पाठ-5 अट नहीं रही है NCERT solutions for class 10th भावार्थ

हिंदी झारखण्ड बोर्ड हिंदी क्लास 10

अट नहीं रही है भावार्थ पाठ-5

अट नहीं रही है कविता के माध्यम से लोगों को कवि बताता है की कि फागुन मास का सौंदर्य इतना अधिक है कि उसकी शोभा समा नहीं पा रही है,चारों ओर फागुन का व्यापक सौंदर्य झलकता है, प्रकृति फूलों से भरपूर है,

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सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’

1.     अट नहीं रही है

आभा फागुन की तन

सट नहीं रही है ।

कहीं साँस लेते हो,

घर-घर भर देते हो

उड़ने को नभ में तुम

पर -पर देते हो

आँख हटाता हूँ

तो हट नहीं रही हैं ।

पत्तों से लदी डाल

कहीं हरी, कहीं लाल,

कहीं पड़ी है उर में

मंद-गंध-पुष्प-माल,

पाट-पाट शोभा-श्री

पट नहीं रही है।

(1.) उद्धृत काव्यांश का आशय (व्याख्या) स्पष्ट करें।

उत्तर –अट नहीं रही है में कवि बताता है कि फागुन मास का सौंदर्य इतना अधिक है कि उसकी शोभा समा नहीं पा रही है। यह शोभा प्रकृति के साथ-साथ शरीर पर भी दृष्टिगोचर हो रही है।कवि फागुन का मानवीकरण करता है। उसे साँस लेते हुए दर्शाता है। वह अपनी सुगध को सर्वत्र भर देता है। घर-घर इससे महक उठता है। चारों ओर फागुन का व्यापक सौंदर्य झलकता है। इससे मन कल्पनाओं के पंख लगाकर उन्मुक्त गगन में उड़ने को उत्सुक हो उठता है ।

कवि सर्वत्र फागुन के सौंदर्य का दर्शन करता है। उसकी आँखें इस सौंदर्य से अघाती नहीं। वह अपनी नजर इससे हटा नहीं पाता। पेड़-पौधों की डालियाँ हरे-हरे पत्तों से लद गई हैं कहीं हरी है तो कहा लाल आभा झलकती प्रतीत होती है। लोगों के गलों में धीमी-धीमी सुगंध वाले फूलों की माला पड़ी हुई है। प्रकृति फूलों से भरपूर है। चारों तरफ फागुन का सौंदर्य और उल्लास दिखाई पड़ता है। फागुन की शोभा जगह-जगह दिखाई दे रही है, वह समाए नहीं समा रही। Ncert Solution

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