भारत में खाद्य सुरक्षा पाठ 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर।Ncert Solution For Class 9th Economics

भारत में खाद्य सुरक्षा पाठ 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर,Ncert Solution For Class 9th Economics के इस पाठ में आप सभी विद्यार्थियों का स्वागत है, इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी विद्यार्थियों को पाठ से जुड़ी हर महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी प्रश्न जो परीक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, और पिछले कई परीक्षा में इस तरह के प्रश्न पूछे जा चुके हैं, उन्हीं प्रश्नों के उत्तर इस ब्लॉग पोस्ट पर कबर किया गया है, जोकि विद्यार्थी के लिए काफी उपयोगी है-

भारत में खाद्य सुरक्षापाठ 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर,Ncert Solution For Class 9th

भारत में खाद्य सुरक्षा पाठ 3 MCQ प्रश्नोत्तर
भारत में खाद्य सुरक्षा पाठ 3 अति उत्तरीय प्रश्नोत्तर
भारत में खाद्य सुरक्षा पाठ 3 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
भारत में खाद्य सुरक्षा पाठ 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

1 भारत में खाद्य की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है ?
उत्तर-खाद्य सुरक्षा का अर्थ है- सभी लोगों के लिए सदैव भोजन की उपलब्धता, पहुँच और उसे प्राप्त करने का सामर्थ्य । इस प्रकार, खाद्य सुरक्षा की धारणा के निम्न आयाम हैं-
(क) खाद्य की उपलब्धता- खाद्य सुरक्षा के अन्तर्गत जनसंख्या के लिए खाद्य की भौतिक उपलब्धता आता है। इसमें देश के भीतर खाद्य उत्पादन, खाद्य आयात एवं सरकारी अन्न भंडारों में एकत्रित पिछले वर्षों के भंडार शामिल होता है।

(ख) खाद्य की सुलभता या पहुँच- इसका अर्थ होता है कि खाद्य प्रत्येक व्यक्ति की पहुँच के भीतर हो।

(ग) खाद्य की समर्थता- इसका अर्थ है-प्रत्येक व्यक्ति के पास अपनी आवश्यकता का खाद्य खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा हो।

(घ) पौष्टिक खाद्य- उपलब्ध खाद्य व्यक्ति की आहार-संबंधी आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में ही नहीं, बल्कि सुरक्षित एवं पौष्टिक भी होनी चाहिए।

(ङ) सभी समयों में उपलब्ध- एक देश किसी विशेष समय में खाद्य में आत्म-निर्भर प्राप्त कर सकता है परन्तु खाद्य सुरक्षा से आशय दीर्घकाल के लिए खाद्य में आत्म-निर्भरता होता है।

2 हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बना दिया है, कैसे ? वर्णन करें।
उत्तर-जब भारत स्वाधीन हुआ तो देश में खाद्यान्नों की भीषण कमी थी। इसके फलस्वरूप भारत को अन्य देशों से विशाल मात्रा में अनाजों का आयात करना पड़ता था।

यह अनाज अधिकतर अमेरिका, आस्ट्रेलिया और अन्य देशों से मंगाया जाता था। इस स्थिति का सामना करने के लिए भारत सरकार ने कृषि की स्थिति सुधारने के लिए विभिन्न प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार किये जो निम्नांकित हैं-

प्रथम पंचवर्षीय योजना में कृषि को विशेष महत्व दिया गया। सिंचाई के लिए कई योजनाएं बनाई गई और कम उपजाऊ भूमि को भी खेती योग्य बनाने के लिए कदम उठाए गए। नए और वैज्ञानिक ढंग से कृषि के साधन अपनाए गए। नए और अधिक देने वाले बीज तैयार किए गए।

किसानों को खाद इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया जो उन्हें कम कीमत पर देने का प्रबन्ध किया गया। इन सब उपायों के फलस्वरूप ही छठे दशक में कृषि में एक महान्क्रांति हुई और कृषि वस्तुओं का उत्पादन तेजी से बढ़ा। विशेष रूप से गेहूँ और चावल आदि खाद्यान्नों के उत्पादन में पंजाब और हरियाणा के राज्यों में रिकार्ड वृद्धि हुई। कृषि उत्पादन में हुई इस महान क्रांति को ‘हरित क्रांति का नाम दिया गया है।

इस हरित क्रांति ने न केवल गेहूँ और चावल आदि के उत्पादन में आत्म-निर्भर बनाया है वरन् भारतीय समाज पर बड़े गहरे सामाजिक-आर्थिक प्रभाव डाले हैं। अब हम कृषि के क्षेत्र में प्राप्त की गई अपनी सफलता पर गर्व कर सकते हैं।

अब हमें अपना भोजन दूसरे देशों से नहीं मंगवाना पड़ता। क्या यह हमारी महान सफलता नहीं है। भोजन माँगने की ऐसी अवस्था हमारे लिए कितनी लज्जाजनक थी। इसके अतिरिक्त अब हरित क्रांति के परिणामस्वरूप बहुत-सी विदेशी मुद्रा बच जाती है जो पहले खाद्यान्नों के मामले में स्वावलम्बी बन चुके हैं हमें यह स्थिति बरकरार रखनी चाहिये।

इसके लिए जहाँ हमें कृषि के क्षेत्र में अधिक से खाद्य-पदार्थ तथा अन्य कृषि-सम्बन्धी सामग्री पैदा करनी चाहिए वहाँ अपनी जनसंख्या को भी सीमित रखना होगा।

NCERT Solutions for Class 9th पाठ 4 – भारत में खाद्य सुरक्षा अर्थशास्त्र

3 गरीबों को खाद्य सुरक्षा देने के लिए सरकार ने क्या किया? सरकार की ओर से शुरू की गई किन्हीं दो योजनाओं की चर्चा करें।
उत्तर-गरीबों को खाद्य सुरक्षा देने के लिए हमारी सरकार अपनी खाद्य सुरक्षा प्रणाली को सावधानीपूर्वक तैयार करती है।
इस प्रणाली के दो घटक हैं-
(क) बफर स्टॉक और
(ख) सार्वजनिक वितरण प्रणाली ।
बफर स्टॉक अनाजों का सरकारी भंडार है जबकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीबों में सरकार विनियमित राशन की दुकानों के माध्यम से संचित अनाजों को वितरित करने की प्रणाली है।

1970 के दशक में खाद्य संबंधी तीन महत्त्वपूर्ण अंतःक्षेप कार्यक्रम प्रारंभ किए-
(क) सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावशाली बनाया गया है,
(ख) एकीकृत बाल्य विकास सेवाएँ वर्ष 1975 में प्रारंभ की गई और
(ग) ‘काम के बदले अनाज’ वर्ष 1977-78 में शुरू की गई। वर्तमान में अनेक गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम चल रहे हैं जो खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों को भी शामिल करते हैं। ये गरीबों की आय बढ़ाकर अपना योगदान देते हैं।

जबकि कई कार्यक्रम जैसे- सार्वजनिक वितरण प्रणाली, दोपहर का भोजन आदि विशेष रूप से खाद्य की दृष्टि से सुरक्षा के कार्यक्रम हैं। पिछले वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक कारगर बनाया गया है। इसके अलावा, वर्ष 2000 ‘गरीबों में भी सर्वाधिक गरीब’ और ‘दीन वरिष्ठ नागरिक’ समूहों पर लक्षित दो विशेष योजनाएँ प्रारंभ की गईं-

(क) अंत्योदय अन्न योजना- इस योजना के अन्तर्गत अब 35 किलोग्राम अनाज प्रत्येक पात्र परिवार को 2 प्रति किलोग्राम गेहूँ और ₹3 प्रति किलोग्राम चावल की दर से उपलब्ध कराया जाता है।
(ख) अन्नपूर्णा योजना- इस योजना के अन्तर्गत दीन वरिष्ठ नागरिकों को 10 किलोग्राम अनाज मुफ्त दी जाती है। इन दोनों योजनाओं का संचालन सार्वजनिक वितरण प्रणाली के वर्तमान नेटवर्क से जोड़ दिया गया है।

4 राशन की दुकानों संचालन में क्या समस्याएँ हैं ?
उत्तर- राशन की दुकानों के संचालन में समस्याएँ- भारतीय खाद्य निगम द्वारा एकत्रित किया गया अनाज निर्धन लोगों को राशन की दुकानों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है जो देश के बहुत से भागों- गाँवों, जिलों, कस्बों और नगरों में स्थापित की गई हैं।

इस समय देश में कोई 4.6 लाख से भी अधिक राशन की दुकानें हैं। यह राशन की दुकानें लोगों को गेहूँ, चावल, चीनी और मिट्टी का तेल आदि वस्तुएँ बाजार की कीमत से कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं। कोई भी गरीब परिवार ये चीजे अपनी निकट की राशन की दुकान से प्राप्त कर सकता परन्तु हाल में राशन की इन दुकानों के संचालन में अनेक त्रुटियों दृष्टिगोचर हुई हैं और अनेक समस्याएँ पाई गई हैं, जो निःसन्देह एक सोच का विषय है।

(क) सर्वप्रथम, यह कहा जाता है कि निर्धन लोगों को राशन की दुकानों से चीजें मिलती हैं वे घटिया प्रकार की होती हैं, इसलिए उनको अपने आवश्यकता की चीजें बाजार से ही खरीदनी पड़ती है।

(ख) दूसरे, राशन की दुकानों के डीलर राशन के सामान को अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से खुले बाजार में बेच देते हैं। कई बार उन्हें चक्की वालों को गेहूँ बेचते हुए प्रायः देखा जा सकता है।

(ग) कुछ राशन डीलर कम तोल कर भी गरीबों को ठगने का प्रयास करते हैं। कुछ राशन डीलर कभी-कभार अपनी दुकानें खोलते ही नहीं ताकि निर्धन लोग अपने राशन का कोटा ले ही न सकें।

(ङ) कई बार भारतीय खाद्य निगम की ओर से ही राशन के दुकानदारों को घटिया प्रकार की सामग्री मिल जाती है, जो काफी समय तक उनकी दुकानों पर ही सड़ती रहती है।

(च) तीन प्रकार के कार्यों के बनने से राशन की दुकानों का सारा काम ही काफी उलझनपूर्ण हो गया है। किसको किस मूल्य से राशन देना है, काफी उलझने पैदा कर देता है इसलिए बहुत से राशन डीलर अपने आप ही अपना काम बंद करने को विवश हो जाते हैं।

(छ) विशेषकर ऐसे परिवार जो गरीबी रेखा से ऊपर हैं, उन्हें इन राशन की दुकानों का कोई लाभ नहीं रहा क्योंकि उन्हें राशन की दुकानों से बाजार मूल्य पर ही चीजें मिलती है इसलिए वे राशन की दुकानों से राशन लेना बंद कर देते हैं।

5 खाद्य और सम्बन्धित वस्तुओं को उपलब्ध कराने में सहकारी समितियों की भूमिका पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर-खाद्य और सम्बन्धित वस्तुओं को उपलब्ध कराने में सहकारी समितियों की भूमिका- देश के कुछ विशेष भागों, विशेषकर दक्षिण और पश्चिम के भागों में, सहकारी समितियाँ भी खाद्य सुरक्षा में बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यू समितियों गरीब लोगों के लिये बड़ी सहायता का कार्य करती हैं। उन्हें खाद्यान्न सस्ते दामों पर मिल सकें इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये वे कम कीमत वाली दुकानें खोलती है। निम्नांकित क्षेत्रों में उनकी भूमिका प्रशंसनीय हैं।

(क) ऐसा देखा गया है कि तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में राशन की जितनी भी दुकानें हैं उनका 94% भाग इन सहकारी समितियों के माध्यम से ही चलाया जाता है।

(ख) दिल्ली जैसे स्थानों पर इन सहकारी समितियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। उदाहरणार्थ दिल्ली में मदर डेयरी उपभोक्ताओं को काफी उचित मूल्य पर दूध और कई बार सब्जियाँ आदि भी सप्लाई करती है।

(ग) गुजरात में अमूल जैसी अनेक सहकारी समितियाँ हैं जिन्होंने वहाँ बडे उचित दामों में लोगों को दूध और दूध की बनी चीजें सप्लाई करना शुरूकिया हुआ है। इसने अब गुजरात से बाहर भी दूध और दूध उत्पादों कोलोगों तक उचित दामों में पहुँचना शुरू कर दिया है। इस प्रकार समितिने देश में श्वेत क्रांति ला दी है।

(घ) केवल यह नहीं महाराष्ट्र में एक अन्य सहकारी संस्था, एकेडमी ऑफ डेवलेपमेंट ऑफ साइंस ने विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों की अनाज बैंकोंकी स्थापना में विशेष सहायता की है। इन अनाज बैंकों ने जनसाधारण,विशेषकर निर्धन वर्ग के लोगों को खाद्य-सुरक्षा उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्णभूमिका अदा की है।इस प्रकार खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में सहकारी समितियों कीभूमिका प्रशंसनीय हैं।jac board