भूमंडलीकृत विश्व का बनना पाठ 4 इतिहास

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भूमंडलीकृत विश्व का बनना परिचय

भूमंडलीकृत विश्व का बनना पाठ 4 क्लास दसवीं के इस ब्लॉग में आप सभी विद्यार्थियों को पाठ से जुड़ी महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न के कुछ दीर्घ उत्तरीय सवालों के जवाब बताने वाला हूँ आशा है आपको इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद जरूर कुछ ज्ञान प्राप्त अवश्य ही होगा इसलिए आप पूरा ब्लॉग पढ़े , तो चलिए सुरु करते है

भूमंडलीकृत विश्व का बनना दीर्घ उत्तरीय प्रश्न तथा उत्तर
(1.) अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों में तीन तरह की गतियों या प्रवाहों की व्याख्या करें।

 तीनों प्रकार की गतियों का भारत और भारतीयों से संबंधित एक एक उदाहरण दें और उनके बारे में संक्षेप में लिखें। 

उत्तर-अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों में तीन तरह की गतियाँ या प्रवाह- अर्थशास्त्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमय में 19 वीं 
शताब्दी में तीन प्रकार की गतियों प्रवाहों का वर्णन किया है-

(क) इसमें पहला प्रवाह व्यापार का होता है जो 19 वीं शताब्दी में वस्तुओं (कपडा और गेहूँ आदि) के व्यापार तक ही सीमित था।
(ख) दूसरा प्रवाह श्रम का होता है जिसमें विभिन्न प्रकार के लोग काम या रोजगार की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक 
जाते हैं।
(ग) तीसरा प्रवाह पूँजी का होता है जिसे थोड़े या लम्बे समय के लिए दूर-स्थित  इलाकों में निवेश कर दिया जाता है।

भारत से तीन प्रवाहों के उदाहरण- भारत में प्राचीन काल से ही ये तीनों प्रकार के प्रवाह देखने को मिलते हैं-

(क) पाचीन काल से ही भारतीयों ने आस-पास और दूर-दराज के देशों से व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित कर रखे थे। आज से 
5,000 वर्ष पहले सिन्ध घाटी  के लोगों के मैसोपोटामिया और क्रीट जैसे देशों के साथ गहरे व्यापारिक सम्बन्ध थे।

(ख) 19 वीं शताब्दी में बहुत से भारतीय कारीगर और मजदूर अनेक देशों में बागान, खानों, सड़क निर्माण और रेल निर्माण का 
काम करने के लिए गए।

(ग) ब्रिटिश काल में बहुत से यूरोपीय व्यापारियों और उद्योगपतियों ने भारत में धन का निवेश किया और अनेक प्रकार के यहाँ
 कारखानों, रेलों आदि का निर्माण किया और यहाँ चाय आदि के अनेक बागान स्थापित किए।

भूमंडलीकृत विश्व का बनना पाठ 4 के महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय सवाल जवाब


(2.) महामंदी के कारणों की व्याख्या करें।

उत्तर-1929 ई० में समस्त संसार को एक भयंकर आर्थिक संकट ने आ घेरा। ऐसा आर्थिक संकट पहले कभी देखने में नहीं 
आया था। यह संकट संयुक्त राज्य अमेरिका में 1929 ई० में पैदा हुआ और देखते ही देखते यह 1931 ई० तक रूस को 
छोड़कर विश्व के अनेक देशों में फैल गया।आर्थिक संकट (1929) के लिए उत्तरदायी कारण और कारक-

(क) यह संकट औद्योगिक क्रांति के कारण चीजों की आवश्यकता से अधिक उत्पादन के कारण पैदा हुआ। 1930 ई० में 
अमेरिका में तैयार माल के इतने भण्डार हो गए कि उनका कोई खरीददार न रहा।

(ख) प्रथम विश्वयुद्ध के कारण यूरोप के देश इतने बर्बाद हो गए थे कि वे अमेरिका से माल आयात करने की अवस्था में न थे।

(ग) जब तैयार माल का कोई खरीददार न रहा तो वहाँ कारखाने बन्द हो गए और हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए।

(घ) जब कारखाने बन्द हो गए तो किसानों की पैदावार का भी कोई खरीददार न रहा। इस तरह किसानों के लाभ में भी कमी 
आ गई और कृषि मजदूरों की मजदूरी कम हो गई।

(ङ) अमेरिका की ‘Share Exchange Market’ में शेयरों की कीमत में गिरावट आ गई जिससे वहाँ कोई 1,00,000 
व्यापारियों का दीवाला निकल गया।



(3.) जी-77 क्या है ? जी-77 को ब्रेटन वुड्स की जुड़वा संतानों की प्रतिक्रिया किस आधार पर
 कहा जा सकता है ? व्याख्या करें।

उत्तर- जी-77- जी-77 विकासशील देशों का एक ऐसा समूह था जिन्हें 1944 में होने वाले ब्रेटन वुडस के सम्मेलन में होने वाले 
नियमों से कोई लाभ नहीं हुआ था, इसलिए वे एक नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली की माँग करने लगे थे।
जी-77 को ब्रेटन वुड्स की जुड़वा संतानों की प्रतिक्रिया के रूप में विकासब्रेटन वुडस के सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और
 विश्व बैंक का जन्म हुआ था जिन्हें ब्रेटन वुड्स की जुड़वा संतान कहा जाता है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक 
पर केवल कुछ शक्तिशाली विकसित देशों का ही दबदबा था इसलिए उनसे विकासशील देशों को कोई विशेष लाभ न हुआ। इसलिए इन ब्रेटन वुड्स को जुड़वा संतान की प्रतिक्रिया के रूप में विकासशील देशों के जी-77 नामक देशों ने नई आर्थिक 
प्रणाली की माँग कर डाली ताकि उनके अपने आर्थिक उद्देश्य पूरे हो सके जैसे-

(क) इस नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली से उन्हें यह आशा थी कि उन्हें अपने संसाधनों पर सही अर्थों में नियन्त्रण हो सके।
(ख) उन्हें विकास के लिए अधिक सहायता मिल सके।
(ग) उन्हें कच्चे माल के सही दाम मिल सके।(घ) उन्हें अपने तैयार मालों के लिए विकसित देशों के बाजारों में बेचने के लिए बेहतर पहुँच मिले।


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