औद्योगीकरण का युग पाठ 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर NCERT Solution For Class 10th history

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औद्योगीकरण का युग पाठ 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर NCERT Solution For Class 10th

औद्योगीकरण का युग 
✔️औद्योगीकरण का युग पाठ 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
✔️औद्योगीकरण का युग पाठ 5 लघु उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
✔️औद्योगीकरण का युग पाठ 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के उत्तर
1 उन्नीसवीं सदी के यूरोप में कुछ उद्योगपति मशीनों की बजाय हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता क्यों देते थे ?
उत्तर-19 वीं सदी के यूरोप में कुछ उद्योगपति मशीनों की बजाए हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता देते थे। उनके ऐसा करने के पीछे अनेक कारण उपस्थित किए जाते थे-
(क) विक्टोरिया कालीन ब्रिटेन में मानव श्रम की कोई कमी नहीं थी इसलिए कुछ उद्योगपति मशीनों की बजाय हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता देते थे।
(ख) कुछ उद्योगपति बड़ी मशीनों पर भारी खर्चा करने से हिचकिचाते थे क्योंकि मशीने लगाने में यह जरूरी नहीं था कि उनको ऐसा करने से लाभ रहेगा।
(ग) बहुत से ऐसे उद्योग हैं जहाँ श्रमिकों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है जैसे- गैसघरों, शराबखानों, बंदरगाहों में जहाजों की मरम्मत और साफ-सफाई के काम में मजदूरों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है। ऐसे उद्योगों में उद्योगपति मशीनों की बजाय मजदूरों को ही काम पर रखना पसन्द करते थे।
(घ) यदि थोड़ी मात्रा में चीजें तैयार करनी होती थी तो भी मशीनों की बजाय मजदूरों से काम करवाना बेहतर समझा जाता था।
(ङ) कुछ वस्तुओं में लोग खास डिजाइनों की मांग करते थे जिन्हें मशीनों पर बनाना बहुत महंगा पड़ता था. और कठिन भी होता था। इसलिए ऐसे कामों में भी मशीनों की अपेक्षा मजदूरों को अच्छा समझा जाता था वहाँ यांत्रिक प्रौद्योगिकी की नहीं वरन् इंसानी निपुणता की आवश्यकता पड़ती थी।
(च) विक्टोरिया काल के कुछ उच्च वर्ग के लोग जैसे- कुलीन और पूंजीपति वर्ग हाथों से बनी चीजों को अधिक पसंद करते थे। हाथ से बनी चीजों को सत्कार और उच्च समाज का प्रतीक माना जाता था। क्योंकि उनको एक-एक करके बनाया जाता था इसलिए हाथ से बने माल के डिजाइन उत्तम होते थे और उनकी फिनिशिंग अच्छी होती थी।

औद्योगीकरण का युग class 10 notes in hindi

2 पहले विश्वयुद्ध के समय भारत का औद्योगिक उत्पादन क्यों बढ़ा ?
उत्तर-पहले विश्वयुद्ध के समय भारत का औद्योगिक उत्पादन क्यों बढ़ा इसके अनेक कारण दिए जाते है जिनमें से प्रमुख निम्नांकित है-
(क) प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटेन ऐसे उलझ गया कि उसका ध्यान अपने बचाओ में लग गया। वह अब भारत में अपने माल का निर्यात न कर सका जिसके कारण भारत के उद्योगों को पनपने का सुअवसर प्राप्त हो गया।
(ख) इंग्लैंड के सब कारखाने निर्यात की विभिन्न चीजें बनाने की बजाय सैनिक सामग्री बनाने में लग गई इसलिए भारतीय उद्योगों को रातोरात एक विशाल देशी बाजार मिल गया।
(ग) एक विशाल देशी बाजार मिलने के अतिरिक्त भारतीय उद्योगों को जब सरकार द्वारा भी अनेक चीजें जैसे- फौज के लिए वर्दियों, बूट आदि बनाने, टेंट आदि बनाने, घोड़ों के लिए अनेक प्रकार का सामान बनाने आदि के ऑर्डर मिल गए तो उनमें नई जान आ गई। जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ता गया भारतीय उद्योग भी प्रगति करते गया।
(घ) पुराने कारखानों के साथ-साथ बहुत सारे नए कारखाने खुल गए जिससे उद्योगपतियों को ही नहीं, वरन् मजदूरों और कारीगरों की भी चौदी हो गई, उनके वेतन बढ़ गए जिससे उनकी काया पलट गई।
(ड) प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सरकार को फंसा देखकर भारतीय नेताओं ने स्वदेशी पर अधिक बल देना शुरू कर दिया तो भारतीय उद्योगों के लिए सोने पर सुहागा वाली बात हो गई। इस प्रकार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप में प्रथम विश्वयुद्ध भारतीय उद्योगों के लिए एक वरदान सिद्ध हुआ। jac 

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