जनसंख्या-वृद्धि पर निबंध लिखें

जनसंख्या वृद्धि से हानि

जनसंख्या-वृद्धि परिचय

  • भूमिका,
  • कारण,
  • हानि,
  • नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय। 

भूमिका- 

जनसंख्या-वृद्धि भारत की आबादी विश्व की कुल आबादी का 16 प्रतिशत है। परंतु उसके पास विश्व की कुल भूमि का केवल 2 प्रतिशत ही है। इस कारण भारत की भूमि पर जनसंख्या का घनत्व अत्यधिक बढ़ गया है। यहाँ साधन और सुविधाएँ तो सीमित हैं, लेकिन खाने वाले निरंतर बढ़ रहे हैं। रोज-रोज बढ़ने वाली यह भीड़ भारत के लिए चिंताजनक बनती जा रही है। 

किसी भी देश की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए वहां की आर्थिक विकास और जनसंख्या के ही हिसाब से तय किया जाता है। यह दोनों किसी भी देश या राष्ट्र के विकास के लिए सबसे बड़ा कारक होते हैं। हमारे भारत जैसे देश में जनसंख्या वृद्धि एक खतरनाक तरीका से बुम्ब कर रही है। भले ही हमारा देश भारत विश्व के सबसे अधिक युवा वाला देश होने का दावा करती हैं पर सच यही है कि अब हमारे भारत देश की जनसंख्या यहां की आर्थिक स्थिति को काफी नुकसान पहुंचा रही हैं

जनसंख्या-वृद्धि के प्रमुख कारण

  • चिकित्सा सेवाओं में वृद्धि,
  • कम आयु में विवाह,
  •  मनोरंजन के साधनों की कमी
  • निम्न साक्षरता दर
  • परिवार नियोजन के प्रति जागरूपता की कमी
  • गरीबी और
  • अंधविश्वास
  • सरकार की गलत नीतियां
  • जनसंख्या विरोधाभास आदि ने जनसंख्या बढ़ाने में योगदान किया है।

भारत में जनसंख्या बढ़ने का मुख्य कारण मृत्य-दर में कमी है। जन्म-दर पर नियंत्रण न रख पाना दूसरा बड़ा कारण है। यद्यपि भारत ने सबसे पहले परिवार-नियोजन कार्यक्रम चलाए, फिर भी जन्म-दर की गति को प्रभावी ढंग से रोका नहीं जा सका। यहाँ की जनता अंधविश्वासी है, गरीब और अनपढ़ है। इस कारण वह जनसंख्या घटाने का महत्व नहीं समझती। आश्चर्य यह है कि गरीब, अनपढ़ और धार्मिक लोगों में अधिक जन्म-दर है, जबकि वे बच्चों के पालन-पोषण में असमर्थ हैं। इसी कारण भारत में सर्वाधिक भूख, बीमारी, कुपोषण, गंदगी और परेशानियाँ हैं। यहाँ के महानगर विश्व के गंदे महानगरों में गिने जाते हैं। यहाँ प्रदूषण का यह हाल है कि छोटे-छोटे नगरों में भी साँस लेना कठिन होता जा रहा है।


जनसंख्या-वृद्धि से हानि

दबाव के कारण बेरोजगारों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इस कारण अपराध बढ़ रहे हैं। यद्यपि देश में प्रगति हो रही है। नए स्कूल, अस्पताल, कार्यालय खुल रहे हैं, परंतु जनसंख्या की बाढ़ में सब व्यवस्थाएँ धरी-की-धरी रह जाती हैं। परिणामस्वरूप आज भारत एक भीड़ में बदल गया है। सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कहीं लोग मेलों में दबकर मर रहे हैं तो कहीं भागदौड़ में।

जनसंख्या- वृद्धि के परिणाम

  • देश के संसाधनों पर दबाव
  • लोगों के जीवन स्तर में गिरावट
  • गरीबी का दुष्चक्र
  • देश का विकास प्रभावित

नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय

 जनसंख्या पर नियंत्रण पाना आज भारत की प्रमुखतम चुनौती बन चुकी है। इसके लिए आवश्यक है- शिक्षा का प्रसार, सीमित परिवार के महत्त्व का ज्ञान तथा गर्भ-निरोधक उपायों को और अधिक प्रचलन करना। सरकार इस दिशा में अग्रसर है, किंतु समाज के सहयोग के बिना ये काम संभव नहीं हैं। आज हमें दो बच्चों के नारे को और अधिक सीमित करना होगा। चीन की तरह एक ही बच्चे से संतुष्ट होना पड़ेगा। तभी भारत भूमि रहने योग्य बनी रह सकेगी।

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