बेरोजगारी की समस्या पर निबंध हिंदी

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बेरोजगारी परिचय

बेरोजगारी की समस्या हमारे देश भारत की तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या ने बहुत बड़ा रूप धारण कर लिया है, बेरोजगारी का मुख्य कारण ही बढ़ती हुई जनसंख्या है।जानकारों का मानना है, कि हमारे देश भारत में बढ़ती भ्रष्टाचार, असमानता, शिक्षा की कमी,देश में रोजगार की कमी भी अधिक जनसंख्या के कारण ही उत्पन होता है। भारत देश में विकसित होती टेक्नोलॉजी,तकनीक ने भी रोजगार के अवसर को कम कर दिया है,चलिए आगे संछिप्त में चर्चा करते है –

  • भूमिका, 
  • अर्थ, 
  • बेरोजगारी क्या होती है
  • प्रकार
  • कारण, 
  • दुष्परिणाम, 
  • समाधान।

भूमिका

 आज भारत के सामने अनेक समस्याएँ चट्टान बनकर प्रगति का रास्ता रोके खड़ी हैं। उनमें से एक प्रमुख समस्या है- बेरोजगारी। महात्मा गांधी ने इसे ‘समस्याओं की समस्या’ कहा था।

बेरोजगारी का अर्थ

 बेरोजगारी का अर्थ है- योग्यता के अनुसार काम का न होना। भारत में मुख्यतया तीन प्रकार के बेरोजगार हैं एक वे, जिनके पास आजीवका का कोई साधन नहीं है, वे पूरी तरह खाली दूसरे जिनके पास कुछ समय काम होता, परन्तु मौसम या काम का समय समाप्त होते ही वे बेकार हो जाते हैं। ये आंशिक बेरोजगार कहलाते हैं। तीसरे वे, जिन्हें योग्यता के अनुसार काम नहीं मिला। जैसे कोई एम० ए० करके रिक्शा चला रहा है या बी० ए० करके पकौड़े बेच रहा है।

बेरोजगारी क्या होती है ?

साधारण भाषा में ऐसे व्यक्ति जो किसी उत्पादक गतिविधि में नहीं लगे हैं, बेरोजगार कहलाते है ऐसी स्थिति को बेरोजगारी कहते है।

बेरोजगारी की समस्या का मुख्य कारण

बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण है- जनंसख्याविस्फोट इस देश में रोजगार देने की जितनी योजनाएँ बनती हैं, वे सब अत्यधिक जनसंख्या बढ़ने के कारण बेकार हो जाती हैं। एक अनार सौ बीमार वाली कहावत यहाँ पूरी तरह चरितार्थ होती है बेराजगारी का दूसरा कारण है- युवकों में बाबूगिरी की होड़। नवयुवक हाथ का काम करने में अपना अपमान समझते हैं। विशेषकर पढ-लिखे युवक दफ्तरी जिंदगी पसंद करते हैं। इस कारण वे रोजगार-कार्यालय की धूल फाँकते रहते हैं। बेकारी का तीसरा बड़ा कारण है- दूषित शिक्षा-प्रणाली।

हमारी शिक्षा-प्रणाली नित नए बेरोजगार पैदा करती जा रही है। व्यावसायिक प्रशिक्षण का हमारी शिक्षा में अभाव है। चौथा कारण है- गलत योजनाएँ। सरकार को चाहिए कि वह लघु उद्योगों को प्रोत्साहन दे। मशीनीकरण को उस सीमा तक बढ़ाया जाना चाहिए जिससे कि रोजगार के अवसर कम न हों। इसीलिए गांधी जी ने मशीनों का विरोध किया था, क्योंकि एक मशीन कई कारीगरों के हाथों को बेकार बना डालती है। सोचिए, अगर साबुन बनाने का लाइसेंस बड़े उद्योगों को न दिया जाए तो उससे हजारों-लाखों युवक यह धंधा अपनाकर अपनी आजीवका कमा सकते हैं। 

बेरोजगारी के प्रकार

बेरोजगारी के प्रकार निम्न है –

  • प्रच्छन्न बेरोजगारी
  • मौसमी बेरोजगारी
  • खुली बेरोजगारी
  • शिक्षित बेरोजगारी
  • चक्रीय बेरोजगारी
  • स्वैच्छिक बेरोजगारी 
  • अक्षमता बेरोजगारी 
  • संरचनात्मक बेरोजगारी 

प्रच्छन्न बेरोजगारी

बेरोजगारी की समस्या में प्रच्छन्न बेरोजगारी या गुप्त बेरोजगारीभी है, भारत में किसान उत्पादन के लिए पुराने दंग ही प्रयोग करते हैं क्योंकि वे गरीब हैं वे भूमि के स्वामी भी नहीं हैं। अगर खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाया जाए तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकती है जबकि भूमि के किसी टुकड़े पर परिवार के तीन सदस्यों के स्थान पर दो सदस्य ही काम चला सकते हैं, परन्तु इसके अभाव के कारण तीनों सदस्यों को उसी खेत पर काम करना पड़ता है।

इस प्रकार उत्पन्न हुई बेरोजगारी को प्रच्छन्न या गुप्त बेरोजगारी कहा जाता है। प्रच्छन्न बेरोजगारी आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाती है क्योंकि वहाँ बहुत से परिवारों के पास छोटे खेत होते हैं परन्तु उन पर परिवार के सारे सदस्य काम करते हैं। जहाँ दो व्यक्ति खेती के काम को पूरा कर सकते हैं वहाँ पाँच सदस्य लगे हुए हैं परन्तु सबके लिए वहाँ पूरा काम नहीं हो तो।

ऐसे परिवार के दो या तीन सदस्य यदि कोई और काम कर लें, जैसे किसी कारखाने में काम कर लें तो खेती के कार्य को फर्क नहीं पड़ेगा। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में भी प्रच्छन्न बेरोजगारी पाई जाती है। वहाँ भी मजदूरों, पेंटरों, प्लम्बरों आदि रोजगारों को महीने में केवल 10 से 15 दिन तक ही काम मिलता है, बाकी दिन वे बेकार रहते हैं। इस बेरोजगारी को भी हम प्रच्छन्न बेरोजगारी कहते हैं।

मौसमी बेरोजगारी

किसान या व्यक्ति किसी एक निश्चित अवधि में काम करने के बाद बेरोजगार हो जाते हैं मौसमी बेरोजगारी कहलाती है। यह बेरोजगारी अधिकतर कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।

खुली बेरोजगारी

इस प्रकार की बेरोजगारी के अंतर्गत लोग पूर्णतः बेरोजगार होते हैं। इसके अंतर्गत एक भी व्यक्ति को काम उपलब्ध नहीं होता है।
इस प्रकार की बेरोजगारी औद्योगिक क्षेत्रों में पाई जाती है।इस प्रकार के बेरोजगार लोगों की गणना स्पष्ट रूप से की जा सकती है।

शिक्षित बेरोजगारी

शिक्षित बेरोजगारी हमारे देश की या अन्य किसी भी देश का एक भीषण समस्या बनकर सामने आ रही है। भारत में उपस्थित युवाओं का प्रतिशत दिन प्रति दिन लगातार बढ़ते जा रही है और वह हर दिन रोजगार पाने के लिए लम्बी कतारों में लगती जा रही है और शिक्षित होने के बावजूद बहुत सारे अनगिनत युवको को उनके अनुसार उचित रोजगार या नौकरी नहीं मिल रहा है।

चक्रीय बेरोजगारी

चक्रीय बेरोजगारी एक ऐसी बेरोजगारी  है , जो जब हमारे अर्थव्यवस्था के बीच में चक्रीय उतार चढ़ाव आती है। कभी अर्थव्यवस्था,तेजी, सुस्ती, मंदी तथा अन्य किसी भी अवस्थाएं या चक्र में होती है। तब एक पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं हैं दिखाई देती है।

स्वैच्छिक बेरोजगारी

जब किसी काम करने वाले व्यक्ति को वर्तमान समय में मजदूरी दर पर काम मिल जाता है बल्कि वह व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार उन्हें काम नहीं मिलता है ,तो उसे स्वैच्छिक बेरोजगारी कहते हैं। उदाहरण के लिए आप समझ सकते है – यदि कोई आदमी को अपने इच्छा के अनुसार रोजगार नहीं मिलता है तो वह आदमी किसी अन्य रोजगार को छोड़ देता है।

अक्षमता बेरोजगारी 

अक्षमता बेरोजगार एक ऐसी बेरोजगारी है जब कोई आदमी किसी रोजगार को करने में मानसिक एवं शारीरिक दोनों रूप से अक्षम होता है तो इस प्रकार के बेरोजगारी को अक्षमता बेरोजगारी कहते है ।

संरचनात्मक बेरोजगारी 

जब अर्थव्यवस्था के भीतर उत्पादन और मांग के पैटर्न में दीर्घकालिक परिवर्तन होते हैं। इस तरह की बेरोजगारी तब होती है। जब हमारे देश भारत की अर्थव्यवस्था में प्रौद्योगिकी और उपभोक्ता मांग में परिवर्तन होती हैं जब कंप्यूटर शुरू हुआ है उस समय से तो काम करने वालों के उपलब्ध कौशल और उनके नौकरी के दायित्व के बीच में विचलन के कारण और अधिक बढ़ती जा रही है कई श्रमिकों को विस्थापित किया जा रहा है। देखा जाय तो देश में नौकरियां उपलब्ध है, लेकिन उनके क्षमता और योग्यता की एक नया श्रेणी का मांग किया जा रहा था, इसलिए पुराने कौशल रखने वाले व्यक्ति विकृत आर्थिक प्रभुत्व में रोजगार और नौकरी के अवसर प्राप्त करने में सक्षम नहीं होते हैं ।

बेरोजगारी की समस्या का दुष्परिणाम

 बेरोजगारी के दुष्परिणाम अतीव भयंकर हैं। खाली दिमाग शैतान का घर। बेरोजगार युवक कुछ भी गलत शलत करने पर उतारू हो जाता है।वही शांति को भंग करने में सबसे आगे होता है शिक्षा का माहौल भी वही बिगाड़ते हैं जिन्हें अपना भविष्य अंधकारमय लगता है।

बेरोजगारी की समस्या समाधान

बेकारी का समाधान तभी हो सकता है, जब जनसंख्या पर रोक लगाई जाए। युवक हाथ का काम करें। सरकार लघु उद्योगों को प्रोत्साहन दे। शिक्षा व्यवसाय से जुड़े तथा रोजगार के अधिकाधिक अवसर जुटाए जाएँ।

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