के साथ समन्वय स्थापित करते हैं ये पादप हॉर्मोन क्रिया स्थान से दूर कहीं स्रावित होकर विसरण द्वारा उस स्थान तक पहुँचकर कार्य करते है।
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43 जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना करें।
उत्तर-जलानुवर्तन प्रदर्शित करने के लिए बीजों के अंकुरण एक ऐसी जमीन के ऊपर करवाते हैं जो एक तरफ नम है तथा दूसरी तरफ सूखी। मूलांकुर पहले तो धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन दर्शाते हुए नीचे की ओर गति करते हैं, परन्तु जल्दी ही गीली जमीन की ओर मुड़ने लगते हैं। यह धनात्मक जलानुवर्तन गति को प्रदर्शित करता है।
44 एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-जीव के शरीर में अनगिनत प्रकार की जैविक रासायनिक अभिक्रियाएँ होती रहती हैं। इन अभिक्रियाओं की निश्चित गति होती है। इन अभिक्रियाओं को संचालित करने वाले अंग आपसी ताल-मेल या समन्वय से कार्य करते हैं। अतः जीवित रहने के लिए यह आवश्यक है कि अभिक्रियाओं की दर पर नियंत्रण रखा जाय और इसके लिए अंगों के बीच समन्वय भी अनिवार्य है। अतः किसी जीव के जीवित रहने के लिए नियंत्रण एवं समन्वय अनिवार्य है। ये दोनो कार्य तंत्र और हार्मोनों द्वारा संपादित किये जाते हैं।
45 निम्नांकित अन्तः स्रावी ग्रंथियों के कार्यों का वर्णन करें-
(i) थायरायड ग्रन्थि,
(ii) लैंगरहान्स द्वीपिकाएँ।
उत्तर-(i) थायरायड ग्रन्थि- यह ग्रन्थि गले में श्वासनली के पास स्थित होती हैं। इसकी दो पालियाँ होती हैं और दोनो पालियाँ श्वांस नली के अगल-बगल स्थित होती है।
(a) इसके हॉर्मोन शरीर की सामान्य वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं।
(b) ये कोशिका के उपापचय को बढ़ाते हैं।
(c) ये उत्तकों के द्रवों की प्रतिशतता को नियंत्रित रखते हैं।
(11) लैंगरहान्स द्वीपीकाएँ- अग्नाशय में ग्रन्थियों का क्षेत्र है जो द्वीप जैसा प्रतीत होता है। इसमें बनने वाला हार्मोन सीधे रक्त में मिल जाते हैं।
उत्तर- इनके द्वारा बनाए गए इन्सुलिन हॉर्मोन का कार्य-
(a) यह कार्बोहाइड्रेट के उपापचय की दर को बढ़ाता है।
(b) यह उत्तकों में प्रोटीन के संग्रह में सहायक है।
(c) यह जन्तुओं की वृद्धि को उत्प्रेरित करता है।
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46 मधुमेह क्या है ? यह क्यों होता है ?
उत्तर-यदि इन्सुलीन हॉर्मोन का स्राव उचित मात्रा में नहीं हो तो मधुमेह नामक रोग हो जाता है। ऐसे रोगी के रक्त में ग्लूकोज की मात्रा असंतुलित हो जाती है। इससे बहुत-से हानिकारक प्रभाव पड़ते है।
47 पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-पीयूस ग्रंथि मस्तिष्क के निचले भाग में स्थित होती है। यह वृद्धि हॉर्मोन स्रावित करके हड्डी तथा ऊतकों की वृद्धि को नियमित करती है। इसे मास्टर ग्रंथि इसलिए कहते है क्योंकि यह ऐसे हॉर्मोन स्रावित करती है जो अन्य ग्रंथियों के कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
48 टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन के कार्य बताएँ।
उत्तर-टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में सहायक लैगिंक अंगों तथा द्वितीयक लैगिंक लक्षणों जैसे दाढ़ी, मुँह तथा आवाज का नियंत्रण करना। एस्ट्रोजन स्त्रियों में सहायक लैगिंक अंगों तथा द्वितीयक लैगिंक लक्षणों जैसे स्तन, ग्रन्थियों, केश विन्यास तथा आवाज का नियंत्रण करना।
49 जब एड्रीनलिन रुधिर से स्रावित होता है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?
अथवा, हमारे शरीर में एड्रिनल हार्मोन किस प्रकार कार्य करता है ?
उत्तर-एड्रीनलीन हॉर्मोन एड्रीनल ग्रंथि में स्रावित होता है तथा सीधे रक्त में पहुंचकर पूरे शरीर में फैल जाता है। यह हृदय को प्रभावित करता है जिससे हृदय की गति तेज हो जाती है और पूरे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ जाती है। श्वसन-दर तेज हो जाती है और पेशियों को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। इन परिवर्तनों के कारण जीव का शरीर असामान्य परिस्थिति से निपटने में सक्षम हो जाता ।
50 हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है ? ऐसी स्थिति पर विचार करें जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्या उत्पन्न हो सकती है ।
उत्तर-ग्राही सूचनाओं को ग्रहण करके उन्हें आवेग के रूप में संवेदी तंत्रिका द्वारा मेरुरज्जु और मस्तिष्क में भेजते हैं। वहाँ उन सूचनाओं का विश्लेषण होता है। तदनुसार एक उपयुक्त आदेश आवेग के रूप में मोटर तंत्रिका द्वारा उस ग्राही अंग की पेशी में और ज्ञानेन्द्रियों में भेजा जाता है। तदनुसार अनुक्रिया होती है। यदि ग्राही अंग उचित प्रकार से कार्य नहीं करेगा तो सूचनाएँ मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक नहीं पहुँच सकेगी। इस प्रकार शरीर में आवश्यक कार्य सम्पादित
नहीं हो सकेगा और वह किसी भी संभावित खतरे का शिकार हो सकता है।

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51 जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है ?
उत्तर-जंतुओं में रासायनिक समन्वय जंतु हॉर्मोन द्वारा होता है। उच्च श्रेणी के जंतुओं (जैसे- मनुष्य) में हॉर्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों में बनते हैं। ये जटिल रासायनिक यौगिक होते हैं जो अंत स्रावी ग्रंथियों से निकलकर दूसरे क्षेत्र में स्थित अंग या अंगतंत्र पर अपना प्रभाव डालते हैं।
52 आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है ?
उत्तर-आयोडीन गले में स्थित थायरॉयड ग्रंथि द्वारा स्रावित हॉर्मोन थायरॉक्सीन के संश्लेषण में सहायक है। भोजन में लगातार बहुत दिनों तक आयोडीन की कमी के बने रहने पर थायरॉयड ग्रंथि में सूजन आ जाती है जो बाहर से घेघा या गॉयटर के रूप में दिखाई पड़ती है। आयोडीन जल के माध्यम से हमारे शरीर में पहुँचता है। जिस क्षेत्र के जल में आयोडीन की कमी होती है उस क्षेत्र के निवासियों में यह बीमारी अधिक दिखाई पड़ती है। यही कारण है कि आयोडीनयुक्त नमक के प्रयोग की सलाह दी जाती है।
control and coordination class 10 
53 मनुष्यों में बौनापन का क्या कारण है ?
उत्तर-मनुष्यों में लम्बाई में वृद्धि को उत्प्रेरित करने वाला हॉर्मोन पीयूष ग्रन्थि में बनता है। इस हॉर्मोन का स्राव यदि बाल्यावस्था में कम हो जाए तो वृद्धि रुक जाती है जिसे बौनापन कहते हैं। यद्यपि पीयूष ग्रन्थि बहुत से हॉर्मोनों का स्राव करती है, तथापि वृद्धि हॉर्मोन की कमी या अधिकता ही वृद्धि को प्रभावित करती है।
54 मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है ?
उत्तर-इनसुलीन एक हॉर्मोन है जो अग्नाशय पर पाई जाने वाली “आइलेट्स ऑफ लैंगरहैन्स” नामक अंतःस्रावी ग्रंथियों में बनता है। यह रक्त में शर्करा के स्तर का अनुरक्षण करता है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर में इनसुलीन का स्राव कम या बंद हो जाए तो रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाएगा जिससे उसे अनेक प्रकार के कष्ट होंगे। इस बीमारी को मधुमेह कहते हैं। ऐसे रोगियों को इनसुलीन हॉर्मोन की सुई देनी पड़ती है।
55. manav mastishk kab aaram karta hai
56 manav mastishk ka bhar kitna hota h kg me

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