ब्रिटिश काल में शिक्षा पाठ 7 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर| Ncert Solution For Class 8th

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ब्रिटिश काल में शिक्षा पाठ 7 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न Ncert Solution For Class 8th History के इस पोस्ट में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी को पाठ से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्न के उत्तर एक साथ मिलने वाले हैं, जिन्हें अध्ययन करके आप परीक्षा की तैयारी और अच्छी तरीका से कर सकते हैं, इसमें जितने भी कवर किए गए क्वेश्चन पिछले कई परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं, और उम्मीद है आने वाले परीक्षा में भी इस तरह के प्रश्न पूछे जा सकते हैं |

ब्रिटिश काल में शिक्षा पाठ 7 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर Ncert Solution For Class 8th

ब्रिटिश काल में शिक्षा पाठ 7 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
ब्रिटिश काल में शिक्षा पाठ 7 लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
ब्रिटिश काल में शिक्षा पाठ 7 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर

1 अंग्रेजी शिक्षा के बारे में महात्मा गाँधी के क्या विचार थे?
उत्तर-गाँधी जी का मानना था कि अंग्रेजी शिक्षा ने हमें अपना गुलाम बना दिया है। महात्मा गाँधी का कहना था कि औपनिवेशिक शिक्षा ने भारतीयों के मस्तिष्क में हीनता का बोध पैदा कर दिया है।

इसके प्रभाव में आकर यहाँ के लोग पश्चिमी सभ्यता को श्रेष्ठतर मानने लगे है और अपनी संस्कृति ,के प्रति उनका भाव नष्ट हो रहा था। महात्मा गाँधी ने कहा कि इस शिक्षा में विष भरा है, यह पापपूर्ण है। इसने भारतीयों को दास बना दिया है इसने लोगों पर बुरा प्रभाव डाला है।

महात्मा गाँधी एक ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे, जो भारतीयों के भीतर प्रतिष्ठा और स्वाभिमान का भाव पुनर्जीवित करें।
राष्ट्रीयआंदोलन के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा संस्थाओं को छोड़ दे और अंग्रेजों को बताएँ कि अब वे गुलाम बने रहने के लिए तैयार नहीं हैं।

महात्मा गाँधी की दृढ़ मान्यता थी कि शिक्षा केवल भारतीय भाषाओं में ही दी जानी चाहिए। महात्मा गाँधी का कहना था कि पश्चिमी शिक्षा मौखिक ज्ञान की बजाय केवल पढ़ने और लिखने पर केंद्रित है। उसमें पाठ्य पुस्तकों पर तो जोर दिया जाता है, लेकिन जीवन अनुभवों और व्यावहारिक ज्ञान की उपेक्षा की जाती है।

उनके मुताबिक अंग्रेजी में दी जा रही शिक्षा भारतीयों को अपाहिज बना रही है। जिसने उन्हें अपने सामाजिक परिवेश से काट दिया है और उन्हें अपनी ही भूमि पर अजनबी बना दिया है।

2 लॉर्ड मैकॉले की नीति से आप किस हद तक सहमत हैं? |
उत्तर-लॉर्ड मैकॉले की नीति में अंग्रेजी सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय तथा घोषणाएँ-

(क) मैकॉले के प्रपत्र का अनुसरण करते हुए सरकार ने अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम 1835 को लागू किया।
इसमें यह निर्देश दिया गया कि उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी भाषा होगी या प्राच्य संस्थाओं को सरकार की तरफ से प्रोत्साहन देने की नीति को रोक दिया गया। इसका प्रतिकूल प्रभाव कलकत्ता मदरसा तथा बनारस संस्कृत कॉलेज पर पड़ा।

(ख) इन संस्थाओं को अब ‘अंधकार फैलाने वाले मंदिरों’ के रूप में देखा जाने लगा तथा वे स्वयं में ही पतन की ओरउन्मुख होते जाएँगे।

(ग) स्कूलों के लिए अब अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकें सरकार द्वारा तैयार की जाने लगी। इस नीति से हम सहमत नहीं है क्योंकि लार्ड मैकॉले की नीति से भारतीय शिक्षण संस्थान बंद होते चले गए, इन संस्थाओं को अंधकार फैलाने वाले मंदिरों के रूप में देखा जाने लगा।

3 एक राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली की रूपरेखा वर्तमान परिवेश में क्या होनी चाहिए?
उत्तर-जैसे-जैसे राष्ट्रीय भावना का प्रसार हुआ। कई दूसरे विचारक भी इस बारे में सोचने लगे थे कि एक राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली की रूपरेखा क्या होनी चाहिए।

कुछ लोग अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई व्यवस्था में परिवर्तन चाहते उनका मानना था कि इसी व्यवस्था को इस तरह फैलाया जाय कि उसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिले।

इसके विपरीत बहुत सारे लोग ऐसे भी थे जो एक वैकल्पिक व्यवस्था चाहते थे, ताकि लोगों को सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय संस्कृति शिक्षा दी जा सके।आज भी राष्ट्रीय शिक्षा में नित्य नये प्रयोग हो रहे हैं। ताकि समकालीन चुनौतियों का सामना किया जा सके।

देखा जाय तो पश्चिम शिक्षा के सिर्फ नकारात्मक प्रभाव ही नहीं पड़े बल्कि कई सकारात्मक प्रभाव भी भारतीय समाज पर पड़े। पश्चिमी शिक्षा आधुनिकता की सूचक भी रही और इससे भारतीय समाज के उन्नयन हेतु उत्प्रेरक का भी कार्य किया।

जिससे प्रेरणा पाकर कई सामाजिक संगठनों ने बाल विवाह, बहु विवाह, कन्या हत्या, देवदासी प्रथा, बहुदेववाद तथा जातिवाद कि विरुद्ध आवाज उठाकर समाज को यथेष्ट नेतृत्व प्रदान किया तथा भारतीय राष्ट्रवाद एवं अर्थव्यवस्था के विकास में सराहनीय योगदान दिया।

4 झारखण्ड की मिशनरीज शैक्षणिक संस्थाओं का वर्णन करें।
उत्तर-झारखण्ड क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों ने औपचारिक शिक्षा की बुनियाद डाली। यह उनके लिए ईसाई धर्म के प्रचार का हिस्सा था।

शिक्षा के प्रचार-प्रसार के जरिए आदिवासियों के बीच पहुँच बनानेवालों में गोस्सनर इवेनजेलिकल, लुथेरन चर्च मिशन, एसपीजी मिशन, रोमन कैथलिक मिशन, युनाइटेड फ्री चर्च, डब्लिन युनिवर्सिटी मिशन, सेवेंथ डे एडवेन्टिस्ट मिशन के नाम उल्लेखनीय हैं।

ये लाचार व मजबूर बच्चों को अपने केन्द्रों में लाकर उन्हें शिक्षा प्रदान करते थे। 1845 ई० में गोस्सनर इवेनजेलिकल लुथरेन चर्च मिशन के धर्म प्रचारक कलकत्ता के बिशप के निर्देश पर छोटानागपुर पहुंचे।

उन्होंने ही सूची में सबसे पहले एक विद्यालय की स्थापना की। गोस्सनर मिशन द्वारा 1856 में गोस्सनर विद्यालय स्थापित की गई। एसपीजी मिशनरियों ने 1895 ई० में एक ब्लाइंड स्कूल स्थापित की, जहाँ ब्रैल लिपि से पढ़ाई होती थी।

एसपीजी मिशन द्वारा 1886 में लड़कियों के लिए राँची में संत मार्गेट बालिका उच्च विद्यालय तथा 1902 में संत पॉल उच्च विद्यालय स्थापित की गई। जीईएल चर्च द्वारा बेथेसदा महिला प्रशिक्षण स्कूल 1998 में खोला गया। लोहरदगा में आरसी मिशन स्कूल 1948 में खोला गया।

डब्लिन मिशन द्वारा झारखण्ड में प्रथम कॉलेज संत कोलम्बा कॉलेज की स्थापना 1899 ई० में की गई। रोमन कैथोलिक मिशन द्वारा 7 जुलाई, 1944 को रौंची में संत जेवियर कॉलेज की स्थापना की गई। 1946 ई० में राँची डिग्री कॉलेज की स्थापना की गई।

5 टैगोर एवं महात्मा गाँधी के शैक्षिक विचारों की तुलना करें।
उत्तर-कई अर्थों में टैगोर तथा गाँधीजी शिक्षा के बारे में विचार एक जैसे ही थे जो भी उनमें कुछ भेद भी थे, जो निम्नांकित हैं-

(क) गाँधीजी पश्चिमी सभ्यता के बहुत बड़े आलोचक थे और पश्चिमी लोग जो मशीनों तथा प्रौद्योगिकी की ही पूजा-अर्चना करते थे उनसे वह बिल्कुल भी सहमत नहीं थे जबकि टैगोर जो भी भारतीय परंपरा से सर्वश्रेष्ठ था उसे आधुनिक पश्चिमी सभ्यता के तत्वों के साथ मिश्रित कर देना चाहते थे।

(ख) गाँधीजी प्रारम्भिक शिक्षा हस्तकला या क्राफ्ट पर आधारित करके देशप्रेम, स्वावलंबी, स्व-सम्मानीय बनाते हुए न केवल मात्र पढ़ने तथा लिखने तक ही सीमित रखना चाहते थे बल्कि वह उसे मानव व्यक्तित्व की तीनोंपहलू-मस्तिष्क, शरीर एवं आत्मा के विकास या बालक के बहुआयामी विकास की प्रक्रिया बनाना चाहते थे। दूसरी ओर टैगोर ने शांतिनिकेतन में कला, संगीत तथा नृत्य के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा पर भी जोर दिया।jac board